‘मैं उनके पास गया था, लेकिन वो मेरे नहीं हो सके। वो हटे तो अपनी पत्नी को CM बना दिया। उसने महिलाओं के लिए कोई काम नहीं किया।’ 23 मार्च को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिना नाम लिए जहानाबाद में लालू फैमिली पर निशाना साधा। नीतीश कुमार ने 20 साल से ज्यादा समय तक बिहार की राजनीति में यह संदेश दिया कि हमारे लिए राजनीति में परिवारवाद की कोई जगह नहीं है। खुद को वंशवाद का मुखर विरोधी के रूप में पेश किया और लालू यादव जैसे नेताओं पर हमले किए। लेकिन उम्र के इस पड़ाव पर वे अपनी सबसे बड़ी राजनीतिक पूंजी परिवारवाद से समझौता करते दिख रहे हैं। बेटा निशांत JDU में एंट्री कर चुका है। उनके नई सरकार में डिप्टी CM बनने की भी चर्चा है। आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में नीतीश कुमार के समझौतावादी पॉलिटिक्स की कहानी…। उन्होंने बिहार छोड़ते-छोड़ते अपनी सत्ता बरकरार रखने के लिए 4 बड़े सिद्धांतों से समझौता किया। 1. परिवारवादः बेटे निशांत को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी बीते 2 साल में नीतीश कुमार के भाषणों का एनालिसिस करेंगे तो पाएंगे कि उन्होंने हर सभा और रैली में एक लाइन जरूरी बोली है। वो लाइन है… ‘2005 से पहले बिहार में कुछ था जी, वो हटे तो पत्नी को CM बना दिया। उन्होंने सिर्फ अपने परिवार वालों के लिए किया।’ नीतीश कुमार इस बयान के जरिए लालू यादव की आलोचना करते हैं। क्योंकि लालू फैमिली के 5 सदस्य राजनीति में हैं। दूसरी तरफ 8 मार्च को नीतीश कुमार के इकलौते बेटे निशांत कुमार 45 साल की उम्र में आधिकारिक तौर पर JDU में शामिल हो गए हैं। चर्चा है कि नीतीश कुमार के दिल्ली जाने के बाद निशांत डिप्टी CM बन सकते हैं। निशांत कुमार पार्टी में तब आए हैं, जब पिता नीतीश कुमार बिहार की गद्दी छोड़कर राज्यसभा जा रहे हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री रहते नीतीश कुमार ने अपने परिवार को छोड़कर साथी नेताओं की पत्नी, बेटे-बेटी को आगे बढ़ाने से परहेज नहीं किया है। ग्राफिक में जानिए, कुछ प्रमुख नाम… 2. भ्रष्टाचारः 6 मंत्रियों से इस्तीफा लेने वाले नीतीश चौधरी पर चुप नीतीश कुमार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति का पालन करते रहे हैं। कभी सिर्फ आरोप लगने पर 6 मंत्रियों से इस्तीफा ले लिया था। लालू यादव से गठबंधन तोड़ लिया था। अशोक चौधरी पर दो साल में 200 करोड़ की जमीन खरीदने का आरोप अशोक चौधरी, नीतीश सरकार में ग्रामीण कार्य मंत्री हैं। सितंबर में प्रशांत किशोर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके आरोप लगाया कि चौधरी और उनके परिवार ने पिछले दो साल में करीब 200 करोड़ रुपए की जमीन खरीदी है। इसको लेकर प्रशांत किशोर ने 4 जमीन के सौदे की एक लिस्ट जारी की थी। प्रशांत किशोर के मुताबिक… गंभीर आरोप लगने पर चौधरी ने प्रशांत किशोर को 100 करोड़ रुपए के मानहानि का नोटिस भेजा था। 3. गठबंधन और सेकुलरिज्म पर बार-बार यू-टर्न नीतीश ने खुद को ‘सेकुलर’ और ‘साम्प्रदायिकता पर कोई समझौता नहीं’ करने वाला नेता बताया। लेकिन एक हकीकत यह है कि वह कुर्सी के लिए बार-बार गठबंधन बदलते रहे। BJP को साम्प्रदायिक बताकर गठबंधन तोड़ने वाले नीतीश फिर उसके साथ ही सरकार चला रहे हैं। वहीं, एक समय ऐसा भी आया जिस RJD के विरोध की राजनीति कर बिहार की सत्ता पर काबिज हुए, उसके साथ भी गठबंधन किया। सरकार चलाई। 4. फ्रीबीजः फ्री बिजली और महिलाओं को 10 हजार दिया नीतीश कुमार 20 साल से बिहार में काफी कलकुलेटिव तरीके से सरकारी योजनाएं लेकर आ रहे हैं। देश के एक मात्र मुख्यमंत्री थे, जिन्होंने फ्रीबीज का विरोध किया था। वे अक्सर कहते थे कि ऐसी योजनाएं पॉपुलिस्ट हैं, राज्य की अर्थव्यवस्था पर बोझ डालती हैं, और विकास को बाधित करती हैं। लेकिन विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने 2 लोकलुभावन योजना लाई। 1. 125 यूनिट बिजली फ्रीः 17 जुलाई 2025 को नीतीश कुमार ने घोषणा की कि 1 अगस्त 2025 से सभी घरेलू उपभोक्ताओं को हर महीने 125 यूनिट तक बिजली मुफ्त मिलेगी। इससे करीब 1.67 करोड़ घरेलू कनेक्शन वाले परिवार को फायदा हुआ। राज्य सरकार पर ₹3,797 करोड़ का बोझ बढ़ा। पुराना स्टैंडः फरवरी 2024 में बजट सत्र के दौरान विधानसभा में नीतीश कुमार ने कहा था- ‘मुफ्त बिजली देना बिल्कुल भी सही नहीं है।’ उन्होंने कहा था- ‘मैं शुरू से कहता आ रहा हूं कि मुफ्त नहीं दिया जाएगा। बहुत कम कीमत पर उपलब्ध कराया जा रहा है। कुछ राज्यों में मुफ्त देने की घोषणा करते हैं लेकिन हम ऐसा नहीं करेंगे।’ 2. महिलाओं को 10 हजारः 29 अगस्त 2025 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ‘महिला रोजगार योजना’ का ऐलान किया था। इसमें 18 से 60 साल की बिहार की महिलाओं को बिजनेस का एनालिसिस करने के बाद दो लाख रुपए दिए जाएंगे।’ फरवरी 2026 तक 1 करोड़ 56 लाख महिलाओं को 10-10 हजार रुपए दिए जा चुके हैं। पुराना स्टैंडः नीतीश कुमार पहले फ्री कैश ट्रांसफर या मुफ्त योजनाओं को “वोट बैंक पॉलिटिक्स” कहते थे। वे विकास पर फोकस (रोजगार, शिक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर) की बात करते थे, न कि डायरेक्ट कैश गिफ्ट्स देने की। ‘मैं उनके पास गया था, लेकिन वो मेरे नहीं हो सके। वो हटे तो अपनी पत्नी को CM बना दिया। उसने महिलाओं के लिए कोई काम नहीं किया।’ 23 मार्च को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिना नाम लिए जहानाबाद में लालू फैमिली पर निशाना साधा। नीतीश कुमार ने 20 साल से ज्यादा समय तक बिहार की राजनीति में यह संदेश दिया कि हमारे लिए राजनीति में परिवारवाद की कोई जगह नहीं है। खुद को वंशवाद का मुखर विरोधी के रूप में पेश किया और लालू यादव जैसे नेताओं पर हमले किए। लेकिन उम्र के इस पड़ाव पर वे अपनी सबसे बड़ी राजनीतिक पूंजी परिवारवाद से समझौता करते दिख रहे हैं। बेटा निशांत JDU में एंट्री कर चुका है। उनके नई सरकार में डिप्टी CM बनने की भी चर्चा है। आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में नीतीश कुमार के समझौतावादी पॉलिटिक्स की कहानी…। उन्होंने बिहार छोड़ते-छोड़ते अपनी सत्ता बरकरार रखने के लिए 4 बड़े सिद्धांतों से समझौता किया। 1. परिवारवादः बेटे निशांत को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी बीते 2 साल में नीतीश कुमार के भाषणों का एनालिसिस करेंगे तो पाएंगे कि उन्होंने हर सभा और रैली में एक लाइन जरूरी बोली है। वो लाइन है… ‘2005 से पहले बिहार में कुछ था जी, वो हटे तो पत्नी को CM बना दिया। उन्होंने सिर्फ अपने परिवार वालों के लिए किया।’ नीतीश कुमार इस बयान के जरिए लालू यादव की आलोचना करते हैं। क्योंकि लालू फैमिली के 5 सदस्य राजनीति में हैं। दूसरी तरफ 8 मार्च को नीतीश कुमार के इकलौते बेटे निशांत कुमार 45 साल की उम्र में आधिकारिक तौर पर JDU में शामिल हो गए हैं। चर्चा है कि नीतीश कुमार के दिल्ली जाने के बाद निशांत डिप्टी CM बन सकते हैं। निशांत कुमार पार्टी में तब आए हैं, जब पिता नीतीश कुमार बिहार की गद्दी छोड़कर राज्यसभा जा रहे हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री रहते नीतीश कुमार ने अपने परिवार को छोड़कर साथी नेताओं की पत्नी, बेटे-बेटी को आगे बढ़ाने से परहेज नहीं किया है। ग्राफिक में जानिए, कुछ प्रमुख नाम… 2. भ्रष्टाचारः 6 मंत्रियों से इस्तीफा लेने वाले नीतीश चौधरी पर चुप नीतीश कुमार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति का पालन करते रहे हैं। कभी सिर्फ आरोप लगने पर 6 मंत्रियों से इस्तीफा ले लिया था। लालू यादव से गठबंधन तोड़ लिया था। अशोक चौधरी पर दो साल में 200 करोड़ की जमीन खरीदने का आरोप अशोक चौधरी, नीतीश सरकार में ग्रामीण कार्य मंत्री हैं। सितंबर में प्रशांत किशोर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके आरोप लगाया कि चौधरी और उनके परिवार ने पिछले दो साल में करीब 200 करोड़ रुपए की जमीन खरीदी है। इसको लेकर प्रशांत किशोर ने 4 जमीन के सौदे की एक लिस्ट जारी की थी। प्रशांत किशोर के मुताबिक… गंभीर आरोप लगने पर चौधरी ने प्रशांत किशोर को 100 करोड़ रुपए के मानहानि का नोटिस भेजा था। 3. गठबंधन और सेकुलरिज्म पर बार-बार यू-टर्न नीतीश ने खुद को ‘सेकुलर’ और ‘साम्प्रदायिकता पर कोई समझौता नहीं’ करने वाला नेता बताया। लेकिन एक हकीकत यह है कि वह कुर्सी के लिए बार-बार गठबंधन बदलते रहे। BJP को साम्प्रदायिक बताकर गठबंधन तोड़ने वाले नीतीश फिर उसके साथ ही सरकार चला रहे हैं। वहीं, एक समय ऐसा भी आया जिस RJD के विरोध की राजनीति कर बिहार की सत्ता पर काबिज हुए, उसके साथ भी गठबंधन किया। सरकार चलाई। 4. फ्रीबीजः फ्री बिजली और महिलाओं को 10 हजार दिया नीतीश कुमार 20 साल से बिहार में काफी कलकुलेटिव तरीके से सरकारी योजनाएं लेकर आ रहे हैं। देश के एक मात्र मुख्यमंत्री थे, जिन्होंने फ्रीबीज का विरोध किया था। वे अक्सर कहते थे कि ऐसी योजनाएं पॉपुलिस्ट हैं, राज्य की अर्थव्यवस्था पर बोझ डालती हैं, और विकास को बाधित करती हैं। लेकिन विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने 2 लोकलुभावन योजना लाई। 1. 125 यूनिट बिजली फ्रीः 17 जुलाई 2025 को नीतीश कुमार ने घोषणा की कि 1 अगस्त 2025 से सभी घरेलू उपभोक्ताओं को हर महीने 125 यूनिट तक बिजली मुफ्त मिलेगी। इससे करीब 1.67 करोड़ घरेलू कनेक्शन वाले परिवार को फायदा हुआ। राज्य सरकार पर ₹3,797 करोड़ का बोझ बढ़ा। पुराना स्टैंडः फरवरी 2024 में बजट सत्र के दौरान विधानसभा में नीतीश कुमार ने कहा था- ‘मुफ्त बिजली देना बिल्कुल भी सही नहीं है।’ उन्होंने कहा था- ‘मैं शुरू से कहता आ रहा हूं कि मुफ्त नहीं दिया जाएगा। बहुत कम कीमत पर उपलब्ध कराया जा रहा है। कुछ राज्यों में मुफ्त देने की घोषणा करते हैं लेकिन हम ऐसा नहीं करेंगे।’ 2. महिलाओं को 10 हजारः 29 अगस्त 2025 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ‘महिला रोजगार योजना’ का ऐलान किया था। इसमें 18 से 60 साल की बिहार की महिलाओं को बिजनेस का एनालिसिस करने के बाद दो लाख रुपए दिए जाएंगे।’ फरवरी 2026 तक 1 करोड़ 56 लाख महिलाओं को 10-10 हजार रुपए दिए जा चुके हैं। पुराना स्टैंडः नीतीश कुमार पहले फ्री कैश ट्रांसफर या मुफ्त योजनाओं को “वोट बैंक पॉलिटिक्स” कहते थे। वे विकास पर फोकस (रोजगार, शिक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर) की बात करते थे, न कि डायरेक्ट कैश गिफ्ट्स देने की।


