कलश स्थापना के साथ आज से चैत्र नवरात्र शुरू:पालकी पर सवार होकर आ रहीं मां, आज से हिंदू नववर्ष की शुरुआत

कलश स्थापना के साथ आज से चैत्र नवरात्र शुरू:पालकी पर सवार होकर आ रहीं मां, आज से हिंदू नववर्ष की शुरुआत

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा में आज से चैत्र नवरात्र की शुरुआत हो रही है। आज उत्तरभाद्रपद नक्षत्र और शुक्ल योग का सुयोग बन रहा है। इसी के साथ आज से हिंदू नववर्ष भी शुरू हो रहा है। आचार्य राकेश झा ने पंचांगों के हवाले से बताया कि आज गुरुवार को प्रतिपदा तिथि का आरंभ सुबह 06:51 बजे से हो रहा है। इसी लिए नवरात्र की पूजा की विधिवत शुरुआत, संकल्प, पाठ और मंत्रजाप सुबह 06:51 बजे के बाद से पूरे दिन किया जाएगा। आज कलश स्थापना के साथ ही 9 दिनों तक चलने वाले इस त्योहार की शुरुआत हो जाएगी। माता पालकी पर सवार होकर आ रहीं हैं। कलश स्थापना से मिलेगी सुख-समृद्धि पंडित झा ने देवी पुराण के हवाले से कहा कि नवरात्र पूजा में कलश स्थापन का विशेष महत्व है। कलश में ब्रह्मा, विष्णु, रूद्र, नवग्रहों, सभी नदियों, सागरों-सरोवरों, सातों द्वीपों, षोडश मातृकाओं, चौसठ योगिनियों सहित सभी 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है। धर्मशास्त्र में अनुसार नवरात्र में कलश की पूजा करने से सुख- समृद्धि, धन, वैभव, ऐश्वर्य, शांति, पारिवारिक उन्नति तथा रोग-शोक का नाश होता है।
नवदुर्गा की आराधना से शक्ति की प्राप्ति ज्योतिषी झा के अनुसार चैत्र नवरात्र के नौ दिनों में देवी के अलग-अलग स्वरूपों में शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री की पूजा-उपासना करने से श्रद्धालु के जीवन का उद्धार, शक्ति की प्राप्ति, बुद्धि का विकाश, आनंद की अनुभूति और साधना मार्ग प्रशस्त होता है। नवरात्र का समय आत्मशुद्धि, साधना और देवी कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है।

कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त प्रतिपदा तिथि: सुबह 06:51 बजे से पूरे दिन। वृष लग्न मुहूर्त: सुबह 08:52 बजे से 10:49 बजे तक। गुली काल मुहूर्त: सुबह 09:06 बजे से 10:33 बजे तक। अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:38 बजे से 12:24 बजे तक। चर-लाभ-अमृत मुहूर्त: सुबह 10:33 बजे से दोपहर 02:57 बजे तक। सिंह लग्न मुहूर्त: दोपहर 03:21 बजे से 05:35 बजे तक।
नवरात्रि में इन देवियों की होगी पूजा 19 मार्च प्रतिपदा तिथि: शैलपुत्री 20 मार्च द्वितीया तिथि: ब्रह्मचारिणी 21 मार्च तृतीया तिथि: चंद्रघंटा 22 मार्च चतुर्थी तिथि: कूष्माण्डा 23 मार्च पंचमी तिथि: स्कंदमाता 24 मार्च षष्टी तिथि: कात्यायनी 25 मार्च सप्तमी तिथि: कालरात्रि 26 मार्च अष्टमी तिथि: महागौरी 27 मार्च नवमी तिथि: सिद्धिदात्री 28 मार्च दशमी तिथि: विजयादशमी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा में आज से चैत्र नवरात्र की शुरुआत हो रही है। आज उत्तरभाद्रपद नक्षत्र और शुक्ल योग का सुयोग बन रहा है। इसी के साथ आज से हिंदू नववर्ष भी शुरू हो रहा है। आचार्य राकेश झा ने पंचांगों के हवाले से बताया कि आज गुरुवार को प्रतिपदा तिथि का आरंभ सुबह 06:51 बजे से हो रहा है। इसी लिए नवरात्र की पूजा की विधिवत शुरुआत, संकल्प, पाठ और मंत्रजाप सुबह 06:51 बजे के बाद से पूरे दिन किया जाएगा। आज कलश स्थापना के साथ ही 9 दिनों तक चलने वाले इस त्योहार की शुरुआत हो जाएगी। माता पालकी पर सवार होकर आ रहीं हैं। कलश स्थापना से मिलेगी सुख-समृद्धि पंडित झा ने देवी पुराण के हवाले से कहा कि नवरात्र पूजा में कलश स्थापन का विशेष महत्व है। कलश में ब्रह्मा, विष्णु, रूद्र, नवग्रहों, सभी नदियों, सागरों-सरोवरों, सातों द्वीपों, षोडश मातृकाओं, चौसठ योगिनियों सहित सभी 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है। धर्मशास्त्र में अनुसार नवरात्र में कलश की पूजा करने से सुख- समृद्धि, धन, वैभव, ऐश्वर्य, शांति, पारिवारिक उन्नति तथा रोग-शोक का नाश होता है।
नवदुर्गा की आराधना से शक्ति की प्राप्ति ज्योतिषी झा के अनुसार चैत्र नवरात्र के नौ दिनों में देवी के अलग-अलग स्वरूपों में शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री की पूजा-उपासना करने से श्रद्धालु के जीवन का उद्धार, शक्ति की प्राप्ति, बुद्धि का विकाश, आनंद की अनुभूति और साधना मार्ग प्रशस्त होता है। नवरात्र का समय आत्मशुद्धि, साधना और देवी कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है।

कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त प्रतिपदा तिथि: सुबह 06:51 बजे से पूरे दिन। वृष लग्न मुहूर्त: सुबह 08:52 बजे से 10:49 बजे तक। गुली काल मुहूर्त: सुबह 09:06 बजे से 10:33 बजे तक। अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:38 बजे से 12:24 बजे तक। चर-लाभ-अमृत मुहूर्त: सुबह 10:33 बजे से दोपहर 02:57 बजे तक। सिंह लग्न मुहूर्त: दोपहर 03:21 बजे से 05:35 बजे तक।
नवरात्रि में इन देवियों की होगी पूजा 19 मार्च प्रतिपदा तिथि: शैलपुत्री 20 मार्च द्वितीया तिथि: ब्रह्मचारिणी 21 मार्च तृतीया तिथि: चंद्रघंटा 22 मार्च चतुर्थी तिथि: कूष्माण्डा 23 मार्च पंचमी तिथि: स्कंदमाता 24 मार्च षष्टी तिथि: कात्यायनी 25 मार्च सप्तमी तिथि: कालरात्रि 26 मार्च अष्टमी तिथि: महागौरी 27 मार्च नवमी तिथि: सिद्धिदात्री 28 मार्च दशमी तिथि: विजयादशमी  

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