Fruits Pesticide Risk: क्या आप भी बिना धोए खाते हैं फल? कैंसर और हार्मोनल गड़बड़ी का बढ़ सकता है खतरा

Fruits Pesticide Risk: क्या आप भी बिना धोए खाते हैं फल? कैंसर और हार्मोनल गड़बड़ी का बढ़ सकता है खतरा

Fruits Pesticide Risk: फल हमारी डाइट का एक अहम हिस्सा हैं। डॉक्टर और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट भी रोजाना फल खाने की सलाह देते हैं, क्योंकि इनमें विटामिन, मिनरल और फाइबर भरपूर मात्रा में होते हैं। ये शरीर को स्वस्थ रखते हैं और कई बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं।

लेकिन कई बार इन्हीं फलों की ऊपरी परत पर कीटनाशकों (पेस्टिसाइड) के अवशेष छिपे हो सकते हैं, जो लंबे समय में सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। लोग अक्सर यह सोचकर फल खाते हैं कि वे हेल्दी खाना खा रहे हैं, लेकिन अनजाने में उनके साथ पेस्टिसाइड भी शरीर में जा सकते हैं।

स्टडी में क्या सामने आया

हाल ही में प्रकाशित एक स्टडी में बताया गया है कि खाने-पीने की चीजों के जरिए शरीर में जाने वाले कीटनाशकों के निशान इंसानों के पेशाब तक में पाए जा सकते हैं। इसका मतलब है कि कई लोग अनजाने में अपनी डाइट के जरिए पेस्टिसाइड के संपर्क में आ रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक जो लोग स्ट्रॉबेरी, पालक और शिमला मिर्च जैसे फल और सब्जियां ज्यादा खाते हैं, उनके खून में पेस्टिसाइड से जुड़े बायोमार्कर ज्यादा पाए गए। लंबे समय तक इन केमिकल्स के संपर्क में रहने से कैंसर, हार्मोन गड़बड़ी और प्रजनन से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

भारत में क्यों बढ़ रही है चिंता

भारत में खेती के दौरान कीटनाशकों का इस्तेमाल काफी आम है। विशेषज्ञों के मुताबिक देश में हर साल लगभग 20 से 30 प्रतिशत फसलें कीटों के कारण खराब हो जाती हैं। इसी नुकसान से बचने के लिए किसान कीटनाशकों का इस्तेमाल करते हैं। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि सेब, अंगूर, आम और अनार जैसे फलों पर लगभग 100 प्रतिशत तक पेस्टिसाइड का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए इन फलों में कीटनाशक के अवशेष होने का खतरा ज्यादा रहता है। एक जांच में यह भी सामने आया कि भारत में लिए गए करीब 21.7 प्रतिशत फलों के नमूनों में पेस्टिसाइड पाए गए, जबकि लगभग 1.1 प्रतिशत नमूनों में इनकी मात्रा तय सुरक्षा सीमा से भी ज्यादा थी।

किन लोगों को ज्यादा खतरा

कीटनाशकों का असर हर व्यक्ति पर अलग-अलग हो सकता है, लेकिन कुछ लोग ज्यादा जोखिम में होते हैं। बच्चों का शरीर अभी विकसित हो रहा होता है, इसलिए केमिकल का असर उन पर ज्यादा पड़ सकता है। वहीं गर्भवती महिलाओं के लिए भी यह खतरा बढ़ जाता है, क्योंकि इसका असर आने वाले बच्चे की सेहत पर पड़ सकता है।

फल खाते समय इन बातों का रखें ध्यान

फल खाना बंद करना इसका समाधान नहीं है, क्योंकि फल शरीर के लिए बेहद जरूरी होते हैं। लेकिन कुछ सावधानियां अपनाकर पेस्टिसाइड के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। फल और सब्जियां खाने से पहले उन्हें अच्छी तरह पानी से धोना चाहिए। अगर शक हो तो नमक वाले पानी या बेकिंग सोडा से भी साफ किया जा सकता है। कुछ फलों को छीलकर खाना भी बेहतर माना जाता है, क्योंकि कई बार केमिकल उनकी बाहरी परत पर ही होते हैं। इसके अलावा अलग-अलग तरह के फल खाने की आदत डालनी चाहिए ताकि किसी एक तरह के पेस्टिसाइड का ज्यादा असर न हो।

जागरूकता और सख्त नियमों की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि कीटनाशकों के इस्तेमाल पर सख्त निगरानी और लोगों में जागरूकता बढ़ाना बहुत जरूरी है। अगर सही नियमों का पालन हो और लोग भी सावधानी बरतें, तो फल और सब्जियां सुरक्षित तरीके से खाई जा सकती हैं और उनका पूरा फायदा मिल सकता है।

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