Ladakh पर नरम पड़े Sonam Wangchuk? बोले- Central Govt से ‘Win-Win’ समाधान पर करेंगे बात

Ladakh पर नरम पड़े Sonam Wangchuk? बोले- Central Govt से ‘Win-Win’ समाधान पर करेंगे बात
लद्दाख के मशहूर जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 170 दिनों की हिरासत के बाद जेल से छूटने पर खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि अपने लोगों और पहाड़ों के बीच वापस आकर उन्हें बहुत अच्छा लग रहा है। वांगचुक को पिछले साल सितंबर में लेह में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लिया गया था। अब सरकार द्वारा आदेश वापस लेने के बाद उनकी रिहाई हुई है।
वांगचुक ने इस संघर्ष में साथ देने के लिए पूरे देश का धन्यवाद किया और उम्मीद जताई कि जिस उद्देश्य के लिए वे लड़ रहे हैं, उसके लिए जल्द ही एक ‘नई सुबह’ आएगी।
 

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लद्दाख की मांगों पर लचीला रुख

सोनम वांगचुक ने लद्दाख की राजनीतिक मांगों को लेकर केंद्र सरकार के साथ बातचीत में एक लचीला रुख अपनाने का संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि वे ‘लेन-देन’ के आधार पर समाधान निकालने के पक्ष में हैं। वांगचुक के अनुसार, बातचीत का उद्देश्य ऐसी स्थिति बनाना होना चाहिए जहां दोनों पक्षों का फायदा हो। हालांकि, लद्दाख के अन्य प्रमुख संगठनों ने साफ कर दिया है कि वे अपनी मुख्य मांगों पर कोई समझौता नहीं करेंगे, लेकिन वांगचुक का मानना है कि आपसी समझ और लचीलेपन से ही बातचीत सफल हो सकती है।

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छठी अनुसूची और लोकतंत्र की बहाली

वांगचुक ने स्पष्ट किया कि आने वाली बातचीत मुख्य रूप से दो बड़े मुद्दों पर टिकी होगी,लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करना और वहां लोकतंत्र की बहाली (पूर्ण राज्य का दर्जा या विधानसभा)। उन्होंने कहा कि अगर दोनों मांगों पर सहमति नहीं बनती, तो वे उम्मीद करते हैं कि कम से कम एक मुद्दे पर बात जरूर बनेगी। उनके मुताबिक, बातचीत ऐसी नहीं होनी चाहिए जहां किसी एक पक्ष को हार माननी पड़े, बल्कि यह ‘जीत-जीत’ वाली स्थिति होनी चाहिए जिसमें दोनों पक्ष एक-दूसरे की जरूरतों और चिंताओं का सम्मान करें।

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