10 दिन और चला ईरान युद्ध तो अमेरिका पर आ जाएगा संकट? रिपोर्ट में बड़ा दावा

10 दिन और चला ईरान युद्ध तो अमेरिका पर आ जाएगा संकट? रिपोर्ट में बड़ा दावा

US Iran Israel conflict: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच लगातार तनाव बढ़ता है। इसी बीच पेंटागन से एक जानकारी लीक हुई है, जो कि अमेरिका के लिए चिंता की बात है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर अमेरिका अगले 10 दिन तक ईरान पर इसी तरह तेजी से हमला करना जारी रखता है तो उसकी अहम मिसाइलों का भंडार कम हो सकता है। 

अल जज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक पेंटागन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को आगाह किया कि यदि ईरान के साथ युद्ध लंबा चलता है तो गोला-बारूद की कमी हो जाएगी। हालांकि ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर दावा किया कि अमेरिका के पास मध्यम और उच्च श्रेणी के हथियारों का भंडार लगभग असीमित है और इनसे युद्ध लंबे समय तक लड़ा जा सकता है।

विदेश मंत्री ने क्या कहा? 

वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि ईरान हर महीने 100 से ज्यादा मिसाइलें बना रहा है, जबकि अमेरिका केवल 6-7 इंटरसेप्टर तैयार कर पा रहा है।

यदि लागत की बात करें तो पहले 24 घंटे में ही अमेरिका ने करीब 779 मिलियन डॉलर (लगभग 6,900 करोड़ रुपये) खर्च कर दिए। सेंटर फॉर न्यू अमेरिकन सिक्योरिटी के अनुसार यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड जैसे विमानवाहक पोत समूह को संचालित करने में रोजाना 6.5 मिलियन डॉलर का खर्च आता है। युद्ध से पहले दो कैरियर स्ट्राइक ग्रुप तैनात किए गए, जिनकी कुल तैयारी लागत लगभग 630 मिलियन डॉलर आंकी गई है।

रिपोर्ट में दी चेतावनी

विश्लेषकों का कहना है कि सबसे ज्यादा प्रेशर इंटरसेप्टर मिसाइलों पर पड़ेगा। पिछले साल ईरान के साथ टकराव में अमेरिका ने अपनी थाड इंटरसेप्टर मिसाइलों का 25% इस्तेमाल कर लिया था। इसके अलावा ज्वाइंट डायरेक्ट अटैक म्यूनिशन (JDAM) जैसे जीपीएस-गाइडेड ‘स्मार्ट बम’ भी तेजी से खर्च हो रहे हैं। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि स्टैंडर्ड मिसाइल-3 (SM-3) जैसे उन्नत एंटी-बैलिस्टिक इंटरसेप्टर का स्टॉक भी सीमित है।

ट्रंप ने क्या कहा था? 

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंव ने कहा था कि वे ईरान के साथ परमाणु वार्ता की प्रगति से संतुष्ट नहीं हैं। इसके तीन घंटे बाद उन्होंने उस सैन्य अभियान को मंजूरी दे दी, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई और कई शीर्ष सैन्य अधिकारियों को निशाना बनाया गया। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने बहरीन, सऊदी अरब, कतर, यूएई और इराक स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।

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