जयपुर। शहर के सबसे व्यस्त चौराहों में शामिल 200 फीट बाइपास स्थित हीरापुरा जंक्शन पर ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने के लिए बड़ा प्रोजेक्ट शुरू होने जा रहा है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआइ) ने अंडरपास और फ्लाईओवर निर्माण की योजना को मंजूरी देते हुए काम के लिए लेटर ऑफ अवार्ड जारी कर दिया है। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद इस जंक्शन पर लगने वाले लंबे जाम से लोगों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
काम शुरू करने के निर्देश
एनएचएआइ के अनुसार इस प्रोजेक्ट के तहत 200 फीट बाइपास और जयपुर-किशनगढ़ सिक्स लेन हाईवे पर कुल दो अंडरपास और दो फ्लाईओवर बनाए जाएंगे। इसके लिए चयनित निर्माण कंपनी को जल्द से जल्द ग्राउंड पर काम शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। पूरे प्रोजेक्ट को पूरा होने में करीब दो साल से अधिक का समय लग सकता है।
योजना के तहत एक अंडरपास मानसरोवर से दिल्ली, सिरसी और कालवाड़ की दिशा में जाने वाले यातायात के लिए बनाया जाएगा, जबकि दूसरा अंडरपास दिल्ली से मानसरोवर आने वाले वाहनों के लिए होगा। ये दोनों अंडरपास करीब 600 से 700 मीटर लंबे और दो-दो लेन के होंगे, जिससे ट्रैफिक का दबाव कम होगा और वाहन बिना रुकावट के निकल सकेंगे।
लंबा फ्लाईओवर बनेगा
इसके अलावा फ्लाईओवर निर्माण भी इस प्रोजेक्ट का अहम हिस्सा है। अजमेर की तरफ से आने वाले भारी वाहनों को सीधे दिल्ली और सीकर की ओर भेजने के लिए सर्विस लेन के ऊपर लंबा फ्लाईओवर बनाया जाएगा। वहीं दूसरा फ्लाईओवर जयपुर शहर के वैशाली नगर और अजमेर रोड से आने वाले ट्रैफिक को सीधे अजमेर की ओर जाने में मदद करेगा, जिसकी लंबाई करीब 900 मीटर होगी। वर्तमान में हीरापुरा जंक्शन पर सुबह और शाम के समय सबसे ज्यादा ट्रैफिक दबाव रहता है।
जाम से मिलेगी राहत
पीक ऑवर्स में यहां इतनी भीड़ हो जाती है कि मानसरोवर से दिल्ली की दिशा में जंक्शन पार करने में 8 से 10 मिनट तक का समय लग जाता है। कई बार यहां लंबी कतारें लग जाती हैं, जिससे आमजन को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। एनएचएआइ का मानना है कि अंडरपास और फ्लाईओवर बनने के बाद इस क्षेत्र में ट्रैफिक का प्रवाह सुगम हो जाएगा।
खासकर जयपुर-अजमेर और दिल्ली रूट पर यात्रा करने वाले लोगों को सीधा फायदा मिलेगा। इस प्रोजेक्ट के शुरू होने से न केवल ट्रैफिक जाम की समस्या कम होगी, बल्कि शहर के प्रमुख मार्गों पर यात्रा का समय भी घटेगा। आने वाले समय में यह जंक्शन आधुनिक यातायात व्यवस्था का उदाहरण बन सकता है, जिससे रोजाना हजारों वाहन चालकों को राहत मिलेगी।


