इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कौशांबी जिले के वन स्टॉप सेंटर में नाबालिग पीड़िता के आत्महत्या किए जाने की घटना को गंभीरता लिया है। कोर्ट ने इस मामले में लापरवाही और असंवेदनशीलता की आशंका जताते हुए कौशांबी के पुलिस अधीक्षक, करारी के थाना प्रभारी और वन स्टॉप सेंटर के अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने पूछा किन हालात में उठाया कदम
अदालत ने अधिकारियों से पूछा है कि किन परिस्थितियों में पीड़िता ने आत्मघाती कदम उठाया। इन सभी अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर अदालत में अपना व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर पूरी स्थिति स्पष्ट करने का आदेश दिया गया है। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने नाबालिग किशोर की याचिका पर दिया है। जानिए क्या है मामला
मामले में 22 अप्रैल 2026 को न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराए गए पीड़िता के बयानों को देखने के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता है। अपनी मृत्यु से पहले दिए गए बयान में 17 वर्षीय पीड़िता ने स्पष्ट किया था कि वह 15 अप्रैल 2026 को अपनी मर्जी से घर छोड़कर निकली थी और उसे किसी ने बहला-फुसलाकर अगवा नहीं किया था। पीड़िता ने यह भी बताया था कि उसके पिता ने याची युवक के खिलाफ झूठी प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई है, जबकि वह याची को जानती तक नहीं है और न ही उसके साथ कोई गलत काम हुआ है। अपने माता-पिता के पास वापस जाने से इन्कार करने के बाद बाल कल्याण समिति के आदेश पर उसे वन स्टॉप सेंटर भेजा गया था, जहां उसने खुदकुशी कर ली। खंडपीठ ने मामले की गंभीरता और परिस्थितियों को देखते हुए करारी थाने में याचिकाकर्ता के खिलाफ दर्ज मामले में गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने रजिस्ट्रार (अनुपालन) को निर्देश दिया है कि वह मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) कौशांबी के माध्यम से 24 घंटे के भीतर यह आदेश संबंधित पुलिस अधिकारियों तक पहुंचाएं। मामले की अगली सुनवाई 21 मई 2026 को होगी।


