लखनऊ में बुधवार को भारतीय नववर्ष के स्वागत में एक सांस्कृतिक महाकुंभ का आयोजन किया गया।यह आयोजन निराला नगर स्थित सरस्वती कुंज में ‘भारतीय नववर्ष महोत्सव समिति’ की ओर से आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में परंपरा, आस्था और सांस्कृतिक गौरव का अद्भुत संगम देखने को मिला। इसका उद्देश्य लोगों को भारतीय संस्कृति से जोड़ना और विक्रम संवत 2083 के प्रति जागरूकता फैलाना था। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने भारतीय नववर्ष के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह केवल तिथि परिवर्तन नहीं, बल्कि हमारी ऋषि परंपरा और प्रकृति के चक्र का उत्सव है। पाठक ने लोगों से अपनी सांस्कृतिक विरासत को जीवन में अपनाने और आने वाली पीढ़ी तक इसे पहुंचाने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि आज दुनिया भारतीय मूल्यों की ओर देख रही है, ऐसे में हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहना होगा। भारतीय नववर्ष खगोलीय गणनाओं पर आधारित मुख्य वक्ता डॉ. नीरज सिंह ने भारतीय कालगणना के वैज्ञानिक और आध्यात्मिक पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारतीय नववर्ष खगोलीय गणनाओं पर आधारित है और इसका प्रकृति से गहरा संबंध है। डॉ. सिंह ने युवाओं को अपनी संस्कृति पर गर्व करने और उसे आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ‘मां गायत्री दीपयज्ञ’ रहा, जिसमें हजारों दीपों की रोशनी से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। ध्वज फहराकर नववर्ष का स्वागत करने का आग्रह समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि यह अभियान नई पीढ़ी को सनातन परंपराओं से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने लोगों से चैत्र नवरात्रि की प्रतिपदा पर अपने घरों में दीप जलाने और भगवा ध्वज फहराकर नववर्ष का स्वागत करने का आग्रह किया।कार्यक्रम के अंत में संयोजक अभिषेक खरे ने सभी अतिथियों और उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य हर घर में दीपावली जैसा उत्साह पैदा करना है, ताकि भारतीय संस्कृति की जड़ें और अधिक मजबूत हो सकें।


