बंगाल के राज्यपाल और लद्दाख के LG का इस्तीफा:ममता बोलीं- मुझे गृहमंत्री ने बताया आरएन रवि नए गवर्नर होंगे, ये केंद्र का एकतरफा फैसला

बंगाल के राज्यपाल और लद्दाख के LG का इस्तीफा:ममता बोलीं- मुझे गृहमंत्री ने बताया आरएन रवि नए गवर्नर होंगे, ये केंद्र का एकतरफा फैसला

पश्चिम बंगाल चुनाव से एक महीने पहले राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने इस्तीफा दे दिया है। तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि को बंगाल की भी अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। उधर, लद्दाख के उपराज्यपाल कवींद्र गुप्ता ने भी इस्तीफा दे दिया है। बोस ने राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा भेज दिया है। फिलहाल वे दिल्ली में मौजूद हैं। उधर,मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बोस के इस्तीफे पर हैरानी जताई। उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृहमंत्री ने अभी मुझे सूचित किया है कि आरएन रवि को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया जा रहा है। उन्होंने मुझसे राय नहीं ली है। ये केंद्र का एकतरफा फैसला है। बोस ने 23 नवंबर 2022 को बंगाल के राज्यपाल बने थे। वहीं, गुप्ता ने 18 जुलाई 2025 को कार्यभार संभाला था। बोस के कार्यकाल के दौरान कई बार ममता सरकार और राजभवन के बीच मतभेद भी सामने आए थे। विशेष रूप से विश्वविद्यालयों की नियुक्तियों, प्रशासनिक हस्तक्षेप और कुछ संवैधानिक मुद्दों को लेकर विवादों की खबरें आती रही हैं। ममता बोलीं- मुझसे कोई सलाह नहीं ली गई राज्य की सीएम ममता बनर्जी ने X पर लिखा कहा- ‘बोस के इस्तीफे की खबर अचानक आने से मैं हैरान हूं। अभी तक मुझे उनके इस्तीफे की असली वजह के बारे में जानकारी नहीं है।’ उन्होंने ये भी कहा- ‘केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुझे बताया है कि आरएन रवि को बंगाल का नया गवर्नर बनाया जा रहा है। यह एकतरफा फैसला है। तय परंपरा के अनुसार मुझसे कोई सलाह नहीं ली गई।’ CM ममता और राज्यपाल बोस के बीच सामने आए विवाद… 2023: विश्वविद्यालयों में VC नियुक्ति विवाद राज्यपाल बोस ने राज्य के कई विश्वविद्यालयों में वाइस चांसलर (VC) नियुक्त किए, जिस पर राज्य सरकार ने आपत्ति जताई। सरकार का आरोप था कि नियुक्तियां राज्य की सलाह के बिना हुईं। राज्यपाल ने कहा कि कानून के तहत यह उनका अधिकार है। मामला अदालत तक पहुंचा और उच्च शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई। 2023-2024: राज्य विधेयकों को मंजूरी न देने का आरोप राज्य सरकार ने आरोप लगाया कि राज्यपाल कई विधेयकों पर मंजूरी में देरी कर रहे हैं। ममता बनर्जी ने इसे ‘लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाधा’ बताया था। राज्यपाल का पक्ष था कि विधेयकों की संवैधानिक जांच जरूरी है। इससे सरकार-राज्यपाल संबंध और तनावपूर्ण हुए। 2023: मनरेगा और केंद्रीय फंड पर टिप्पणी राज्यपाल ने मनरेगा सहित केंद्रीय योजनाओं में कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए। राज्य सरकार ने इसे राजनीति से प्रेरित बताया। दोनों पक्षों के बयानों से केंद्र-राज्य संबंधों पर भी असर पड़ा। 2023-24: राज्यपाल की जिलों की यात्राएं राज्यपाल के जिलों के दौरे और जनता से सीधे संवाद पर सरकार ने आपत्ति जताई। सरकार ने कहा कि यह समानांतर प्रशासन जैसा है। राज्यपाल ने इसे जनता से जुड़ने का संवैधानिक दायित्व बताया था। 2024: महिला कर्मचारियों की सेक्शुअल हैरेसमेंट की शिकायतें पश्चिम बंगाल लोक भवन से जुड़े सेक्शुअल हैरेसमेंट के आरोप सामने आए, जिस पर राज्य सरकार ने जांच और कार्रवाई की मांग की। राज्यपाल ने आरोपों को सिरे से खारिज किया और राजनीतिक दुर्भावना बताया। मामला राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहा, लेकिन तनाव बढ़ता रहा।

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