सरकारी वकीलों की कार्यप्रणाली पर हाई कोर्ट सख्त अंतिम सुनवाई में ही गैरहाजिर रहने से बढ़ी नाराजगी

सरकारी वकीलों की कार्यप्रणाली पर हाई कोर्ट सख्त अंतिम सुनवाई में ही गैरहाजिर रहने से बढ़ी नाराजगी

राज्य शासन की ओर से पैरवी करने वाले शासकीय अधिवक्ताओं की कार्यप्रणाली को लेकर मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने दो मामलों में कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि न्यायालय में राज्य का पक्ष प्रभावी ढंग से रखने के लिए अधिवक्ताओं का पूरी तैयारी के साथ उपस्थित होना जरूरी है। एक मामले में अंतिम सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से कोई भी शासकीय अधिवक्ता अदालत में उपस्थित नहीं हुआ, जिस पर कोर्ट ने अतिरिक्त महाधिवक्ता को व्यवस्था में सुधार के निर्देश दिए। वहीं दूसरे मामले में अदालत ने पाया कि सरकारी अधिवक्ता बिना तैयारी के पहुंचे। उन्होंने केस की फाइल तक नहीं पढ़ी थी, जिसके कारण वे सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। कोर्ट ने इसे गंभीर स्थिति बताते हुए आदेश की प्रति मुख्य सचिव को भेजने के निर्देश दिए हैं। इन प्रोजेक्ट को जोड़ेंगे केस 1 : अंतिम सुनवाई में एक घंटे नहीं आए सरकारी वकील
इंदौर खंडपीठ में खालिद खान बनाम मप्र राज्य केस की सुनवाई में शासन की ओर से कोई भी शासकीय अधिवक्ता उपस्थित नहीं हुआ। जस्टिस गजेंद्र सिंह की एकलपीठ ने 5 मार्च 2026 को हुई सुनवाई में कहा कि अदालत करीब एक घंटे तक इंतजार करती रही, लेकिन राज्य की ओर से कोई भी अधिवक्ता उपस्थित नहीं हुआ। अदालत ने इसे गंभीर स्थिति बताते हुए आदेश में उल्लेख किया कि पूर्व में 28 अप्रैल 2025 को पारित आदेश का भी पालन नहीं किया गया है। इस स्थिति को देखते हुए अदालत ने इंदौर खंडपीठ के अतिरिक्त महाधिवक्ता को आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो। केस 2 : मामले की फाइल पढ़े बनी पहुंचे सरकारी अधिवक्ता
दूसरे मामले में हाई कोर्ट की डिविजन बेंच ने आपराधिक अपील की सुनवाई के दौरान उपस्थित शासकीय अधिवक्ता की तैयारी पर नाराजगी जताई। अदालत ने टिप्पणी की कि अधिवक्ता मामले की फाइल पढ़कर नहीं आए और अदालत के प्रश्नों का उत्तर भी नहीं दे सके। मामला लंका प्रसाद बसोर एवं अन्य बनाम मप्र राज्य से संबंधित है। यह अपील प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के 21 नवंबर 2017 के फैसले के खिलाफ दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आरोपी शोभन बसोर की सजा निलंबन व जमानत की पहली अर्जी स्वीकार करते हुए शेष सजा के क्रियान्वयन पर रोक लगाई। वहीं आरोपी बच्चेलाल बसोर की सजा निलंबन की दूसरी अर्जी खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा- आदेश की प्रति मुख्य सचिव को भेजें, शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्ति व कार्यक्षमता की समीक्षा जरूरी
लंका प्रसाद बसोर एवं अन्य बनाम मप्र राज्य से संबंधित केस की सुनवाई के अंत में हाई कोर्ट की पीठ ने शासकीय अधिवक्ता की तैयारी पर गंभीर टिप्पणी की। कोर्ट ने आदेश की प्रति मुख्य सचिव को भेजने के भी निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्ति और उनकी कार्यक्षमता की समीक्षा की जानी चाहिए, ताकि अदालत में राज्य की ओर से प्रभावी पैरवी सुनिश्चित हो सके।

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