US–Israel–Iran War: ईरान ने अमेरिका की नाक में किया दम, अब ट्रंप प्रशासन ने लिया अहम फैसला

US–Israel–Iran War: ईरान ने अमेरिका की नाक में किया दम, अब ट्रंप प्रशासन ने लिया अहम फैसला

Middle East Drone Threat: ईरान पर अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के चलते मध्य-पूर्व में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। ईरान जहां झुकने को तैयार नहीं है, वहीं अमेरिका और इजरायल अपने लक्ष्य हासिल करने तक हमलों को रोकने के मूड में नहीं दिख रहे हैं।

हालांकि इन सबके बीच ईरान ने अपने मिसाइल और ड्रोन हमलों से अमेरिका और इजराइल की नाक में दम कर रखा है। लगातार हो रहे इन हमलों की वजह से मध्य-पूर्व के देशों की चिंता भी बढ़ गई है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि अमेरिकी डिफेंस सिस्टम पैट्रियट और THAAD ईरानी मिसाइलों को रोकने में बेहद महंगे साबित हो रहे हैं, जबकि सस्ते ड्रोन हमलों से निपटने के लिए सीमित इंतजाम हैं।

ऐसे हालात में ट्रंप प्रशासन ने अब एक अहम फैसला लिया है। यूक्रेन में रूसी ड्रोन के खिलाफ इस्तेमाल हो रहे अमेरिकी एंटी-ड्रोन सिस्टम को मध्य-पूर्व के देशों में तैनात करने की तैयारी की जा रही है। इस संबंध में जानकारी अमेरिका के दो अधिकारियों ने दी है।

अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान के शाहेद ड्रोन से मुकाबले में अमेरिका की प्रतिक्रिया अब तक निराशाजनक रही है। खासकर ईरान की ओर से इस्तेमाल किए जा रहे ड्रोन अपेक्षाकृत साधारण संस्करण हैं, जबकि रूस यूक्रेन में अपने युद्ध के दौरान इन्हें लगातार बेहतर और अपडेट करता रहा है।

मध्य-पूर्व में अमेरिकी ड्रोन-रोधी क्षमताओं को मजबूत करने में हुई देरी के कारण पूरे क्षेत्र में ईरान के ड्रोन हमलों को लेकर चिंता बढ़ गई है। फारस की खाड़ी के कई देशों ने शिकायत की है कि उन्हें अपने क्षेत्र पर हो रहे ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों से निपटने के लिए पर्याप्त समय और संसाधन नहीं दिए गए।

मेरोप्स नामक एंटी-ड्रोन सिस्टम होगा तैनात

अमेरिका ने मेरोप्स नामक एंटी-ड्रोन सिस्टम को मध्य-पूर्व में तैनात का फैसला किया, जिसने यूक्रेन में रूसी ड्रोन के खिलाफ प्रभावी प्रदर्शन किया है। यह सिस्टम दुश्मन ड्रोन का पीछा कर उन्हें नष्ट करने में सक्षम है। इसकी खासियत यह है कि इसे मध्यम आकार की पिकअप ट्रक में आसानी से लगाया जा सकता है। यह सिस्टम कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से दुश्मन ड्रोन की पहचान करता है। सिग्नल या सैटेलाइट जाम होने की स्थिति में भी यह स्वतंत्र रूप से नेविगेट कर सकता है और दुश्मन ड्रोन के करीब पहुंचकर उसे हवा में ही गिरा देता है।

इतना ही नहीं, तेज गति वाली मिसाइलों का पता लगाने के लिए कैलिब्रेट किए गए रडार सिस्टम पर छोटे ड्रोन की सटीक पहचान करना मुश्किल होता है। कई बार इन्हें पक्षी या छोटे विमान समझने की गलती हो सकती है। मेरोप्स सिस्टम को खास तौर पर ऐसे ही छोटे और तेज ड्रोन की पहचान कर उन्हें मार गिराने के लिए डिजाइन किया गया है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह सिस्टम आर्थिक रूप से भी किफायती माना जा रहा है, क्योंकि 50,000 डॉलर से कम कीमत वाले ड्रोन को मार गिराने के लिए लाखों डॉलर की मिसाइल दागना बेहद महंगा पड़ता है।

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