झांसी में कारोबारियों से 70 लाख की धूस लेने के आरोपी सेंट्रल जीएसटी के अधीक्षक अजय शर्मा और अनिल कुमार तिवारी के खिलाफ CBI ने शिकंजा कस दिया है। दोनों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का केस भी दर्ज कर लिया गया। 30 दिसंबर को CBI ने दोनों अधीक्षकों और डिप्टी कमिश्नर (IRS अफसर) प्रभा भंडारी समेत 5 लोगों को गिरफ्तार किया था। जांच में दोनों अधीक्षकों के पास उनकी वैध आय से तीन गुना अधिक कीमत की संपत्तियों का पता चला है। अब जानिए, 4 साल में किसकी कितनी आय और व्यय 1.11 की आय, प्रोपर्टी बनाई 4.57 करोड़ की सीबीआई ने घूसखोरी के इस रैकेट के खुलासे के बाद दोनों अधीक्षकों की संपत्तियों की जांच की। जिसमें सामने आया कि अजय शर्मा ने 1 जनवरी 2022 से 5 जनवरी 2026 की अवधि के दौरान अपने और परिजनों के नाम पर कुल 4.57 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्तियों को अर्जित किया, जबकि इस अवधि में उनकी सभी वैध स्त्रोतों से कुल 1.11 करोड़ रुपए की आय हुई। इस तरह उन्होंने अपनी वैध आय से तीन गुना अधिक रकम संपत्तियों को अर्जित करने में व्यय की, जो गैरकानूनी है। 57.95 लाख आय, खर्च 2 करोड इसी तरह अधीक्षक अनिल कुमार तिवारी ने भी अपनी वैध आय से दोगुना अधिक रकम संपत्तियों को अर्जित करने में व्यय की। उन्होंने 1 जनवरी 2022 से 31 दिसंबर 2025 अपनी आय के सभी वैध स्रोतों से कुल 57.95 लाख रुपए अर्जित किए, जबकि चल-अचल संपत्तियों को अर्जित करने एवं भरण पोषण में करीब 2 करोड़ रुपए व्यय किए। डिप्टी कमिश्नर पर भी हो सकता है केस
सीबीआई घूसखोरी के आरोप में गिरफ्तार डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी के खिलाफ भी जांच कर रही है। सूत्रों के मुताबिक उनके खिलाफ भी जल्द आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का केस दर्ज हो सकता है। बता दें कि तीनों अफसरों ने दो कारोबारियों के ठिकानों पर छापे के बाद मामला रफा-दफा करने के लिए 1.50 करोड़ रुपए की रिश्वत मांगी थी। इसका सुराग मिलने पर सीबीआई ने तीनों अफसरों के साथ एक कारोबारी और बिचौलिए की भूमिका निभाने वाले अधिवक्ता को गिरफ्तार किया था। उनके पास से 70 लाख रुपए से अधिक की नकदी भी बरामद की गई थी। 4 पॉइंट में समझिए पूरा मामला 18 दिसंबर को डिप्टी कमिश्नर प्रभारी भंडारी के नेतृत्व में जीएसटी टीम ने झोकन बाग स्थित जय अम्बे प्लाईवुड और जय दुर्गा हार्डवेयर के ऑफिस और गोदामों पर छापा मारा। यहां बड़ी टैक्स चोरी पकड़ी गई। केस को निपटाने के लिए फर्म मालिकों और सेंट्रल जीएसटी के अफसरों के बीच बड़ी डील हो चुकी थी। इसकी खबर सीबीआई तक पहुंची तो सीबीआई ने पल-पल का इनपुट जुटाना शुरू किया। पता चला- जब दोनों फर्मों पर छापा पड़ा तो मालिकों ने मामला निपटाने के लिए अधिवक्ता नरेश गुप्ता से बात की। नरेश ने सुपरिटेंडेंट अनिल कुमार से बात की और रिश्वत लेकर मामले को निपटाने की पेशकश की। तब अनिल बोला- बड़ी मात्रा में टैक्स चोरी है। मेडम प्रभा भंडारी भी तलाशी स्थल पर मौजूद हैं। फिर भी मदद करेंगे। फर्म मालिक लोकेश और राजू मंगतानी ने सुपरिटेंडेंट अनिल और फिर अजय के आवास पर मीटिंग की। जहां पूरे मामले को निपटाने का सौदा हुआ। अफसरों ने डेढ़ करोड़ रुपए की रिश्वत मांगी। फर्म मालिक ने रुपए कम करने के लिए कहा तो बोले कि मैडम ने रिश्वत की राशि कम करने के लिए मना कर दिया। पूरे डेढ़ करोड़ रुपए लगेंगे। 29 दिसंबर को नरेश ने राजू मंगनानी से कहा कि साहब को देने के लिए रुपए तैयार रखो। 30 दिसंबर को सीबीआई ने डिप्टी कमिश्नर समेत 5 आरोपियों को अरेस्ट कर 1.60 करोड़ रुपए, भारी मात्रा में गहने, प्रॉपर्टी के दस्तावेज बरामद किए। सीबीआई के ट्रैप की पूरी कहानी 30 दिसंबर को झांसी पहुंची CBI टीम: CBI टीम ने कार्रवाई के लिए 30 दिसंबर को ही झांसी में डेरा डाल दिया था। टीम को मालूम चला था कि कार्रवाई रोकने की एवज में सेंट्रल जीएसटी अफसर लंबी रिश्वत लेने की फिराक में हैं। इनपुट मिला कि 30 दिसंबर को घूस के 70 लाख रुपए अफसरों तक पहुंचने वाले हैं। दो सुपरिटेंडेंट और फर्म के मालिक को गिरफ्तार किया: CBI की टीम के जाल में अफसर फंस गए। 70 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ अनिल तिवारी और अजय शर्मा को गिरफ्तार किया। साथ में फर्म के मालिक राजू मंगतानी और वकील नरेश कुमार गुप्ता को भी अरेस्ट किया गया। सुपरिटेंडेंट ने खोली डिप्टी कमिश्नर की पोल: सीबीआई ने सुपरिटेंडेंट से पूछताछ की तो बोले- प्रभा भंडारी के कहने पर रिश्वतखोरी का खेल चल रहा था। मैडम ही मास्टरमाइंड हैं। मैडम को ये भी पता है कि आज पहली किस्त के तौर पर 70 लाख मिलने वाले हैं। तब सीबीआई अफसरों ने अपने सामने डिप्टी कमिश्नर को फोन कराया। कॉल को रिकॉर्ड भी किया। तलाशी में 90 लाख रुपए और मिले: इसके बाद सीबीआई ने दिल्ली से प्रभा भंडारी को अरेस्ट किया। उनके घर और अन्य ठिकानों की तलाशी ली गई। गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने प्रभा भंडारी को गाजियाबाद कोर्ट में पेश कर रिमांड में लिया। फ्लाइट से लखनऊ पहुंचे। बाकी चार आरोपियों को झांसी कोर्ट में पेश करने के बाद लखनऊ लाया गया। CBI की FIR में दो और कारोबारियों के नाम खुलासा होने के बाद सीबीआई ने लखनऊ में 7 नामजद और अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया है। इसमें डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी, जीएसटी सुपरिटेंडेंट सिविल लाइन निवासी अनिल तिवारी और शिवाजी नगर निवासी अजय शर्मा, सिविल लाइंस निवासी वकील नरेश कुमार गुप्ता और मयूर विहार कॉलानी निवासी जय दुर्गा हार्डवेयर के मालिक राजू मंगनानी अरेस्ट हो चुके हैं। इसके अलावा राजू का भाई तेजपाल मंगनानी और आवास विकास कॉलोनी-1 निवासी जय अंबे प्लाईवुड के मालिक लोकेश तोलानी को भी आरोपी बनाया गया है।


