Kidney Health: ज्यादातर लोगों को हाई ब्लड प्रेशर या हाइपरटेंशन से जुड़ी परेशानी होने पर हार्ट से जुड़ी बीमारियों के होने का डर लगा रहता है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि हाई ब्लड प्रेशर सिर्फ दिल पर ही नहीं बल्कि शरीर के अलग-अलग हिस्सों को भी नुकसान पहुंचा सकता है। हाई बीपी का सबसे पहला असर सिर्फ दिल पर नहीं, बल्कि हमारी किडनी पर होता है। हाई बीपी दरअसल किडनी के लिए एक खतरे की घंटी है, जिसे ज्यादातर लोग सामान्य लाइफस्टाइल बीमारी समझकर टाल देते हैं।बता दें, हमारी किडनी के अंदर खून साफ करने वाली लाखों सूक्ष्म छननियां होती हैं। इनका काम हर मिनट खून से गंदगी को छानकर बाहर निकालना है। ऐसे में अगर इन बेहद नाजुक छननियों के अंदर खून का बहाव सामान्य से कहीं ज्यादा तेज दबाव के साथ हो, तो क्या होगा?
धीरे-धीरे इन छननियों की दीवारें सख्त होने लगती हैं और ये कमजोर पड़ जाती हैं। यह प्रक्रिया रातों-रात नहीं होती, बल्कि बरसों तक चलती रहती है। चूंकि इसमें कोई तेज दर्द नहीं होता, इसलिए जब तक ब्लड टेस्ट में गड़बड़ी सामने आती है, तब तक किडनी का एक बड़ा हिस्सा डैमेज हो चुका होता है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए आज के इस लेख में हम हाई ब्लड प्रेशर से किडनी पर होने वाले नुकसान के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं।
इन लक्षणों को न समझें मामूली
किडनी की बीमारी का मतलब सिर्फ पेशाब में जलन या दर्द होना नहीं है। शुरुआती संकेत बहुत ही साधारण होते हैं जिन्हें लोग थकान या कमजोरी समझकर छोड़ देते हैं। सबसे बड़ा संकेत पेशाब में झाग (Foam) का आना है, जिसका मतलब है कि किडनी शरीर के जरूरी प्रोटीन को छानने के बजाय बाहर निकाल रही है। इसके अलावा, पैरों, टखनों या कभी-कभी चेहरे पर आने वाली हल्की सूजन भी इसका इशारा है। यह सूजन शुरू में आती-जाती रहती है, लेकिन धीरे-धीरे स्थायी हो जाती है। जब तक जी मिचलाना या गंभीर थकान जैसे लक्षण आते हैं, तब तक स्थिति काफी बिगड़ चुकी होती है।
टेस्ट कराना भी है जरूरी
हाई बीपी के मरीज अक्सर घर पर अपना बीपी चेक करते रहते हैं, ऐसे में ज्यादातर लोग अपनी किडनी की जांच कराना भूल जाते हैं। जो किडनी हेल्थ के लिए सही नहीं हैं। ध्यान दें, हाइपरटेंशन के हर मरीज को साल में कम से कम एक बार किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT) और यूरिन टेस्ट जरूर कराना चाहिए। भले ही आपका बीपी दवाइयों से कंट्रोल में दिख रहा हो, फिर भी बरसों से बना हुआ हाई प्रेशर किडनी पर अपना असर छोड़ सकता है। ये छोटे और सस्ते टेस्ट समय रहते बीमारी को पकड़ने का सबसे आसान तरीका हैं।
इन आदतों को बदलें
इसे और भी सरल और स्पष्ट तरीके से, जैसा आपने कहा उसी पैटर्न में यहाँ दिया गया है:
ज्यादातर लोगों को लगता है कि अगर वे खाने में ऊपर से अलग से नमक नहीं ले रहे, तो उनका नमक कंट्रोल में है। लेकिन हकीकत यह है कि हमारे घरों में नमक सिर्फ ऊपर से नहीं छिड़का जाता, बल्कि यह अचार, चटनी, पैकेट बंद मसालों और बाजार के रेडी-टू-ईट खाने में पहले से ही बहुत ज्यादा मात्रा में मौजूद होता है। यह छिपा हुआ नमक न केवल ब्लड प्रेशर बढ़ाता है, बल्कि किडनी को भी शरीर का संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरत से ज्यादा मेहनत करने पर मजबूर कर देता है। नमक कम करने का मतलब बेस्वाद खाना खाना नहीं है, बल्कि उन छिपे हुए सोडियम के जरियों को पहचानना और अपनी आदतों में छोटे-छोटे सुधार करना है।


