पूर्णिया में सिलेंडर क्राइसिस की वजह से शादी-पार्टी का मेन्यू कोयले और लकड़ी की आंच पर तैयार हो रहा है। कमर्शियल सिलेंडर की कमी के कारण बंद होने के कगार पर खड़े होटल और रेस्टोरेंट में भी कोयले और लकड़ी पर लोगों के पसंदीदा डिश बन रहे हैं। इतना ही नहीं, स्वीट शॉप, चाट और समोसे की दुकानों तक में अब कमर्शियल गैस सिलेंडर की जगह कोयला और लकड़ी ले रही है। इससे कोयले और लड़की की डिमांड काफी बढ़ गई है। सिलेंडर क्राइसिस ने शहर के बाजार और खानपान की पूरी व्यवस्था को ही बदल कर रख दिया है। पहले 2 क्विंटल लकड़ी बिकती थी, अब 10 क्विंटल बिक रही शहर के रजनी चौक पर लकड़ी की दुकान चलाने वाले लकड़ी दुकानदार पिंटू कुमार ने बताया कि सिलेंडर क्राइसिस और सिलेंडर की कालाबाजारी की वजह से लोग एक बार फिर से पुराने दौर में लौट रहे हैं। गैस के बजाय जलावन के लिए लकड़ी खरीद कर ले जा रहे हैं। पहले दो क्विंटल लकड़ी बिकती थी जबकि अब उसकी बिक्री में गजब का उछाल आया है। बिक्री बढ़कर 10 क्विंटल हो चुकी है। बाजार में 1 हज़ार रुपए प्रति क्विंटल लकड़ी बेच रहे हैं। वहीं लकड़ी की खपत काफी बढ़ गई है। 10 किलोमीटर की रेडियस में पेड़ पौधे बेहद कम है। आम लोगों के साथ ही ठेले और गुमटी पर चाय की दुकान लगाने वाले लोग किलो के हिसाब से लकड़ी खरीद कर ले जा रहे हैं। इस वजह से लकड़ी का भी शॉर्टेज हो है। 50 किलो से बढ़कर ढाई क्विंटल तक पहुंची कोयले की डिमांड शहर के रजनी चौक पर ही लकड़ी और कोयले की दुकान चलाने वाले मनोज कुमार सिंहा ने बताया कि गैस सिलेंडर की किल्लत की वजह से लड़की और कोयले दोनों के ही डिमांड काफी बढ़ी है। पहले दिन भर में एक क्विंटल लकड़ी की बिक्री होती थी। अब ये बढ़कर तीन क्विंटल हो गया है। वहीं पहले पूरे दिन की कोयला की सेल 50 किलो थी, जो बढ़कर दो से ढाई क्विंटल हो गया है। मैं खुद गैस उपभोक्ता हूं। गैस की भारी किल्लत है, जिस वजह से लोग लकड़ी और कोयले की दुकान आ रहे हैं। गैस की किल्लत के कारण शादियां टूटने के कगार पर थी। ऐसे में इवेंट वाले अब शादियों के लिए लकड़ी और कोयला खरीद कर ले जा रहे हैं। कोयला कारोबारी बोले- सिलेंडर के क्राइसिस ने बढ़ाई डिमांड कांग्रेस ऑफिस गोकुल कृष्णा आश्रम के समीप कोयले की दुकान चलाने वाले मयंक सिंह ने बताया कि सिलेंडर क्राइसिस की वजह से कोयले की डिमांड अचानक बेहद बढ़ गई है। उन्हें रेस्टोरेंट, होटल और मैरेज हॉल संचालक के कॉल आ रहे हैं। इवेंट ऑर्गनाइजर कॉल कर कोयले की डिमांड कर रहे हैं। कोयले की एडवांस बुकिंग शुरू हो गई है। शादी पार्टियों में कोयले से खाना बनाया जा रहा है। दुकानदारों के कॉल आ रहे हैं। कोयले की एडवांस बुकिंग हो रही है। ठेले, ऑटो, टोटो और ट्रैक्टर से कोयला होटल, रेस्टोरेंट और दुकानों तक जा रहा है। बाजार में क्वालिटी के अनुसार कोयले की रेट 15 से 17 रुपए प्रति क्विंटल तक पड़ रही है। सिलेंडर की भारी किल्लत और कालाबाजारी को देखते हुए इमरजेंसी में गैस नहीं मिल पाने पर लोग कोयल लेकर जा रहे हैं। कोयले पर ही खाना बना रहा है। चाय दुकानदार ने कहा- सिलेंडर नहीं मिल रहा, मिट्टी का चूल्हा खरीदा है बस स्टैंड के समीप चाय की दुकान चलाने वाले दुकानदार डब्लू साह ने बताया कि गैस की भारी किल्लत के कारण अपनी चाय की दुकान के लिए मिट्टी के चूल्हे खरीद कर लाए हैं। लकड़ी और कोयले का इस्तेमाल कर चाय बना रहे हैं। गैस के बजाय कोयला और लकड़ी दोनों ही महंगे पर रहे हैं। ग्राहक ना होने पर गैस बंद कर सकते थे। दिन भर में 1 किलो गैस की खपत होती थी। जबकि कोयला या कोयला दिन भर में 5 किलो तक खपत हो रहा है। दुकान पर लकड़ी खरीदने आए ग्राहक मोहम्मद राजा ने बताया कि उन्होंने 10 दिन पहले गैस के लिए नंबर लगाया था। मगर अब तक उनका नंबर नहीं आया। कॉल करने पर कॉल भी रिसीव नहीं किया जा रहा। वे लाइन से वापस लौट रहे हैं। बाजार में गैस की शॉर्टेज के साथ ही कालाबाजारी भी शुरू हो गई है। गैस को 2 हजार में बेचा जा रहा है। गैस के लिए उन्होंने काफी ट्राई किया, मगर गैस न मिलने पर घर में लकड़ी पर खाना बनाया जा रहा है। पूर्णिया में सिलेंडर क्राइसिस की वजह से शादी-पार्टी का मेन्यू कोयले और लकड़ी की आंच पर तैयार हो रहा है। कमर्शियल सिलेंडर की कमी के कारण बंद होने के कगार पर खड़े होटल और रेस्टोरेंट में भी कोयले और लकड़ी पर लोगों के पसंदीदा डिश बन रहे हैं। इतना ही नहीं, स्वीट शॉप, चाट और समोसे की दुकानों तक में अब कमर्शियल गैस सिलेंडर की जगह कोयला और लकड़ी ले रही है। इससे कोयले और लड़की की डिमांड काफी बढ़ गई है। सिलेंडर क्राइसिस ने शहर के बाजार और खानपान की पूरी व्यवस्था को ही बदल कर रख दिया है। पहले 2 क्विंटल लकड़ी बिकती थी, अब 10 क्विंटल बिक रही शहर के रजनी चौक पर लकड़ी की दुकान चलाने वाले लकड़ी दुकानदार पिंटू कुमार ने बताया कि सिलेंडर क्राइसिस और सिलेंडर की कालाबाजारी की वजह से लोग एक बार फिर से पुराने दौर में लौट रहे हैं। गैस के बजाय जलावन के लिए लकड़ी खरीद कर ले जा रहे हैं। पहले दो क्विंटल लकड़ी बिकती थी जबकि अब उसकी बिक्री में गजब का उछाल आया है। बिक्री बढ़कर 10 क्विंटल हो चुकी है। बाजार में 1 हज़ार रुपए प्रति क्विंटल लकड़ी बेच रहे हैं। वहीं लकड़ी की खपत काफी बढ़ गई है। 10 किलोमीटर की रेडियस में पेड़ पौधे बेहद कम है। आम लोगों के साथ ही ठेले और गुमटी पर चाय की दुकान लगाने वाले लोग किलो के हिसाब से लकड़ी खरीद कर ले जा रहे हैं। इस वजह से लकड़ी का भी शॉर्टेज हो है। 50 किलो से बढ़कर ढाई क्विंटल तक पहुंची कोयले की डिमांड शहर के रजनी चौक पर ही लकड़ी और कोयले की दुकान चलाने वाले मनोज कुमार सिंहा ने बताया कि गैस सिलेंडर की किल्लत की वजह से लड़की और कोयले दोनों के ही डिमांड काफी बढ़ी है। पहले दिन भर में एक क्विंटल लकड़ी की बिक्री होती थी। अब ये बढ़कर तीन क्विंटल हो गया है। वहीं पहले पूरे दिन की कोयला की सेल 50 किलो थी, जो बढ़कर दो से ढाई क्विंटल हो गया है। मैं खुद गैस उपभोक्ता हूं। गैस की भारी किल्लत है, जिस वजह से लोग लकड़ी और कोयले की दुकान आ रहे हैं। गैस की किल्लत के कारण शादियां टूटने के कगार पर थी। ऐसे में इवेंट वाले अब शादियों के लिए लकड़ी और कोयला खरीद कर ले जा रहे हैं। कोयला कारोबारी बोले- सिलेंडर के क्राइसिस ने बढ़ाई डिमांड कांग्रेस ऑफिस गोकुल कृष्णा आश्रम के समीप कोयले की दुकान चलाने वाले मयंक सिंह ने बताया कि सिलेंडर क्राइसिस की वजह से कोयले की डिमांड अचानक बेहद बढ़ गई है। उन्हें रेस्टोरेंट, होटल और मैरेज हॉल संचालक के कॉल आ रहे हैं। इवेंट ऑर्गनाइजर कॉल कर कोयले की डिमांड कर रहे हैं। कोयले की एडवांस बुकिंग शुरू हो गई है। शादी पार्टियों में कोयले से खाना बनाया जा रहा है। दुकानदारों के कॉल आ रहे हैं। कोयले की एडवांस बुकिंग हो रही है। ठेले, ऑटो, टोटो और ट्रैक्टर से कोयला होटल, रेस्टोरेंट और दुकानों तक जा रहा है। बाजार में क्वालिटी के अनुसार कोयले की रेट 15 से 17 रुपए प्रति क्विंटल तक पड़ रही है। सिलेंडर की भारी किल्लत और कालाबाजारी को देखते हुए इमरजेंसी में गैस नहीं मिल पाने पर लोग कोयल लेकर जा रहे हैं। कोयले पर ही खाना बना रहा है। चाय दुकानदार ने कहा- सिलेंडर नहीं मिल रहा, मिट्टी का चूल्हा खरीदा है बस स्टैंड के समीप चाय की दुकान चलाने वाले दुकानदार डब्लू साह ने बताया कि गैस की भारी किल्लत के कारण अपनी चाय की दुकान के लिए मिट्टी के चूल्हे खरीद कर लाए हैं। लकड़ी और कोयले का इस्तेमाल कर चाय बना रहे हैं। गैस के बजाय कोयला और लकड़ी दोनों ही महंगे पर रहे हैं। ग्राहक ना होने पर गैस बंद कर सकते थे। दिन भर में 1 किलो गैस की खपत होती थी। जबकि कोयला या कोयला दिन भर में 5 किलो तक खपत हो रहा है। दुकान पर लकड़ी खरीदने आए ग्राहक मोहम्मद राजा ने बताया कि उन्होंने 10 दिन पहले गैस के लिए नंबर लगाया था। मगर अब तक उनका नंबर नहीं आया। कॉल करने पर कॉल भी रिसीव नहीं किया जा रहा। वे लाइन से वापस लौट रहे हैं। बाजार में गैस की शॉर्टेज के साथ ही कालाबाजारी भी शुरू हो गई है। गैस को 2 हजार में बेचा जा रहा है। गैस के लिए उन्होंने काफी ट्राई किया, मगर गैस न मिलने पर घर में लकड़ी पर खाना बनाया जा रहा है।


