प्रयागराज अलोप शंकरी मंदिर में उमड़ी भक्तों की भीड़:चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री स्वरूप का विशेष श्रृंगार

प्रयागराज अलोप शंकरी मंदिर में उमड़ी भक्तों की भीड़:चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री स्वरूप का विशेष श्रृंगार

प्रयागराज में चैत्र नवरात्रि के पहले दिन गुरुवार को देवी मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। संगम तट के पास स्थित 51 शक्तिपीठों में से एक मां अलोप शंकरी देवी मंदिर में विशेष आस्था देखने को मिली। इस दिन मां शैलपुत्री का पूजन किया गया और हिंदू नव संवत्सर 2083 का भी शुभारंभ हुआ। अलोप शंकरी मंदिर के कपाट ब्रह्ममुहूर्त में ही खोल दिए गए थे। सुबह 4 बजे से ही मंदिर परिसर ‘जय माता दी’ के जयकारों से गूंज उठा। अलोपीबाग स्थित मंदिर मार्ग पर श्रद्धालुओं की कई किलोमीटर लंबी कतारें देखी गईं। भक्त नारियल, चुनरी और प्रसाद लेकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे। अलोप शंकरी मंदिर की विशेषता यह है कि यहां देवी की कोई मूर्ति नहीं है। मान्यता है कि यहां सती के दाहिने हाथ का पंजा ‘अलोप’ हो गया था। इसके प्रतीक स्वरूप यहां एक ‘पालने’ की पूजा की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन इस पालने का फूलों, स्वर्ण आभूषणों और सुगंधित द्रव्यों से विशेष श्रृंगार किया गया। भक्तों ने पालने के नीचे स्थित कुंड में जल अर्पित कर सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। अलोप शंकरी मंदिर में दर्शन का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यहाँ भक्त मां के निराकार स्वरूप की आराधना करते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि नवरात्रि के नौ दिनों में यहाँ दर्शन मात्र से ही जीवन के सभी कष्ट ‘अलोप’ हो जाते हैं। भीड़ को देखते हुए पुलिस और जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। मंदिर परिसर के चारों ओर बैरिकेडिंग की गई है ताकि कतारें व्यवस्थित रहें। सादी वर्दी में पुलिसकर्मियों के साथ-साथ महिला पुलिस बल भी तैनात किया गया है। पूरे मंदिर क्षेत्र की निगरानी सीसीटीवी कैमरों के जरिए कंट्रोल रूम से की जा रही है। नगर निगम ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल और मोबाइल टॉयलेट की व्यवस्था भी की है।

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