भाजपा महानगर टीम में सांसद-विधायकों के करीबियों की खुली लॉटरी:सक्रिय कार्यकर्ता किनारे, अनदेखी से नाराज एक वरिष्ठ नेता ने सदस्य से पद इस्तीफा दिया

भाजपा महानगर टीम में सांसद-विधायकों के करीबियों की खुली लॉटरी:सक्रिय कार्यकर्ता किनारे, अनदेखी से नाराज एक वरिष्ठ नेता ने सदस्य से पद इस्तीफा दिया

भाजपा महानगर की नवगठित टीम में अधिकतर नाम जनप्रतिनिधियों के चहेतों के हैं। इसमें कई पुराने नामों और दिग्गजों को दरकिनार कर नये चेहरों को समिति में जगह दी गई है।
लखनऊ से आई सिफारिशों के साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों के चहेतों पर कार्य समिति को न्योछावर कर दिया गया है। इससे संगठन में असंतोष उभरने लगा है। ऐसे ही एक वरिष्ठ नेता ने उपेक्षा का आरोप लगाते हुए सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पत्र जारी कर भाजपा के ‘सबका साथ-सबका विकास’ पर सवाल खड़े करते हुए जनप्रतिनिधियों पर अपने गुर्गे सेट करने और अपनों को रेवड़ी बांटने का आरोप लगाया है।
अब विस्तार से पढ़िये…
विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी भाजपा जिलाध्यक्षऔर महानगर अध्यक्ष की घोषणा के एक साल बाद कार्यसमिति कागठन कर पाई। सोमवार को जारी सूची में अधिकतर नाम जनप्रतिनिधियों के चहेतों के दिखे। इसमें कई पुराने नामों और दिग्गजों को दरकिनार कर नये चेहरे को समिति में स्थान दे दिया है। इस पर नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल खड़े होने लगे हैं। पहले जानिये कार्यकारिणी में किसको क्या पद मिला…
महानगर उपाध्यक्ष: दीपू जादौन, नवीन गौतम, राहुल सागर, मनमोहन कुशवाह, निधि शर्मा, अनीता खरे, राजू परमार, मनवीर चौहान।
महानगर महामंत्री: हेमंत भोजवानी, महेश शर्मा, नितेश शिवहरे।
महानगर मंत्री: करुणानिधि, अनिल सारस्वत, विकास भारद्वाज, नेहा गुप्ता, अंजू गर्ग, मुकेश गुप्ता, माधुरी माहौर, अंकित शर्मा।
कोषाध्यक्ष: अतुल गर्ग। कार्यकारिणी की स्थिति
कुल सदस्य: 60
पदाधिकारी: 20 (अध्यक्ष के अलावा)
कार्यकारिणी सदस्य: 40
महिला भागीदारी: कुल 20 पदाधिकारियों में से केवल 5 महिलाओं को स्थान (2 उपाध्यक्ष, 3 मंत्री) कौन-कौन करीबी कार्यकारिणी में जगह पाने में सफल रहा
महानगर कार्यकारिणी में मंत्री से उपाध्यक्ष पद पर प्रमोट हुए नवीन गौतम सांसद व केंद्रीय राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल के करीबी हैं। महानगर कार्यकारिणी में महामंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद पर आए नितेश शिवहरे एमएलसी विजय शिवहरे के भांजे हैं। नितेश शिवहरे इससे पहले महानगर की कार्यकारिणी में किसी पद पर नहीं रहे। उनकी सीधी एंट्री महामंत्री पद पर हुई है। महामंत्री बने महेश शर्मा आगरा कैंट से विधायक डा. जीएस धर्मेश के करीबी हैं। उपाध्यक्ष बने मनवीर चौहान को एत्मादपुर के विधायक डा. धर्मपाल सिंह का करीबी बताया जाता है। उपाध्यक्ष पद पर जगह बनाने में कामयाब रहे दीपू जादौन की पहुंच सीधे लखनऊ कार्यालय तक है। बताया जा रहा है कि प्रदेश महामंत्री संगठन के सहयोगी के करीबी हैं दीपू जादौन। वहीं, मंत्री पर कार्यकारिणी में जगह पाने वाले अनिल सारस्वत और नेहा गुप्ता को राज्यसभा सदस्य नवीन जैन का करीबी बताया जा रहा है। महामंत्री पद पर एक भी महिला नहीं उपाध्यक्ष पद पर 7 कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिनमें 2 महिला चेहरे निधि शर्मा और अनीता खरे शामिल हैं। हालांकि, संगठन के सबसे रसूखदार महामंत्री पद पर किसी भी महिला को स्थान नहीं मिला है। 8 मंत्रियों की सूची में करुणानिधि, अनिल सारस्वत और विकास भारद्वाज जैसे नाम शामिल हैं, जिनमें 3 महिलाओं को स्थान देकर आधी आबादी को साधने का प्रयास किया गया है। अतुल गर्ग को कोषाध्यक्ष जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है। एक साल से साथ चल रहे पदाधिकारियों को झटका पार्टी ने इस सूची के जरिए शहर की चारों विधानसभाओं में जातीय समीकरणों को साधने का पूरा प्रयास किया है, लेकिन इस बार संगठन की कमान नए चेहरों के हाथ में दी गई है। परिणाम स्वरूप संगठन के वे पुराने चेहरे जो पिछले एक साल से अध्यक्ष के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे थे. उन्हें इस फेरबदल में तगड़ा झटका लगा है। पार्टी सूत्रों की मानें तो इस कार्यकारिणी के गठन में संगठन से ज्यादा स्थानीय जनप्रतिनिधियों की पसंद को तरजीह मिली है। यही कारण है कि समर्पित कार्यकर्ताओं के बीच उपेक्षा का स्वर गूंजने लगा है। इस नई घोषणा के बाद भाजपा के भीतर अंतर्कलह की सुगबुगाहट तेज हो गई है। सबसे ज्यादा नाराजगी उन पदाधिकारियों में है जो पिछले एक साल से महानगर अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता के हर कार्यक्रम और आंदोलन में सक्रिय रहे। उनका मानना है कि संगठन की मजबूती के लिए जमीन पर काम करने वालों की जगह उन लोगों को पद बांटे गए हैं जो केवल चुनाव के समय या बड़े नेताओं के दरबार में सक्रिय दिखते हैं। पार्टी में उभरने लगा विरोध
वहीं, पार्टी के वरिष्ठ नेता व पूर्व पार्षद व उपनेता पार्षद दल रहे मोहन सिंह लोधी ने कार्यकारिणी में सिर्फ सदस्य बनाए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने इस पद से इस्तीफा भी दे दिया है।
उन्होंने पत्र जारी कर कहा है-आपने मुझे महानगर कार्यकारिणी में सदस्य बनाया है, आपका धन्यवाद। 30 साल लगातार पार्टी की सेवा करने पर भारी-भरकम पद देकर समाज को अपमान करने का काम किया है। पार्टी में वार्ड उपाध्यक्ष, युवा मोर्चा, मंडी प्रभारी, मंडल महामंत्री, मंडल अध्यक्ष, दो बार पार्षद, नगर निगम सदन में सचेतक, मुख्य सचेतक एवं उपनेता पार्षद दल रह चुका हूं।
पार्टी सत्ता में नहीं थी, तब दिन-रात की कढ़ी मेहनत की थी। आज लोधी समाज को एक भी पदाधिकारी नहीं बनाया गया है। जबकि 99% लोधी समाज भाजपा को वोट करता है। आगरा जिले में लगभग 3.50 लाख वोट लोधी समाज का है। पद से दिया इस्तीफा
लेकिन लोधी समाज को आज तक कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिली है। हर बार समाज को ठगा सा रह जाता है। भाजपा कहती है-सबका साथ-सबका विकास लेकिन कुछ जनप्रतिनिधियों ने अपने गुर्गे सेट करने और अपनों को रेवड़ी बांट दी है। मूल कार्यकर्ताओं का अपमान किया है। इससे क्षुब्ध होकर महानगर कार्यकारिणी से त्यागपत्र देता हूं। मेरा मेरे नये सदस्य से त्यागपत्र स्वीकार करने की कृपा करें।

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