भास्कर न्यूज|गुमला स्थानीय लिप्टस बगीचा स्थित धुमकुड़िया भवन में “झारखंड पेसा एसएलएमटी” एवं “परंपरागत स्वशासन सशक्तिकरण संस्थान” के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आदिवासी समाज की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को मजबूती प्रदान करना और झारखंड पेसा नियमावली की बारीकियों से जन-जन को अवगत कराना था। प्रशिक्षण सत्र का नेतृत्व संस्थान के केंद्रीय अध्यक्ष संजीव भगत, भूषण भगत बड़ाईक, जलेश्वर उरांव और संतोष महतो ने किया। वक्ताओं ने विस्तार से बताया कि पेसा कानून किस प्रकार ग्राम सभाओं को आत्मनिर्भर बनाने और जल, जंगल, जमीन से जुड़े अधिकारों की रक्षा करने में सक्षम है। उन्होंने परंपरागत स्वशासन सशक्तिकरण संस्थान के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब तक समाज का अंतिम व्यक्ति अपने संवैधानिक और पारंपरिक अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं होगा, तब तक सर्वांगीण विकास संभव नहीं है। इस महत्वपूर्ण आयोजन को सफल बनाने में संस्थान के गुमला जिला अध्यक्ष व सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी जगन्नाथ उरांव, सचिव व सेवानिवृत्त बीएसएनएल अधिकारी शुकुल उरांव, जोगी उरांव, विनोद उरांव और संजय उरांव की सक्रिय भूमिका रही। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी लोगों ने यह संकल्प लिया कि वे पेसा नियमावली की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाएंगे। प्रशिक्षण में समाज के कई गणमान्य व्यक्तियों ने हिस्सा लिया, जिनमें सेवानिवृत्त डीडीसी श्री पुनई उरांव, परंपरागत पड़हा व्यवस्था के राजी बेल फौदा उरांव, सुशील उरांव, जनार्दन टाना भगत, बलकू उरांव और करमा उरांव प्रमुख थे। उपस्थित अतिथियों और समाज के प्रबुद्ध जनों ने इस बात पर जोर दिया कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी पारंपरिक व्यवस्था में निहित है, जिसे आधुनिक नियमों के साथ समन्वय बिठाकर और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।


