हाईकोर्ट ने 200 करोड़ की जमीन पर रोक लगाई:वन विभाग की याचिका पर गुप्तेश्वर सोसायटी के पक्ष में आदेश पर ब्रेक

हाईकोर्ट ने 200 करोड़ की जमीन पर रोक लगाई:वन विभाग की याचिका पर गुप्तेश्वर सोसायटी के पक्ष में आदेश पर ब्रेक

ग्वालियर में लगभग 200 करोड़ रुपए की जमीन से जुड़े विवाद में हाईकोर्ट ने शुक्रवार को महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश दिया। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने गुप्तेश्वर गृह निर्माण सहकारी संस्था के पक्ष में दिए गए पिछले फैसले के अमल पर फिलहाल रोक लगा दी है। 198 बीघा जमीन को निजी संपत्ति मानने पर विवाद 11 दिसंबर 2024 को प्रथम अपील में दिए गए फैसले में बरा गांव की 198 बीघा जमीन को निजी संपत्ति मानते हुए गुप्तेश्वर गृह निर्माण सहकारी संस्था के पक्ष में निर्णय दिया गया था। यह जमीन ग्वालियर नगर निगम सीमा के बरा गांव में स्थित है। यहां भूमि की कीमत एक करोड़ रुपये प्रति बीघा से अधिक आंकी जा रही है। वन विभाग ने आरक्षित वन क्षेत्र होने का दावा किया राज्य शासन और वन विभाग की ओर से शासकीय अधिवक्ता सीपी सिंह ने अदालत में तर्क दिया कि सर्वे नंबर 730, 731 और 732 सहित करीब 198 बीघा जमीन वन विभाग के कंपार्टमेंट नंबर-320 के आरक्षित वन क्षेत्र में आती है। विभाग का कहना है कि इस भूमि पर उसका कब्जा है और यहां पौधारोपण भी किया गया है। ट्रायल कोर्ट ने पहले ही खारिज किया था दावा सरकार की ओर से बताया गया कि ट्रायल कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर बिक्री और स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों पर संदेह जताते हुए संस्था का दावा खारिज कर दिया था। अपील में दस्तावेजों की जांच पर उठे सवाल राज्य सरकार ने दलील दी कि अपील में फैसला पलटते समय कई महत्वपूर्ण तथ्यों और साक्ष्यों पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया। अतिरिक्त दस्तावेज स्वीकार करने के बाद उनकी विधिवत जांच भी नहीं की गई, जिसे प्रक्रियागत त्रुटि बताया गया। पुराने रिकॉर्ड में जमीन शासकीय दर्ज सरकार ने यह भी कहा कि पुराने राजस्व रिकॉर्ड में यह जमीन जंगल, पहाड़ और शासकीय भूमि के रूप में दर्ज है। इसलिए इसे निजी भूमि मानना तथ्यात्मक रूप से गलत है। गुप्तेश्वर गृह निर्माण सहकारी संस्था ने ट्रायल कोर्ट में दावा खारिज होने के बाद वर्ष 2004 में हाईकोर्ट में प्रथम अपील दायर की थी। बाद में हाईकोर्ट ने निचली अदालत का फैसला पलटते हुए जमीन को संस्था की निजी संपत्ति माना था, जिस पर अब पुनर्विचार याचिका के बाद रोक लगा दी गई है।

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *