-गेहूं-चना की खड़ी और कटी फसल बर्बाद, किसानों ने सर्वे कर मुआवजा देने की उठाई मांग।
बैतूल। जिले में मौसम के अचानक बदले मिजाज ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। गुरुवार देर रात हुई तेज बारिश, आंधी और ओलावृष्टि के कारण जिले के कई क्षेत्रों में गेहूं, चना और मक्का की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। खेतों में खड़ी फसल जहां तेज हवा से आड़ी हो गई, वहीं कटाई के बाद खेतों में रखी फसल भी भीगकर खराब हो गई है। इस प्राकृतिक आपदा से किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। बैतूल शहर सहित रानीपुर, भौंरा, आमला और चिचोली क्षेत्रों में आधे घंटे से लेकर ढाई घंटे तक तेज बारिश हुई। इसके चलते खेतों में तैयार खड़ी फसल गिर गई और कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति बन गई है। किसानों का कहना है कि इस बार पहले ही खेती की लागत बढ़ चुकी थी और अब फसल खराब होने से लागत निकालना भी मुश्किल हो जाएगा।
रानीपुर क्षेत्र में आधा सैकड़ा गांव प्रभावित
रानीपुर और घोड़ाडोंगरी ब्लॉक के करीब 50 से अधिक गांवों में बारिश और तेज हवाओं से व्यापक नुकसान हुआ है। जुवाड़ी के किसान नरेंद्र महतो और राजेश महतो ने बताया कि गेहूं की बालियां पककर भारी हो चुकी थीं, जो तेज हवा और बारिश का दबाव नहीं झेल सकीं और जमीन पर गिर गईं। इससे गेहूं के दाने काले पडऩे और गुणवत्ता खराब होने की आशंका बढ़ गई है। किसान विक्रांत महतो, विशाल महतो और लखन यादव ने बताया कि इस बार खाद, बीज और सिंचाई में काफी खर्च किया था। फसल अच्छी होने की उम्मीद थी, लेकिन बारिश ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। किसानों को अब कर्ज चुकाने की चिंता भी सताने लगी है।भारतीय किसान संघ के अशोक मलैया ने कहा कि असमय बारिश से किसानों की कमर टूट गई है। यदि गेहूं की गुणवत्ता खराब होती है तो समर्थन मूल्य पर खरीदी में भी परेशानी आ सकती है, जिससे किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ेगी।
भौंरा क्षेत्र में कटी फसल भी भीगी
भौंरा के मगरडोह गांव के किसान रामू मालवीय ने बताया कि अभी केवल 25 प्रतिशत फसल की ही कटाई हो पाई थी। बाकी फसल खेतों में खड़ी है और जो कट चुकी थी वह भी बारिश से भीग गई। ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी एसएल मर्सकोले ने बताया कि गेहूं और चना की फसल इस समय कटाई के लिए पूरी तरह तैयार है, ऐसे में बारिश से गुणवत्ता प्रभावित होना तय है।
आमला क्षेत्र में उत्पादन और गुणवत्ता पर असर
आमला क्षेत्र में भी तेज बारिश और हवा से गेहूं की खड़ी फसल गिर गई है। किसानों का कहना है कि इससे पैदावार कम होगी और कटाई में अतिरिक्त खर्च बढ़ेगा। किसान आनंद उघड़े, किसन उघड़े और रमेश सराटकर सहित अन्य किसानों ने बताया कि फसल खराब होने से उनकी आय पर सीधा असर पड़ेगा। किसानों ने यह भी कहा कि बीमा कंपनी से संपर्क करने में भी दिक्कत आ रही है। बारिश के कारण कई खेतों में पानी भर गया है, जिससे चना की फसल सडऩे की कगार पर पहुंच गई है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द धूप नहीं निकली तो फसल में फफूंद लगने का खतरा बढ़ जाएगा और नुकसान और अधिक हो सकता है।एसडीएम शैलेंद्र बडोनिया ने बताया कि कल रात्रि में अचानक बारिश हुई है जल्द ही राजस्व विभाग और कृषि विभाग की सयुक्त टीम बनाकर खेतो का सर्वे करवाया जाएगा।
बेमौसम बारिश से किसानों की बढ़ी चिंता
चिचोली। क्षेत्र में हुई बेमौसम बारिश और तेज बिजली गिरने की घटनाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। गुरुवार को हुई बारिश के साथ तेज आंधी और बिजली चमकने से किसानों के खेतों में खड़ी गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। बारिश के साथ आई तेज हवाओं के कारण कई स्थानों पर गेहूं की फसल जमीन पर गिर गई, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों पर असर पडऩे की आशंका है। वहीं, वन उपज जैसे महुआ तथा अन्य फसलों को भी नुकसान हुआ है। कृषक मन्नु परते, संतोष यादव, मनोज यादव एवं लड्डू उईके ने बताया कि चिचोली ब्लॉक के मांगारोडी, सिपलाई, खैरी बारंगबाड़ी, पाठाखेड़ा, मलाजपुर, निवारी सहित कई गांवों में भारी बारिश से फसलों को नुकसान हुआ है। वहीं चिचोली से सटे शाहपुर ब्लॉक के केसिया एवं कान्हेगांव क्षेत्र में भी अधिक बारिश तेज हवा के कारण गेहूं की फसल प्रभावित हुई है। किसानों ने शासन-प्रशासन से फसल नुकसान का शीघ्र सर्वे कर उचित मुआवजा देने की मांग।
भैंसेदही में चने के आकार के ओले गिरे
भैंसदेही में भी मौसम की मार किसानों पर पड़ी। तेज हवाओं और बारिश के साथ ओलावृष्टि भी हुई। चने के आकार के ओले गिरने से फसलों को भारी नुकसान पहुंचा। कुछ जगहों पर फसल आड़ी हो गई। चिचोलीढाना के कृषक संतोष जोशी ने बताया कि उनके खेत में गेहूं की फसल लगी थी, जो बारिश की वजह से पूरी तरह बर्बाद हो गई। पीडि़त किसानों ने मुआवजा दिए जाने की मांग की है।


