बरेली। एचआईवी/एड्स पर अब पुलिस महकमा भी पूरी तरह एक्टिव मोड में आ गया है। महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन, लखनऊ के निर्देश पर बरेली परिक्षेत्र में एक बड़ा जागरूकता अभियान शुरू किया गया, जहां पुलिस अधिकारियों को न सिर्फ बीमारी से बचाव बल्कि समाज में फैली भ्रांतियों को खत्म करने का जिम्मा सौंपा गया।
रविवार को रिजर्व पुलिस लाइन बरेली के सभागार में पुलिस उपमहानिरीक्षक अजय कुमार साहनी के निर्देशन में एचआईवी/एड्स पर एक दिवसीय संवेदीकरण कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर और पीलीभीत समेत पूरे परिक्षेत्र से कुल 81 पुलिस अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए।
सिर्फ सुरक्षा नहीं, संवेदनशीलता भी जरूरी
कार्यशाला का मकसद साफ था कि पुलिस बल को सिर्फ शारीरिक रूप से सुरक्षित रखना ही नहीं, बल्कि उन्हें एक संवेदनशील लोक सेवक के रूप में तैयार करना। ताकि वे समाज में एड्स को लेकर फैली गलतफहमियों को दूर कर सकें और जागरूकता फैला सकें।
कार्यशाला में एचआईवी/एड्स से जुड़े सभी अहम पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी गई। इसमें संक्रमण से बचाव, समय पर जांच, सही उपचार और भेदभाव मुक्त वातावरण बनाने जैसे विषयों पर विशेष जोर दिया गया।

विशेषज्ञों ने खोली आंखें, दिए जरूरी सुझाव
कार्यक्रम में जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. इंतजार हुसैन, क्लस्टर प्रोग्राम मैनेजर हिना अयाज, सीएसओ प्रेमचंद्र शर्मा, डीएमडीओ आकाश चौधरी, एचआईवी काउंसलर जीशान, प्रोग्राम मैनेजर शालिनी सिंह सहित कई विशेषज्ञ मौजूद रहे। सभी ने पुलिसकर्मियों को व्यावहारिक जानकारी और जरूरी दिशा-निर्देश दिए। इस कार्यशाला के जरिए पुलिस महकमे ने साफ संकेत दे दिया है कि अब सिर्फ कानून-व्यवस्था ही नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता की जिम्मेदारी भी पुलिस निभाएगी। एड्स जैसे संवेदनशील मुद्दे पर पुलिस की सक्रिय भूमिका समाज में बड़ा बदलाव ला सकती है।


