10वीं कक्षा का परिणाम:रिजल्ट 95.39 प्रतिशत, 17 से 13वें स्थान पर आया भरतपुर

10वीं कक्षा का परिणाम:रिजल्ट 95.39 प्रतिशत, 17 से 13वें स्थान पर आया भरतपुर

पहली बार मार्च में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर ने मंगलवार दोपहर में 10वीं कक्षा का परिणाम जारी किया। इस बार भरतपुर जिले का परिणाम 1.14 प्रतिशत बढ़ा है। पिछले साल 94.25 प्रतिशत पास होने की संख्या थी। वहीं इस बार 95.39 प्रतिशत विद्यार्थी पास हुए। प्रदेश की शिक्षा रैंकिंग में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिला है। चार साल में पहली बार बेहतर परिणाम देने में भरतपुर जिले ने उल्लेखनीय सुधार करते हुए 17वीं रैंक से छलांग लगाकर 13वीं रैंक हासिल की है। इसके अलावा पिछले 4 साल का जिले ने रिकॉर्ड तोड़ा है। वर्ष 2022,2023, 2024,2025 में भरतपुर 41 जिलों में लगातार 4 साल से 17वें स्थान पर रहा है। इस बार भी जिले में लड़कियों का परिणाम 95.49 व लड़कों का परिणाम 95.30 प्रतिशत रहा है। इसी के साथ ही अन्य जिलों की अपेक्षा सबसे अधिक रिजल्ट देने में 14वें स्थान पर भरतपुर की लड़कियां रहीं। कुल 26358 परीक्षा में बैंठे, जिसमें 14353 लड़के, 12005 लड़कियां रहीं। 8119 छात्र प्रथम व 7219 छात्राएं प्रथम रहीं। वैर क्षेत्र के छात्र आर्यन ने 99.50 प्रतिशत अंक हासिल कर जिले में सबसे आगे स्थान बनाया। वहीं भरतपुर की छात्रा वंदना ने 99.33 प्रतिशत अंक प्राप्त कर दूसरा स्थान हासिल किया। भास्कर एक्सपर्ट – यशवीर सिंह , प्रधानाचार्य माआ​सी.सै. इस बार समय से सिलेबस हुआ इस बार विद्यालयों में समय से पहले सिलेबस पूरा कराने और छात्रों को परीक्षा की बेहतर तैयारी करवाने का सकारात्मक असर परिणामों में साफ दिखाई दिया। शिक्षकों ने नियमित कक्षाओं के साथ अतिरिक्त पुनरावृत्ति, मॉडल पेपर हल कराने और कमजोर विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान देने की रणनीति अपनाई, जिससे छात्रों का प्रदर्शन पहले की तुलना में बेहतर रहा। विद्यालय स्तर पर प्री-बोर्ड परीक्षाएं समय पर आयोजित की गईं और उनके आधार पर छात्रों को कमियों से अवगत कराते हुए सुधार कराया गया। इस बार भी टॉपर्स की संख्या में बाजी मार ले गए निजी संस्थान, सरकारी की आखिरी 2022 में रही थी टॉपर इस बार घोषित परिणामों में एक बार फिर निजी संस्थानों का दबदबा देखने को मिला। टॉपर्स की सूची में अधिकतर स्थान निजी स्कूलों के विद्यार्थियों ने हासिल किए, जबकि सरकारी स्कूलों के छात्र पीछे रह गए। आंकड़ों के अनुसार, सरकारी स्कूल का कोई छात्र शीर्ष स्थानों में शामिल नहीं हो पाया। पूर्व उपनिदेशक शिक्षा भरतपुर ओम प्रकाश शर्मा बताते हैं कि सरकारी विद्यालयों में विषयवार शिक्षकों की हमेशा कमी रहती है। इससे रिजल्ट प्रभावित होता है। साथ ही शिक्षकों की कभी पशु गणना, जनसंख्या गणना, ट्रांसफर, चुनाव कार्य आदि में ड्यूटी लगा दी जाती है. इससे भी शिक्षा प्रभावित होती है। सबसे अहम बात सरकारी टीचरों के बच्चे भी सरकारी स्कूल में ही पढ़ने चाहिए। तब जाकर सरकारी स्कूल में रिजल्ट सुधार होगा। आखिरी बार 2022 में राजकीय उच्च मा. विद्यालय सतवास की कुसुम 98 प्रतिशत के साथ टॉप थ्री में आई थी।

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