गुस्साए ट्रंप ने कहा-फ्रांस ने हमारा साथ नहीं दिया, याद रखूंगा, क्या बदला लेगा अमेरिका

गुस्साए ट्रंप ने कहा-फ्रांस ने हमारा साथ नहीं दिया, याद रखूंगा, क्या बदला लेगा अमेरिका

Strait of Hormuz : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे सैन्य संघर्ष (Military Conflict) के बीच फ्रांस की तटस्थता पर तीखा हमला (Verbal Attack) बोला है। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की सुरक्षा के लिए जो देश अमेरिका के साथ कंधे से कंधा मिला कर नहीं खड़े हैं, उन्हें भविष्य में गंभीर परिणाम (Serious Consequences) भुगतने होंगे। ट्रंप का दावा है कि अमेरिका वैश्विक ऊर्जा संकट (Global Energy Crisis) को हल करने के लिए अकेले लड़ रहा है, जबकि उसके पुराने सहयोगी (Allies) पीछे हट रहे हैं।

धोखे का हिसाब लेंगे ट्रंप (Diplomatic Revenge)

ट्रंप ने फ्रांस के राष्ट्रपति को निशाने पर लेते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में फ्रांस का पीछे हटना एक विश्वासघात जैसा है। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि वे फ्रांस के इस रवैये को हमेशा याद रखेंगे। अमेरिका अब पेरिस के साथ अपने सैन्य और व्यापारिक समझौतों पर पुनर्विचार कर सकता है। ट्रंप की इस नाराजगी ने नाटो (NATO) गठबंधन के भीतर भी दरार पैदा कर दी है, जिससे यूरोपीय देशों में डर का माहौल है।

ईरान के तेल संसाधनों पर “कंट्रोल” की रणनीति (Energy Domination)

ट्रंप ने अपनी रणनीति का खुलासा करते हुए कहा कि वे अब केवल रक्षात्मक युद्ध नहीं लड़ेंगे, बल्कि ईरान के तेल कुओं पर सीधा नियंत्रण करना चाहते हैं। ट्रंप का तर्क है कि ईरान की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ने के लिए उसके तेल संसाधनों पर कब्जा करना जरूरी है। यदि अमेरिका ईरान के प्रमुख तेल अड्डों को अपने हाथ में ले लेता है, तो वह वैश्विक बाजार में ईंधन की कीमतों को नियंत्रित कर सकेगा और ईरान को पूरी तरह अलग-थलग कर देगा।

ऑपरेशन ऑयल रिग” शुरू कर सकता है ट्रंप प्रशासन

फ्रांसीसी राजनयिकों ने ट्रंप के इस बयान को “अत्यधिक उत्तेजक” बताया है। फ्रांस का कहना है कि वे शांति चाहते हैं, न कि मध्य पूर्व में एक पूर्ण विकसित युद्ध। वहीं, चीन और रूस ने ट्रंप की “तेल हड़पो” नीति को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि 6 अप्रेल की डेडलाइन तक ईरान ने अपने समुद्री रास्ते नहीं खोले, तो ट्रंप प्रशासन “ऑपरेशन ऑयल रिग” शुरू कर सकता है। इसमें अमेरिकी नौसेना ईरान के रिफाइनरी केंद्रों पर स्ट्राइक कर सकती है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर बड़ा असर पड़ा

इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। ट्रंप की घोषणा के बाद से ही तेल के दाम तेजी से बढ़ने लगे हैं। भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि वे अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी मार्ग पर निर्भर हैं।

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