1. RJD ने ऐसे वर्ग के व्यक्ति को उम्मीदवार बनाया, जिसका जनाधार महागठबंधन के खिलाफ है। RJD ने उम्मीदवार गलत चुना तो मैंने वोट नहीं देना ही बेहतर समझा। 2. महागठबंधन ने दलित, अल्पसंख्यक या OBC वर्ग से उम्मीदवार नहीं बनाया। इन वर्गों की अनदेखी कर अन्य कोटे से प्रत्याशी उतारा गया, जिसके विरोध में मैंने मतदान का बहिष्कार किया। 3. AD सिंह के अलावा दूसरा कैंडिडेट होता तो जरूर वोट देते। पार्टी की कार्रवाई के लिए तैयार हूं। ऊपर के तीनों बयान कांग्रेस के 3 अलग-अलग विधायकों के हैं, जिन्होंने राज्यसभा चुनाव में RJD कैंडिडेट अमरेंद्र धारी सिंह (एडी सिंह) को वोट नहीं किया। इनके वोटिंग से गैर हाजिर होने के कारण भाजपा के 5वें प्रत्याशी शिवेश राम की जीत हुई। दरअसल, एडी सिंह भूमिहार समाज से आते हैं। क्या भाजपा ने जीत के लिए चुपके से भूमिहार विरोध को हवा दी। पाला बदलने वाले विधायक क्या जाति का एंगल देकर खुद का बचाव कर रहे हैं। क्या कांग्रेस उन पर ओडिशा की तरह कार्रवाई करेगी। इन सवालों का जवाब आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में…। सवाल-1ः राज्यसभा चुनाव में क्या हुआ? कौन जीता? पूरा मामला क्या है? जवाबः 16 मार्च को बिहार की राज्यसभा की 5 सीटों के लिए वोटिंग हुई। सभी पांचों सीटों पर NDA के कैंडिडेट मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर, RLM अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा और शिवेश राम की जीत हुई। सवाल-2ः वोटिंग से गैर हाजिर रहने वाले महागठबंधन के चारों विधायकों ने क्या तर्क दिया है? जवाबः वोटिंग के टाइम तक फोन स्वीच ऑफ कर गायब रहने वाले विधायक अगले दिन 17 मार्च को सामने आए। उन्होंने वोटिंग से गायब रहने के अपने-अपने कारण बताएं। सिलसिलेवार तरीके से जानिए… सवाल-3ः वोटिंग से गायब रहने वाले विधायक क्या सच में जाति देखकर ही भागे? जवाबः RJD विधायक ने पारिवारिक मजबूरी कारण बताया है, लेकिन कांग्रेस के तीनों विधायकों ने जाति को मुख्य आधार बताया है। ऐसे में उनके ऑफिशियल बयान को ही वोटिंग से गैर हाजिर होने का कारण माना जाएगा। लेकिन सिर्फ यही एक कारण है, ऐसा नहीं है। सबकी अपनी-अपनी कहानी है। विधायक अपने पाला बदलने की घटना को जाति का एंगल देकर अपने समाज के अंदर नेता बनाने की कोशिश कर रहे हैं। सिलसिलेवार तरीके से जानिए, विधायकों की अन्य मजबूरियां… सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहाः आगे जीतेंगे गारंटी नहीं, ठेका-कारोबार बचाना जरूरी कारोबार के दम पर राजनीति में आए सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा, उपेंद्र कुशवाहा के करीबी माने जाते हैं। 59 वर्षीय सुरेंद्र 2015 में कुशवाहा की पार्टी RLSP के टिकट पर NDA की तरफ चुनाव लड़ चुके हैं। तब उनको राजपूत समाज से आने वाले निर्दलीय धीरेन्द्र प्रताप सिंह उर्फ रिंकू सिंह ने हरा दिया था। मनोहर प्रसाद सिंहः पहली बार लॉयटी दिखाने का मौका मिला तो नहीं चूके पुलिस सेवा से रिटायर 76 वर्षीय मनोहर प्रसाद सिंह अनुसूचित जनजाति समाज से आते हैं। मनिहारी से लगातार 4 बार के विधायक हैं। मनोज विश्वासः आगे की राजनीति के लिए NDA में जाना चाहते हैं 38 साल के मनोज विश्वास फारबिसगंज से पहली बार विधायक बने हैं। चुनाव से कुछ दिन पहले ही RJD से कांग्रेस में आए। केवट मतलब EBC समाज से आते हैं। फैसल रहमानः विधायकी बचाना और केस से बचना ज्यादा जरूरी RJD के टिकट पर पूर्वी चंपारण के ढाका से पहली बार विधायक बने 40 साल के फैसल रहमान की विधायकी खतरे में हैं। सवाल-4: कांग्रेस क्या अपने विधायकों पर ओडिशा-हरियाणा की तरह कार्रवाई करेगी? जवाबः बिहार ही नहीं, ओडिशा और हरियाणा में भी राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के विधायकों ने खेला किया है। ओडिशा में पार्टी ने कार्रवाई कर दी है। वहीं, हरियाणा में कार्रवाई करने की तैयारी है। ओडिशा में कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग करने वाले 3 विधायकों रमेश जेना, दशरथी गोमांगो और सोफिया फिरदौस को पार्टी से निकाल दिया है। साथ ही तीनों को विधानसभा से अयोग्य घोषित करने के लिए स्पीकर को लेटर भी लिखा है। हरियाणा में कांग्रेस 5 विधायकों को नोटिस देने की तैयारी कर रही है। इस बीच हरियाणा कांग्रेस के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष रामकिशन गुर्जर ने पार्टी छोड़ दी है। ओडिशा-हरियाणा की तर्ज पर बिहार में भी विधायकों पर कार्रवाई हो सकती है। हालांकि, यह कार्रवाई कब होगी, यह तय नहीं है। बिहार कांग्रेस क्यों विधायकों पर कार्रवाई कर सकती है… 1. गठबंधन धर्म और अनुशासन पर उठेगा सवाल 2. पार्टी की सवर्ण राजनीति को लग सकता है धक्का सवाल-5: भाजपा ने क्या चुनाव जीतने के लिए विपक्षी खेमे में भूमिहार विरोध को हवा दी? जवाबः सीधे तौर पर कहना मुश्किल है। लेकिन मौटे तौर पर बिना समाज का नाम लिए कांग्रेस के तीनों विधायकों ने भूमिहार कैंडिडेट को वोट नहीं देने की बातें कही है। हालांकि, यह अभी सिर्फ कयासबाजी है। भाजपा के अगले कदम से एक्जेक्ट पता चलेगा कि भूमिहार विरोध के पीछे उसकी रणनीति है या नहीं। इसे ऐसे समझिए… मतलब कांग्रेस की अगली कार्रवाई और विधानसभा अध्यक्ष का फैसला इस पर तय करेगा कि किसी पार्टी ने भूमिहार विरोध को हवा दी है। 1. RJD ने ऐसे वर्ग के व्यक्ति को उम्मीदवार बनाया, जिसका जनाधार महागठबंधन के खिलाफ है। RJD ने उम्मीदवार गलत चुना तो मैंने वोट नहीं देना ही बेहतर समझा। 2. महागठबंधन ने दलित, अल्पसंख्यक या OBC वर्ग से उम्मीदवार नहीं बनाया। इन वर्गों की अनदेखी कर अन्य कोटे से प्रत्याशी उतारा गया, जिसके विरोध में मैंने मतदान का बहिष्कार किया। 3. AD सिंह के अलावा दूसरा कैंडिडेट होता तो जरूर वोट देते। पार्टी की कार्रवाई के लिए तैयार हूं। ऊपर के तीनों बयान कांग्रेस के 3 अलग-अलग विधायकों के हैं, जिन्होंने राज्यसभा चुनाव में RJD कैंडिडेट अमरेंद्र धारी सिंह (एडी सिंह) को वोट नहीं किया। इनके वोटिंग से गैर हाजिर होने के कारण भाजपा के 5वें प्रत्याशी शिवेश राम की जीत हुई। दरअसल, एडी सिंह भूमिहार समाज से आते हैं। क्या भाजपा ने जीत के लिए चुपके से भूमिहार विरोध को हवा दी। पाला बदलने वाले विधायक क्या जाति का एंगल देकर खुद का बचाव कर रहे हैं। क्या कांग्रेस उन पर ओडिशा की तरह कार्रवाई करेगी। इन सवालों का जवाब आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में…। सवाल-1ः राज्यसभा चुनाव में क्या हुआ? कौन जीता? पूरा मामला क्या है? जवाबः 16 मार्च को बिहार की राज्यसभा की 5 सीटों के लिए वोटिंग हुई। सभी पांचों सीटों पर NDA के कैंडिडेट मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर, RLM अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा और शिवेश राम की जीत हुई। सवाल-2ः वोटिंग से गैर हाजिर रहने वाले महागठबंधन के चारों विधायकों ने क्या तर्क दिया है? जवाबः वोटिंग के टाइम तक फोन स्वीच ऑफ कर गायब रहने वाले विधायक अगले दिन 17 मार्च को सामने आए। उन्होंने वोटिंग से गायब रहने के अपने-अपने कारण बताएं। सिलसिलेवार तरीके से जानिए… सवाल-3ः वोटिंग से गायब रहने वाले विधायक क्या सच में जाति देखकर ही भागे? जवाबः RJD विधायक ने पारिवारिक मजबूरी कारण बताया है, लेकिन कांग्रेस के तीनों विधायकों ने जाति को मुख्य आधार बताया है। ऐसे में उनके ऑफिशियल बयान को ही वोटिंग से गैर हाजिर होने का कारण माना जाएगा। लेकिन सिर्फ यही एक कारण है, ऐसा नहीं है। सबकी अपनी-अपनी कहानी है। विधायक अपने पाला बदलने की घटना को जाति का एंगल देकर अपने समाज के अंदर नेता बनाने की कोशिश कर रहे हैं। सिलसिलेवार तरीके से जानिए, विधायकों की अन्य मजबूरियां… सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहाः आगे जीतेंगे गारंटी नहीं, ठेका-कारोबार बचाना जरूरी कारोबार के दम पर राजनीति में आए सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा, उपेंद्र कुशवाहा के करीबी माने जाते हैं। 59 वर्षीय सुरेंद्र 2015 में कुशवाहा की पार्टी RLSP के टिकट पर NDA की तरफ चुनाव लड़ चुके हैं। तब उनको राजपूत समाज से आने वाले निर्दलीय धीरेन्द्र प्रताप सिंह उर्फ रिंकू सिंह ने हरा दिया था। मनोहर प्रसाद सिंहः पहली बार लॉयटी दिखाने का मौका मिला तो नहीं चूके पुलिस सेवा से रिटायर 76 वर्षीय मनोहर प्रसाद सिंह अनुसूचित जनजाति समाज से आते हैं। मनिहारी से लगातार 4 बार के विधायक हैं। मनोज विश्वासः आगे की राजनीति के लिए NDA में जाना चाहते हैं 38 साल के मनोज विश्वास फारबिसगंज से पहली बार विधायक बने हैं। चुनाव से कुछ दिन पहले ही RJD से कांग्रेस में आए। केवट मतलब EBC समाज से आते हैं। फैसल रहमानः विधायकी बचाना और केस से बचना ज्यादा जरूरी RJD के टिकट पर पूर्वी चंपारण के ढाका से पहली बार विधायक बने 40 साल के फैसल रहमान की विधायकी खतरे में हैं। सवाल-4: कांग्रेस क्या अपने विधायकों पर ओडिशा-हरियाणा की तरह कार्रवाई करेगी? जवाबः बिहार ही नहीं, ओडिशा और हरियाणा में भी राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के विधायकों ने खेला किया है। ओडिशा में पार्टी ने कार्रवाई कर दी है। वहीं, हरियाणा में कार्रवाई करने की तैयारी है। ओडिशा में कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग करने वाले 3 विधायकों रमेश जेना, दशरथी गोमांगो और सोफिया फिरदौस को पार्टी से निकाल दिया है। साथ ही तीनों को विधानसभा से अयोग्य घोषित करने के लिए स्पीकर को लेटर भी लिखा है। हरियाणा में कांग्रेस 5 विधायकों को नोटिस देने की तैयारी कर रही है। इस बीच हरियाणा कांग्रेस के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष रामकिशन गुर्जर ने पार्टी छोड़ दी है। ओडिशा-हरियाणा की तर्ज पर बिहार में भी विधायकों पर कार्रवाई हो सकती है। हालांकि, यह कार्रवाई कब होगी, यह तय नहीं है। बिहार कांग्रेस क्यों विधायकों पर कार्रवाई कर सकती है… 1. गठबंधन धर्म और अनुशासन पर उठेगा सवाल 2. पार्टी की सवर्ण राजनीति को लग सकता है धक्का सवाल-5: भाजपा ने क्या चुनाव जीतने के लिए विपक्षी खेमे में भूमिहार विरोध को हवा दी? जवाबः सीधे तौर पर कहना मुश्किल है। लेकिन मौटे तौर पर बिना समाज का नाम लिए कांग्रेस के तीनों विधायकों ने भूमिहार कैंडिडेट को वोट नहीं देने की बातें कही है। हालांकि, यह अभी सिर्फ कयासबाजी है। भाजपा के अगले कदम से एक्जेक्ट पता चलेगा कि भूमिहार विरोध के पीछे उसकी रणनीति है या नहीं। इसे ऐसे समझिए… मतलब कांग्रेस की अगली कार्रवाई और विधानसभा अध्यक्ष का फैसला इस पर तय करेगा कि किसी पार्टी ने भूमिहार विरोध को हवा दी है।


