गर्मी शुरू होते ही राज्य के अस्पतालों में हीट स्ट्रोक और तेज बुखार के मरीज बढ़ने लगे हैं। ओपीडी में भारी भीड़ देखी जा रही है। मरीजों में तेज सिरदर्द, चक्कर आना और डिहाइड्रेशन की शिकायतें 25 प्रतिशत तक बढ़ी हैं। आईजीआईएमएस, पीएमसीएच एवं एनएमसीएच के डॉक्टरों ने बताया कि ओपीडी में हर तीसरा मरीज इन समस्याओं के साथ आ रहा है। पटना सिविल सर्जन डॉ. योगेन्द्र प्रसाद मंडल ने बताया कि सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी हीट स्ट्रोक के लक्षण वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है। फिलहाल पटना में चमकी बुखार का कोई पुष्ट मामला नहीं है। एहतियात के तौर पर अस्पतालों में स्पेशल लू वार्ड और आईसीयू बेड के साथ ही साथ चमकी बुखार के मरीजों के लिए बेड आरक्षित किए गए हैं। 102 एंबुलेंस सेवा को अलर्ट पर रखा है और डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। बच्चों के लिए जरूरी सावधानियां रात में भरपेट खाना खिलाकर ही सुलाएं। पर्याप्त मात्रा में पानी और ओआरएस दें। तेज धूप में बाहर न निकलने दें। हल्के और पूरे शरीर ढकने वाले कपड़े पहनाएं। डॉक्टरों के अनुसार खाली पेट सोना बच्चों में शुगर लेवल गिराता है, जो चमकी का बड़ा कारण बन सकता है। हीट स्ट्रोक व चमकी बुखार के बीच फर्क समझें बीमारी: हीट स्ट्रोक | चमकी बुखार (एईएस) कारण: तेज गर्मी, लू | खाली पेट सोना, कुपोषण, गर्मी मुख्य लक्षण: तेज बुखार, बेहोशी, पसीना बंद | झटके, बेहोशी, सुस्ती जोखिम समूह: बुजुर्ग, मजदूर | छोटे बच्चे समय: दिन में ज्यादा | सुबह-सुबह ज्यादा केस पीएमसीएच में 20 बेड रिजर्व: अभी तापमान में असामान्य वृद्धि से बच्चों में एईएस (चमकी बुखार) का खतरा बढ़ गया है। हर साल गर्मी के दौरान राज्य में 150 से 200 बच्चों को चमकी बुखार होता है। 30 से 40 प्रतिशत मरीजों की मृत्यु हो जाती है। वर्ष 2019 में चमकी बुखार से 150 से अधिक बच्चों की जान गई थी। इस साल भी पड़ रही वैसी ही गर्मी ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। अस्पतालों में तैयारी रखी गई है। पीएमसीएच अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने बताया कि चमकी बुखार के पीड़ितों के लिए 20 बेड रिजर्व हैं। सिविल सर्जन ने बताया कि पीएचसी में चमकी या लू का संदिग्ध मरीज आते ही तुरंत प्राथमिक उपचार मिलेगा। गर्मी शुरू होते ही राज्य के अस्पतालों में हीट स्ट्रोक और तेज बुखार के मरीज बढ़ने लगे हैं। ओपीडी में भारी भीड़ देखी जा रही है। मरीजों में तेज सिरदर्द, चक्कर आना और डिहाइड्रेशन की शिकायतें 25 प्रतिशत तक बढ़ी हैं। आईजीआईएमएस, पीएमसीएच एवं एनएमसीएच के डॉक्टरों ने बताया कि ओपीडी में हर तीसरा मरीज इन समस्याओं के साथ आ रहा है। पटना सिविल सर्जन डॉ. योगेन्द्र प्रसाद मंडल ने बताया कि सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी हीट स्ट्रोक के लक्षण वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है। फिलहाल पटना में चमकी बुखार का कोई पुष्ट मामला नहीं है। एहतियात के तौर पर अस्पतालों में स्पेशल लू वार्ड और आईसीयू बेड के साथ ही साथ चमकी बुखार के मरीजों के लिए बेड आरक्षित किए गए हैं। 102 एंबुलेंस सेवा को अलर्ट पर रखा है और डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। बच्चों के लिए जरूरी सावधानियां रात में भरपेट खाना खिलाकर ही सुलाएं। पर्याप्त मात्रा में पानी और ओआरएस दें। तेज धूप में बाहर न निकलने दें। हल्के और पूरे शरीर ढकने वाले कपड़े पहनाएं। डॉक्टरों के अनुसार खाली पेट सोना बच्चों में शुगर लेवल गिराता है, जो चमकी का बड़ा कारण बन सकता है। हीट स्ट्रोक व चमकी बुखार के बीच फर्क समझें बीमारी: हीट स्ट्रोक | चमकी बुखार (एईएस) कारण: तेज गर्मी, लू | खाली पेट सोना, कुपोषण, गर्मी मुख्य लक्षण: तेज बुखार, बेहोशी, पसीना बंद | झटके, बेहोशी, सुस्ती जोखिम समूह: बुजुर्ग, मजदूर | छोटे बच्चे समय: दिन में ज्यादा | सुबह-सुबह ज्यादा केस पीएमसीएच में 20 बेड रिजर्व: अभी तापमान में असामान्य वृद्धि से बच्चों में एईएस (चमकी बुखार) का खतरा बढ़ गया है। हर साल गर्मी के दौरान राज्य में 150 से 200 बच्चों को चमकी बुखार होता है। 30 से 40 प्रतिशत मरीजों की मृत्यु हो जाती है। वर्ष 2019 में चमकी बुखार से 150 से अधिक बच्चों की जान गई थी। इस साल भी पड़ रही वैसी ही गर्मी ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। अस्पतालों में तैयारी रखी गई है। पीएमसीएच अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने बताया कि चमकी बुखार के पीड़ितों के लिए 20 बेड रिजर्व हैं। सिविल सर्जन ने बताया कि पीएचसी में चमकी या लू का संदिग्ध मरीज आते ही तुरंत प्राथमिक उपचार मिलेगा।


