बिहार के गोपालगंज में जिला प्रशासन ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए बालू माफिया और एक अधिकारी के गठजोड़ पर एक बड़ा प्रहार किया है। जिस अधिकारी को अवैध खनन पर रोक लगाने की जिम्मेदारी थी, वही माफिया के साथ मिला हुआ निकला।
Bihar News: बिहार के गोपालगंज जिले में बालू माफिया और सरकारी तंत्र के बीच के गठबंधन का एक बड़ा खुलासा हुआ है। जिस अधिकारी पर खनन की निगरानी की जिम्मेदारी थी, वही बालू माफियाओं का संरक्षक निकला। डीएम पवन कुमार सिन्हा के कड़े तेवर के बाद माइनिंग इंस्पेक्टर (खनन निरीक्षक) सौरभ अभिषेक को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोप है कि यह अधिकारी अपनी वर्दी की आड़ में बालू सिंडिकेट के लिए काम कर रहा था और सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लगा रहा था।
बैठक में डीएम को हुआ शक
इस बड़ी कार्रवाई की नींव तब पड़ी जब डीएम पवन कुमार सिन्हा ने खनन टास्क फोर्स की समीक्षा बैठक बुलाई। बैठक के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि जिले के 12 बालू घाटों में से एक की भी नीलामी नहीं हुई थी। कायदे से नीलामी के बिना थोड़ा भी बालू भी घाट से बाहर नहीं निकलना चाहिए था, लेकिन गंडक नदी से अवैध खनन की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। इस विसंगति ने डीएम को सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर विभाग के भीतर कौन है जो माफियाओं का रास्ता साफ कर रहा है।
जांच टीम को 4 किमी तक टहलाया
सच्चाई जानने के लिए डीएम ने एक जांच टीम को औचक निरीक्षण के लिए भेजा। वहां तैनात खनन निरीक्षक सौरभ अभिषेक ने अधिकारियों को गुमराह करने की हरसंभव कोशिश की। डीएम ने बताया कि निरीक्षक ने टीम को करीब 4 किलोमीटर तक इधर-उधर घुमाया ताकि वह अवैध खनन के निशानों और मशीनों को छिपाने का वक्त पा सके। हालांकि, जब टीम अंततः गंडक नदी के तट पर पहुंची, तो वहां ताजी खुदाई और बालू की अवैध निकासी के स्पष्ट साक्ष्य मिले, जिससे निरीक्षक का झूठ और उसकी माफियाओं से मिलीभगत बेनकाब हो गई।
नीलामी प्रक्रिया को जानबूझकर बाधित करने का आरोप
जांच में यह भी सामने आया कि सौरभ अभिषेक जानबूझकर वरिष्ठ अधिकारियों को भ्रामक और गलत जानकारियां भेज रहा था। उसका मकसद घाटों की नीलामी प्रक्रिया को लटकाए रखना था। नीलामी न होने का सीधा फायदा बालू माफियाओं को मिल रहा था, जो बिना किसी सरकारी टैक्स या रॉयल्टी के करोड़ों का बालू खुले बाजार में बेच रहे थे। इस खेल में माइनिंग इंस्पेक्टर को मोटा हिस्सा मिलने की बात भी सामने आ रही है।
FIR और गिरफ्तारी
भ्रष्टाचार और माफियाओं को संरक्षण देने की पुष्टि होने के बाद जिला खनन विकास पदाधिकारी के बयान पर माइनिंग इंस्पेक्टर सौरभ अभिषेक के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी निरीक्षक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। डीएम पवन कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई महज एक शुरुआत है और व्यवस्था के भीतर बैठे किसी भी भ्रष्ट अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।
SDM के नेतृत्व में अब होगी जांच
इस बड़े खुलासे के बाद डीएम ने पूरे जिले के बालू घाटों की सघन जांच के आदेश दिए हैं। इसके लिए एसडीएम (SDM) के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल का गठन किया गया है। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद से गोपालगंज के बालू सिंडिकेट और भ्रष्ट कर्मियों में हड़कंप मचा हुआ है।


