दिल्ली दौरे के बाद शिंदे का ‘ऑपरेशन टाइगर’, उद्धव के 9 सांसदों में सेंध लगाने की तैयारी

दिल्ली दौरे के बाद शिंदे का ‘ऑपरेशन टाइगर’, उद्धव के 9 सांसदों में सेंध लगाने की तैयारी

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा तेज हो गई है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के हालिया दिल्ली दौरे के बाद यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि उन्होंने उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) की शिवसेना (UBT) के 9 लोकसभा सांसदों को अपने पाले में करने के लिए ‘ऑपरेशन टाइगर’ (Operation Tiger) शुरू कर दिया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि शिंदे गुट अब संसद के निचले सदन में अपनी ताकत बढ़ाने और उद्धव ठाकरे की रही-सही राजनीतिक जमीन को और सिकोड़ने की तैयारी में है।

दिल्ली दौरे के बाद क्यों बढ़ी सियासी हलचल

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एकनाथ शिंदे ने अपने हालिया दो दिवसीय दिल्ली दौरे के दौरान पार्टी नेताओं और सांसदों के साथ कई अहम बैठकें कीं। बताया जा रहा है कि शिंदे गुट की नजर उद्धव ठाकरे गुट के सभी 9 लोकसभा सांसदों पर है और उन्हें अपने साथ जोड़ने की कोशिश जारी है।

खबरों के मुताबिक, शिंदे ने पार्टी नेताओं और शिवसेना (यूबीटी) के लोकसभा सांसदों से मुलाकात के दौरान इस बात पर चर्चा की कि किस तरह और कब ‘ऑपरेशन टाइगर’ को अमल में लाया जा सकता है।

शिंदे गुट ने क्या कहा?

हालांकि इन अटकलों को शिंदे गुट ने सिरे से खारिज किया है। शिवसेना के वरिष्ठ नेता व मंत्री उदय सामंत ने साफ कहा कि ऐसा कोई ‘ऑपरेशन टाइगर’ शुरू नहीं किया गया है। उनके अनुसार, शिंदे का दिल्ली दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात, पार्टी सांसदों के प्रदर्शन की समीक्षा और भाजपा के साथ बेहतर तालमेल बनाने के उद्देश्य से था।

उद्धव गुट बोला- हमारे सांसद वफादार हैं

वहीं, शिवसेना (UBT) के एक वरिष्ठ नेता ने इन चर्चाओं को महज अफवाह बताया है। उन्होंने कहा कि एकनाथ शिंदे पहले भी ऐसी कोशिशें कर चुके हैं लेकिन वे विफल रहे। उनका कहना है कि पार्टी के सभी लोकसभा सांसद पूरी तरह से उद्धव ठाकरे के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग पार्टी छोड़ना चाहते थे, वे पहले ही शिंदे खेमे में जा चुके हैं और अब पार्टी में केवल वफादार और प्रतिबद्ध नेता ही बचे हैं। ऐसे में अब उनके टूटने की संभावना नहीं है। सभी नौ सांसद इस मुश्किल समय में पार्टी प्रमुख (उद्धव ठाकरे) का साथ नहीं छोड़ेंगे।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से जुड़ा सियासी दांव?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह पूरा घटनाक्रम सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई से भी जुड़ा हो सकता है। शीर्ष कोर्ट में जल्द ही शिवसेना के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर बहस शुरू होने वाली है। ऐसे में शिंदे गुट यह दिखाना चाहता है कि उसके पास न केवल विधायकों का बहुमत है, बल्कि लोकसभा सांसदों का भी बड़ा समर्थन हासिल है। इससे कोर्ट में उनकी स्थिति मजबूत हो सकती है, जबकि उद्धव ठाकरे गुट पर दबाव बढ़ सकता है।

लगातार चुनावी झटकों के बीच उद्धव ठाकरे की राजनीतिक स्थिति पहले ही चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है। ऐसे में अगर ‘ऑपरेशन टाइगर’ जैसी कोई रणनीति सफल होती है, तो यह महाराष्ट्र की राजनीति में एक और बड़ा उलटफेर साबित हो सकता है।

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