सभी नगर निकायों से जिम्मेदारी वापस:37 जिलों में 31 मार्च के बाद बंद होंगे मुख्यमंत्री वृद्धजन आश्रय स्थल

सभी नगर निकायों से जिम्मेदारी वापस:37 जिलों में 31 मार्च के बाद बंद होंगे मुख्यमंत्री वृद्धजन आश्रय स्थल

बिहार सरकार ने बेसहारा बुजुर्गों के लिए संचालित “मुख्यमंत्री वृद्धजन आश्रय स्थल योजना” को लेकर एक बड़ा और अहम नीतिगत फैसला लिया है। राज्य के नगर विकास एवं आवास विभाग के दिशा-निर्देश पर नगर निकायों द्वारा चलाए जा रहे इन आश्रय स्थलों को आगामी 31 मार्च 2026 के बाद पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा। राहत की बात यह है कि यह नया नियम पटना नगर निगम पर लागू नहीं होगा। राजधानी पटना को छोड़कर राज्य के बाकी 37 जिलों के नगर निगमों और निकायों में अब इस योजना का संचालन नहीं किया जाएगा। नगर विकास एवं आवास विभाग ने राज्य के सभी नगर आयुक्तों और कार्यपालक पदाधिकारियों को इस नए आदेश को सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर लागू करने का सख्त निर्देश दिया है। जारी पत्र में व्यवस्था परिवर्तन को लेकर प्रमुख बातें शामिल हैं। इन आश्रय स्थलों में वर्तमान में रह रहे बेसहारा और वृद्धजनों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। उन्हें सम्मानपूर्वक समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित स्थायी वृद्धाश्रमों में शिफ्ट (स्थानांतरित) कर दिया जाएगा। इस योजना के संचालन के लिए अब तक खरीदे गए उपकरण, बेड, फर्नीचर व अन्य भौतिक सामग्रियों को बेकार नहीं जाने दिया जाएगा। नगर निकाय इनका उपयोग अपनी अन्य उपयुक्त और चालू सरकारी योजनाओं में कर सकेंगे। भोजन एजेंसियों के करार होंगे रद्द, पैसे वापस जमा होंगे आश्रय स्थलों में रह रहे बुजुर्गों के दैनिक भोजन, नाश्ता और अन्य सुविधाओं के लिए जिन आउटसोर्सिंग या निजी एजेंसियों के साथ करार (एग्रीमेंट) किया गया था, वह 31 मार्च 2026 के बाद स्वतः समाप्त कर दिया जाएगा। इस योजना के तहत निकायों को जो भी फंड आवंटित किया गया था और जो खर्च हो चुका है, उसका स्पष्ट उपयोगिता प्रमाण पत्र विभाग को अविलंब सौंपना होगा। क्यों लिया गया यह अहम फैसला? विभागीय सूत्रों और जारी आदेश के अनुसार, बीते 25 फरवरी 2026 को राज्य के विकास आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी। इस महत्वपूर्ण बैठक में योजना की वर्तमान स्थिति और जमीनी स्तर पर इसके संचालन की गहन समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि राज्य में समाज कल्याण विभाग द्वारा वृद्धाश्रमों का संचालन अधिक सुचारू, व्यवस्थित और बेहतर तरीके से किया जा रहा है। ऐसे में बेसहारा बुजुर्गों की देखभाल और उनके आश्रय की पूरी जिम्मेदारी समाज कल्याण विभाग के माध्यम से ही कराना ज्यादा उपयुक्त और व्यावहारिक होगा। बिहार सरकार ने बेसहारा बुजुर्गों के लिए संचालित “मुख्यमंत्री वृद्धजन आश्रय स्थल योजना” को लेकर एक बड़ा और अहम नीतिगत फैसला लिया है। राज्य के नगर विकास एवं आवास विभाग के दिशा-निर्देश पर नगर निकायों द्वारा चलाए जा रहे इन आश्रय स्थलों को आगामी 31 मार्च 2026 के बाद पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा। राहत की बात यह है कि यह नया नियम पटना नगर निगम पर लागू नहीं होगा। राजधानी पटना को छोड़कर राज्य के बाकी 37 जिलों के नगर निगमों और निकायों में अब इस योजना का संचालन नहीं किया जाएगा। नगर विकास एवं आवास विभाग ने राज्य के सभी नगर आयुक्तों और कार्यपालक पदाधिकारियों को इस नए आदेश को सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर लागू करने का सख्त निर्देश दिया है। जारी पत्र में व्यवस्था परिवर्तन को लेकर प्रमुख बातें शामिल हैं। इन आश्रय स्थलों में वर्तमान में रह रहे बेसहारा और वृद्धजनों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। उन्हें सम्मानपूर्वक समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित स्थायी वृद्धाश्रमों में शिफ्ट (स्थानांतरित) कर दिया जाएगा। इस योजना के संचालन के लिए अब तक खरीदे गए उपकरण, बेड, फर्नीचर व अन्य भौतिक सामग्रियों को बेकार नहीं जाने दिया जाएगा। नगर निकाय इनका उपयोग अपनी अन्य उपयुक्त और चालू सरकारी योजनाओं में कर सकेंगे। भोजन एजेंसियों के करार होंगे रद्द, पैसे वापस जमा होंगे आश्रय स्थलों में रह रहे बुजुर्गों के दैनिक भोजन, नाश्ता और अन्य सुविधाओं के लिए जिन आउटसोर्सिंग या निजी एजेंसियों के साथ करार (एग्रीमेंट) किया गया था, वह 31 मार्च 2026 के बाद स्वतः समाप्त कर दिया जाएगा। इस योजना के तहत निकायों को जो भी फंड आवंटित किया गया था और जो खर्च हो चुका है, उसका स्पष्ट उपयोगिता प्रमाण पत्र विभाग को अविलंब सौंपना होगा। क्यों लिया गया यह अहम फैसला? विभागीय सूत्रों और जारी आदेश के अनुसार, बीते 25 फरवरी 2026 को राज्य के विकास आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी। इस महत्वपूर्ण बैठक में योजना की वर्तमान स्थिति और जमीनी स्तर पर इसके संचालन की गहन समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि राज्य में समाज कल्याण विभाग द्वारा वृद्धाश्रमों का संचालन अधिक सुचारू, व्यवस्थित और बेहतर तरीके से किया जा रहा है। ऐसे में बेसहारा बुजुर्गों की देखभाल और उनके आश्रय की पूरी जिम्मेदारी समाज कल्याण विभाग के माध्यम से ही कराना ज्यादा उपयुक्त और व्यावहारिक होगा।  

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