Bengal Elections 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर भारत निर्वाचन आयोग ने बड़ा फैसला लिया है। आयोग ने पश्चिम बंगाल में 73 रिटर्निंग अधिकारियों को हटा दिया है। इस कदम से आयोग और बंगाल सरकार के बीच टकराव का नया मोर्चा खुल गया है। यह विरोध राज्य कैडर के कई नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों के तबादले को लेकर है, जिनमें पूर्व मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती, पूर्व राज्य गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा, पूर्व कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक पीयूष पांडे और कोलकाता पुलिस के पूर्व कमिश्नर सुप्रतिम सरकार जैसे नाम शामिल हैं।
73 RO को हटाया गया
पश्चिम बंगाल में विधानसभा सीटों की कुल संख्या 294 है और हर सीट के लिए आमतौर पर एक रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) नियुक्त किया जाता है। 73 आरओ को हटाए जाने के साथ ही, राज्य में कुल आरओ में से लगभग 26 प्रतिशत को बदल दिया गया है। आयोग ने सोमवार रात इस संबंध में एक अधिसूचना जारी की।
आयोग के फैसले के खिलाफ PIL दाखिल
वहीं, कलकत्ता हाईकोर्ट में एक PIL दायर की गई है। याचिका में राज्य कैडर के कई शीर्ष नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों के तबादले के ईसीआई के फैसले को चुनौती दी गई है। इस मामले पर प्रारंभिक सुनवाई सोमवार को हुई। सुनवाई के दौरान, ईसीआई के वकील ने कलकत्ता हाई कोर्ट की एक डिवीजन बेंच को बताया कि नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों के तबादले हर राज्य में जमीनी स्तर की जरूरतों के हिसाब से अलग-अलग होते हैं। वकील ने दलील दी कि हालांकि आयोग के पास असीमित अधिकार नहीं हैं, लेकिन उसके पास यह अधिकार जरूर है कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए जरूरी फैसले ले सके कि मतदान प्रक्रिया स्वतंत्र, निष्पक्ष और हिंसा-मुक्त रहे।
उन्होंने कोर्ट के सामने उन नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों का ब्योरा भी पेश किया, जिनका तबादला किया गया है, जिन्हें बदला गया है, या जिन्हें चुनाव वाले अन्य राज्यों में डेपुटेशन पर भेजा गया है। मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की डिवीजन बेंच द्वारा इस मामले पर अगली सुनवाई बुधवार के लिए तय की गई है।
23 व 29 अप्रैल को वोटिंग, 4 मई को नतीजे
पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव 23 और 29 अप्रैल 2026 को दो चरणों में होंगे। मतगणना 4 मई 2026 को होगी। मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और विपक्षी भाजपा के बीच है। 2021 के चुनाव में टीएमसी ने 215 सीटें जीतकर ममता बनर्जी के नेतृत्व में सरकार बनाई थी, जबकि भाजपा 77 सीटों के साथ मुख्य विपक्ष बनी थी।


