खगड़िया में गंगा कटाव के विरोध में ग्रामीणों का प्रोटेस्ट:माथार घाट पर महिलाओं ने पूजा कर परमानेंट सॉल्यूशन की मांग की

खगड़िया में गंगा कटाव के विरोध में ग्रामीणों का प्रोटेस्ट:माथार घाट पर महिलाओं ने पूजा कर परमानेंट सॉल्यूशन की मांग की

खगड़िया के सदर प्रखंड की रहीमपुर दक्षिणी पंचायत के माथार नाव घाट पर मंगलवार, 31 मार्च को गंगा कटाव के विरोध में हजारों ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान गंगा पूजन सह एक दिवसीय उपवास कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें विशेष रूप से महिलाओं ने एकजुट होकर कटाव रोकने की मांग की। कार्यक्रम की अध्यक्षता पंचायत के पूर्व सरपंच शिवनंदन यादव ने की। मंच संचालन रामपुर गोगरी के मुखिया कृष्णानंद यादव द्वारा किया गया। घाट परिसर में सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए थे। विधि-विधान से गंगा पूजन के साथ हुआ कार्यक्रम का आरंभ कार्यक्रम का आरंभ हजारों महिलाओं द्वारा विधि-विधान से गंगा पूजन के साथ हुआ। महिलाओं ने गंगा मैया से क्षेत्र में कटाव रोकने और उनके घरों, खेतों तथा जीवन को सुरक्षित रखने की प्रार्थना की। गंगा कटाव से प्रभावित परिवारों ने सरकार से दियारा क्षेत्र को बचाने के लिए तत्काल 14 किलोमीटर लंबे सुरक्षा बांध (बंडाल) के निर्माण की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह कार्य समय पर नहीं हुआ, तो खगड़िया, बेगूसराय और मुंगेर जिलों की रघुनाथपुर, टीकारामपुर, रहीमपुर मध्य, उत्तरी रहीमपुर और दक्षिणी रहीमपुर पंचायतों के कई गांव तथा हजारों एकड़ उपजाऊ जमीन गंगा में विलीन हो जाएंगी। आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा सभा को संबोधित करते हुए इंजीनियर धर्मेंद्र कुमार ने सरकार से अपील की कि यह केवल एक मांग नहीं, बल्कि क्षेत्र के लोगों के अस्तित्व की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार जल्द सकारात्मक पहल नहीं करती है, तो आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा और यह पूरे क्षेत्र में फैल जाएगा। आंदोलन के प्रमुख नेतृत्वकर्ता नागेंद्र सिंह त्यागी ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी आंदोलन की सफलता उसकी विचारधारा और एकजुटता पर निर्भर करती है। उन्होंने इतिहास का उदाहरण देते हुए कहा कि अहिंसक आंदोलन हमेशा सफल रहे हैं। अहिंसक और संगठित तरीके से लड़ी जाएगी लड़ाई लोकनायक जयप्रकाश नारायण का आंदोलन हो या अन्ना हजारे का जन आंदोलन। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि गंगा कटाव के खिलाफ यह लड़ाई भी पूरी तरह अहिंसक और संगठित तरीके से लड़ी जाएगी और जीत हासिल की जाएगी। सभा में मौजूद विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के नेताओं ने भी एक स्वर में इस आंदोलन का समर्थन किया। सभी ने गंगा मां को साक्षी मानकर यह संकल्प लिया कि वे इस संघर्ष में तन, मन और धन से सहयोग करेंगे और तब तक पीछे नहीं हटेंगे, जब तक सरकार कटाव की स्थायी व्यवस्था नहीं कर देती। आंदोलन को और उग्र करने की चेतावनी कार्यक्रम के अंत में सामूहिक रूप से यह निर्णय लिया गया कि यदि सरकार जल्द कार्रवाई नहीं करती है तो आंदोलन को और उग्र एवं व्यापक बनाया जाएगा। लोगों ने स्पष्ट किया कि यह केवल जमीन बचाने की लड़ाई नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने की लड़ाई है। खगड़िया के सदर प्रखंड की रहीमपुर दक्षिणी पंचायत के माथार नाव घाट पर मंगलवार, 31 मार्च को गंगा कटाव के विरोध में हजारों ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान गंगा पूजन सह एक दिवसीय उपवास कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें विशेष रूप से महिलाओं ने एकजुट होकर कटाव रोकने की मांग की। कार्यक्रम की अध्यक्षता पंचायत के पूर्व सरपंच शिवनंदन यादव ने की। मंच संचालन रामपुर गोगरी के मुखिया कृष्णानंद यादव द्वारा किया गया। घाट परिसर में सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए थे। विधि-विधान से गंगा पूजन के साथ हुआ कार्यक्रम का आरंभ कार्यक्रम का आरंभ हजारों महिलाओं द्वारा विधि-विधान से गंगा पूजन के साथ हुआ। महिलाओं ने गंगा मैया से क्षेत्र में कटाव रोकने और उनके घरों, खेतों तथा जीवन को सुरक्षित रखने की प्रार्थना की। गंगा कटाव से प्रभावित परिवारों ने सरकार से दियारा क्षेत्र को बचाने के लिए तत्काल 14 किलोमीटर लंबे सुरक्षा बांध (बंडाल) के निर्माण की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह कार्य समय पर नहीं हुआ, तो खगड़िया, बेगूसराय और मुंगेर जिलों की रघुनाथपुर, टीकारामपुर, रहीमपुर मध्य, उत्तरी रहीमपुर और दक्षिणी रहीमपुर पंचायतों के कई गांव तथा हजारों एकड़ उपजाऊ जमीन गंगा में विलीन हो जाएंगी। आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा सभा को संबोधित करते हुए इंजीनियर धर्मेंद्र कुमार ने सरकार से अपील की कि यह केवल एक मांग नहीं, बल्कि क्षेत्र के लोगों के अस्तित्व की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार जल्द सकारात्मक पहल नहीं करती है, तो आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा और यह पूरे क्षेत्र में फैल जाएगा। आंदोलन के प्रमुख नेतृत्वकर्ता नागेंद्र सिंह त्यागी ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी आंदोलन की सफलता उसकी विचारधारा और एकजुटता पर निर्भर करती है। उन्होंने इतिहास का उदाहरण देते हुए कहा कि अहिंसक आंदोलन हमेशा सफल रहे हैं। अहिंसक और संगठित तरीके से लड़ी जाएगी लड़ाई लोकनायक जयप्रकाश नारायण का आंदोलन हो या अन्ना हजारे का जन आंदोलन। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि गंगा कटाव के खिलाफ यह लड़ाई भी पूरी तरह अहिंसक और संगठित तरीके से लड़ी जाएगी और जीत हासिल की जाएगी। सभा में मौजूद विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के नेताओं ने भी एक स्वर में इस आंदोलन का समर्थन किया। सभी ने गंगा मां को साक्षी मानकर यह संकल्प लिया कि वे इस संघर्ष में तन, मन और धन से सहयोग करेंगे और तब तक पीछे नहीं हटेंगे, जब तक सरकार कटाव की स्थायी व्यवस्था नहीं कर देती। आंदोलन को और उग्र करने की चेतावनी कार्यक्रम के अंत में सामूहिक रूप से यह निर्णय लिया गया कि यदि सरकार जल्द कार्रवाई नहीं करती है तो आंदोलन को और उग्र एवं व्यापक बनाया जाएगा। लोगों ने स्पष्ट किया कि यह केवल जमीन बचाने की लड़ाई नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने की लड़ाई है।  

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