मगध प्रमंडल आयुक्त डॉ. सफीना ए. एन. की अध्यक्षता में आज गया में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें विभागीय जांच से संबंधित अनुशासनिक मामलों के निष्पादन पर जोर दिया गया। बैठक का मुख्य उद्देश्य लंबित मामलों को तेजी से निपटाना और प्रशासनिक प्रक्रिया को प्रभावी व पारदर्शी बनाना था। बैठक में नोडल पदाधिकारी सह अपर समाहर्ता (विभागीय जांच) सहित अलग-अलग जिलों के अधिकारी उपस्थित रहे। मगध प्रमंडल के गया, औरंगाबाद, जहानाबाद, अरवल और नवादा जिलों में लंबित विभागीय जांच मामलों की विस्तृत समीक्षा की गई। समयबद्ध तरीके से निष्पादन सुनिश्चित करने का आदेश संबंधित अधिकारियों ने अपने-अपने जिलों में चल रहे मामलों की अद्यतन स्थिति प्रस्तुत की। आयुक्त ने इस पर गंभीरता से विचार करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि सभी लंबित मामलों का समयबद्ध तरीके से निष्पादन सुनिश्चित किया जाए और अनुशासनिक कार्रवाई में अनावश्यक देरी न हो। डॉ. सफीना ए. एन. ने कहा कि विभागीय जांच की प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष और प्रभावी बनाना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को नियमित रूप से मामलों की समीक्षा करने और प्रगति की निगरानी सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया। बैठक में विभागीय जांच से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय करने और प्रत्येक स्तर पर जिम्मेदारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। आयुक्त ने बताया कि समय पर कार्रवाई न होने से प्रशासनिक कार्यप्रणाली प्रभावित होती है, इसलिए सभी अधिकारी अपने दायित्वों का निर्वहन गंभीरता और तत्परता से करें। इस अवसर पर आयुक्त के सचिव सुशील कुमार, उप सचिव दुर्गेश कुमार, मुख्य जांच आयुक्त निदेशालय, पटना के प्रतिनिधि, संयुक्त आयुक्त (विभागीय जांच) और प्रमंडल के सभी जिलों के अपर समाहर्ता सह विभागीय जांच अधिकारी उपस्थित थे। बैठक के अंत में, आयुक्त ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे विभागीय जांच से जुड़े मामलों की नियमित निगरानी करते हुए तुरंत और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करें। इसका उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को और मजबूत करना है। मगध प्रमंडल आयुक्त डॉ. सफीना ए. एन. की अध्यक्षता में आज गया में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें विभागीय जांच से संबंधित अनुशासनिक मामलों के निष्पादन पर जोर दिया गया। बैठक का मुख्य उद्देश्य लंबित मामलों को तेजी से निपटाना और प्रशासनिक प्रक्रिया को प्रभावी व पारदर्शी बनाना था। बैठक में नोडल पदाधिकारी सह अपर समाहर्ता (विभागीय जांच) सहित अलग-अलग जिलों के अधिकारी उपस्थित रहे। मगध प्रमंडल के गया, औरंगाबाद, जहानाबाद, अरवल और नवादा जिलों में लंबित विभागीय जांच मामलों की विस्तृत समीक्षा की गई। समयबद्ध तरीके से निष्पादन सुनिश्चित करने का आदेश संबंधित अधिकारियों ने अपने-अपने जिलों में चल रहे मामलों की अद्यतन स्थिति प्रस्तुत की। आयुक्त ने इस पर गंभीरता से विचार करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि सभी लंबित मामलों का समयबद्ध तरीके से निष्पादन सुनिश्चित किया जाए और अनुशासनिक कार्रवाई में अनावश्यक देरी न हो। डॉ. सफीना ए. एन. ने कहा कि विभागीय जांच की प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष और प्रभावी बनाना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को नियमित रूप से मामलों की समीक्षा करने और प्रगति की निगरानी सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया। बैठक में विभागीय जांच से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय करने और प्रत्येक स्तर पर जिम्मेदारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। आयुक्त ने बताया कि समय पर कार्रवाई न होने से प्रशासनिक कार्यप्रणाली प्रभावित होती है, इसलिए सभी अधिकारी अपने दायित्वों का निर्वहन गंभीरता और तत्परता से करें। इस अवसर पर आयुक्त के सचिव सुशील कुमार, उप सचिव दुर्गेश कुमार, मुख्य जांच आयुक्त निदेशालय, पटना के प्रतिनिधि, संयुक्त आयुक्त (विभागीय जांच) और प्रमंडल के सभी जिलों के अपर समाहर्ता सह विभागीय जांच अधिकारी उपस्थित थे। बैठक के अंत में, आयुक्त ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे विभागीय जांच से जुड़े मामलों की नियमित निगरानी करते हुए तुरंत और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करें। इसका उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को और मजबूत करना है।


