नालों के पानी से उग रहीं सब्जियां

नालों के पानी से उग रहीं सब्जियां

राजधानी पटना और आसपास के इलाकों में उगाई जा रही हरी-भरी सब्जियां सेहत के लिए ‘साइलेंट किलर’ साबित हो रही हैं। दैनिक भास्कर की पड़ताल में खुलासा हुआ है कि दीघा, पहाड़ी, फतुहा और दानापुर जैसे क्षेत्रों में सब्जियों की सिंचाई सीधे सीवेज और औद्योगिक कचरे वाले नालों के पानी से की जा रही है। यह दूषित पानी न केवल मिट्टी को बर्बाद कर रहा है, बल्कि सब्जियों के जरिए मानव शरीर में कैंसर और बांझपन जैसी गंभीर बीमारियां घोल रहा है। वैज्ञानिक शोध: पटना और गया की सब्जियों में मिला सीसा और कैडमियम सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार के पर्यावरण विज्ञान विभाग का शोध चौंकाने वाला है। डॉ. एन.एल. देवी और आकृति अशेष के अध्ययन के अनुसार: पत्तागोभी, पालक और टमाटर में सीसा (Lead) और कैडमियम जैसे भारी तत्वों की मात्रा मानक से कई गुना अधिक है। ये धातुएं पौधों के ऊतकों (Tissues) के अंदर तक समा जाती हैं, जिन्हें धोने या उबालने से भी खत्म नहीं किया जा सकता। बचाव के तरीके सब्जियों को पकाने से पहले गुनगुने नमक के पानी या सिरके वाले पानी में कम से कम 15-20 मिनट के लिए छोड़ दें। ज्यादा चमकदार और बेमौसमी सब्जियों के बजाय स्थानीय और देसी किस्मों को प्राथमिकता दें। सलाद के रूप में उपयोग होने वाली सब्जियों को अच्छी तरह रगड़कर धोएं और छीलकर ही खाएं। सेहत पर ‘ट्रिपल अटैक’: किडनी और लिवर की बीमारी का खतरा प्रजनन क्षमता: माइक्रो-प्लास्टिक और भारी धातुएं हार्मोनल संतुलन बिगाड़कर बांझपन का कारण बन रही हैं। कैंसर का जोखिम: लंबे समय तक कैडमियम का सेवन शरीर की कोशिकाओं को कैंसर की ओर धकेलता है। अंगों की विफलता: भारी धातुओं का संचय लिवर और किडनी को स्थायी रूप से डैमेज कर देता है। “सीवेज के पानी से सिंचाई वाले क्षेत्रों में टाइफाइड, हेपेटाइटिस-ए और कृमि संक्रमण के मामले असामान्य रूप से ज्यादा हैं। सबसे बड़ा खतरा गाजर, मूली, टमाटर और धनिया पत्ती जैसी चीजों से है, जिन्हें हम सलाद या चटनी के रूप में बिना पकाए खाते हैं।” — प्रो. अजय कुमार (अध्यक्ष, मेडिसिन विभाग, एनएमसीएच) दुनिया भर के शोधों की चेतावनी द लैंसेट/WHO: सीसा और कैडमियम पुरुषों में स्पर्म काउंट को 40% तक कम कर सकते हैं। ICAR (2021): सीवेज का पानी सब्जियों को बड़ा और हरा तो बनाता है, पर उनमें निकेल और क्रोमियम जैसे कैंसरकारी तत्व भर देता है। NEERI (2022): जमीन के नीचे उगने वाली सब्जियां (आलू, मूली) भारी धातुओं को सबसे ज्यादा सोखती हैं, जो किडनी डैमेज का मुख्य कारण हैं। FSSAI (2024): बाजार के 25% नमूनों में कीटनाशक सुरक्षित सीमा से कहीं ज्यादा पाए गए। पटना का डेंजर जोन: नाले के पानी से सिंचाई और मूकदर्शक प्रशासन निगरानी का अभाव: कृषि विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास न तो सिंचाई के पानी की जांच का कोई तंत्र है और न ही मंडियों में कीटनाशकों (Pesticides) की जांच के लिए लैब। चमक का धोखा: जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी अजय कुमार के अनुसार, जो सब्जियां देखने में अधिक चमकदार और सुंदर लगती हैं, उनमें पेस्टीसाइड की मात्रा सबसे ज्यादा होने की आशंका रहती है। सप्लाई चेन: पटना के दीघा और पहाड़ी इलाकों से निकलने वाली सब्जियां सीधे अंटा घाट और मीठापुर मंडी पहुंचती हैं। राजधानी पटना और आसपास के इलाकों में उगाई जा रही हरी-भरी सब्जियां सेहत के लिए ‘साइलेंट किलर’ साबित हो रही हैं। दैनिक भास्कर की पड़ताल में खुलासा हुआ है कि दीघा, पहाड़ी, फतुहा और दानापुर जैसे क्षेत्रों में सब्जियों की सिंचाई सीधे सीवेज और औद्योगिक कचरे वाले नालों के पानी से की जा रही है। यह दूषित पानी न केवल मिट्टी को बर्बाद कर रहा है, बल्कि सब्जियों के जरिए मानव शरीर में कैंसर और बांझपन जैसी गंभीर बीमारियां घोल रहा है। वैज्ञानिक शोध: पटना और गया की सब्जियों में मिला सीसा और कैडमियम सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार के पर्यावरण विज्ञान विभाग का शोध चौंकाने वाला है। डॉ. एन.एल. देवी और आकृति अशेष के अध्ययन के अनुसार: पत्तागोभी, पालक और टमाटर में सीसा (Lead) और कैडमियम जैसे भारी तत्वों की मात्रा मानक से कई गुना अधिक है। ये धातुएं पौधों के ऊतकों (Tissues) के अंदर तक समा जाती हैं, जिन्हें धोने या उबालने से भी खत्म नहीं किया जा सकता। बचाव के तरीके सब्जियों को पकाने से पहले गुनगुने नमक के पानी या सिरके वाले पानी में कम से कम 15-20 मिनट के लिए छोड़ दें। ज्यादा चमकदार और बेमौसमी सब्जियों के बजाय स्थानीय और देसी किस्मों को प्राथमिकता दें। सलाद के रूप में उपयोग होने वाली सब्जियों को अच्छी तरह रगड़कर धोएं और छीलकर ही खाएं। सेहत पर ‘ट्रिपल अटैक’: किडनी और लिवर की बीमारी का खतरा प्रजनन क्षमता: माइक्रो-प्लास्टिक और भारी धातुएं हार्मोनल संतुलन बिगाड़कर बांझपन का कारण बन रही हैं। कैंसर का जोखिम: लंबे समय तक कैडमियम का सेवन शरीर की कोशिकाओं को कैंसर की ओर धकेलता है। अंगों की विफलता: भारी धातुओं का संचय लिवर और किडनी को स्थायी रूप से डैमेज कर देता है। “सीवेज के पानी से सिंचाई वाले क्षेत्रों में टाइफाइड, हेपेटाइटिस-ए और कृमि संक्रमण के मामले असामान्य रूप से ज्यादा हैं। सबसे बड़ा खतरा गाजर, मूली, टमाटर और धनिया पत्ती जैसी चीजों से है, जिन्हें हम सलाद या चटनी के रूप में बिना पकाए खाते हैं।” — प्रो. अजय कुमार (अध्यक्ष, मेडिसिन विभाग, एनएमसीएच) दुनिया भर के शोधों की चेतावनी द लैंसेट/WHO: सीसा और कैडमियम पुरुषों में स्पर्म काउंट को 40% तक कम कर सकते हैं। ICAR (2021): सीवेज का पानी सब्जियों को बड़ा और हरा तो बनाता है, पर उनमें निकेल और क्रोमियम जैसे कैंसरकारी तत्व भर देता है। NEERI (2022): जमीन के नीचे उगने वाली सब्जियां (आलू, मूली) भारी धातुओं को सबसे ज्यादा सोखती हैं, जो किडनी डैमेज का मुख्य कारण हैं। FSSAI (2024): बाजार के 25% नमूनों में कीटनाशक सुरक्षित सीमा से कहीं ज्यादा पाए गए। पटना का डेंजर जोन: नाले के पानी से सिंचाई और मूकदर्शक प्रशासन निगरानी का अभाव: कृषि विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास न तो सिंचाई के पानी की जांच का कोई तंत्र है और न ही मंडियों में कीटनाशकों (Pesticides) की जांच के लिए लैब। चमक का धोखा: जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी अजय कुमार के अनुसार, जो सब्जियां देखने में अधिक चमकदार और सुंदर लगती हैं, उनमें पेस्टीसाइड की मात्रा सबसे ज्यादा होने की आशंका रहती है। सप्लाई चेन: पटना के दीघा और पहाड़ी इलाकों से निकलने वाली सब्जियां सीधे अंटा घाट और मीठापुर मंडी पहुंचती हैं।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *