गोपालगंज में 2 करोड़ से ज्यादा की लागत से बनने वाला पुल कंप्लीट होने से पहले ही ध्वस्त हो गया। पुल घोघरी नदी पर बन रहा था। आरसीसी पुल ढलाई के दौरान गिर गया। फिलहाल निर्माण कार्य रोक दिया गया है और विभाग की टीम क्षति का आकलन करने में जुटी है। जिले के सिधवलिया प्रखंड अंतर्गत गंगवा गांव में इसका निर्माण हो रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि अचानक तेज आवाज के साथ निर्माणाधीन ढांचा ढह गया। गनीमत रही कि कोई मजदूर इसमें घायल नहीं हुआ। स्थानीय लोगों का कहना है कि सीमेंट और बालू के मिश्रण में मानकों की अनदेखी की गई। जिलाधिकारी ने बताया कि जमीन का कॉम्पैक्शन सही से नहीं होने के कारण सेंट्रिंग गिर गई। विभाग की ओर से उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी गई है। ढलाई के दौरान ढांचा कैसे ढहा, क्या दिखा मौके पर
गोपालगंज के सिधवलिया प्रखंड के गंगवा गांव में घोघरी नदी पर बन रहे लगभग 29 मीटर लंबे आरसीसी पुल की ढलाई जारी थी। निर्माण स्थल पर स्लैब डालने का काम चल रहा था और मजदूर निर्धारित ढांचे पर कंक्रीट बिछा रहे थे। इसी बीच अचानक तेज आवाज गूंजी और कुछ ही पलों में सेंट्रिंग के सहारे खड़ा ढांचा भरभराकर नीचे आ गिरा। आसपास मौजूद लोगों के मुताबिक, आवाज इतनी तेज थी कि पास के घरों तक कंपन महसूस हुआ। हादसे के तुरंत बाद काम बंद कर दिया गया और मौके पर अफरातफरी मच गई। हालांकि राहत की बात यह रही कि कोई मजदूर इसकी चपेट में नहीं आया। कुछ ही देर में बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर जुट गए। गिरा हुआ कंक्रीट, मुड़े हुए सरिया और टूटी सेंट्रिंग की लकड़ियां पूरे क्षेत्र में बिखरी दिखीं। स्थानीय लोग निर्माण की निगरानी को लेकर सवाल उठाते नजर आए। विभागीय टीम ने स्थल का मुआयना शुरू किया और क्षति का आकलन करने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई। फिलहाल पूरे प्रोजेक्ट पर रोक लगाकर तकनीकी कारणों की जांच की जा रही है। गुणवत्ता पर उठे सवाल, ग्रामीण बोले- इंजीनियर पर कार्रवाई हो
पुल गिरने के बाद ग्रामीणों ने निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े किए। उनका आरोप है कि सीमेंट और बालू के मिश्रण में तय मानकों का पालन नहीं किया गया। कुछ ग्रामीणों का कहना है कि स्लैब की मोटाई और कंक्रीट की मजबूती अपेक्षित स्तर की नहीं थी। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि पुल में इस्तेमाल किए गए सरिया की मोटाई और गुणवत्ता मानक के अनुरूप नहीं थी, जिससे ढांचा ढलाई का भार नहीं झेल सका। ग्रामीणों ने सेंट्रिंग और सपोर्ट सिस्टम को भी हादसे की बड़ी वजह बताया। उनका दावा है कि सहारा देने वाली संरचना पर्याप्त मजबूत नहीं थी। घटना के बाद लोगों ने उच्च स्तरीय जांच और जिम्मेदार ठेकेदार व संबंधित इंजीनियरों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। डीएम ने क्या-क्या कहा, पढ़िए..
गोपालगंज के जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा ने कहा, “इस पुल निर्माण का संवेदक बापूधाम कंस्ट्रक्शन है। इसके जिम्मेदार बबलू कुमार हैं। घटना के बाद मैंने खुद पूरे मामले की मॉनिटरिंग शुरू कर दी है। मैं जब साइट पर पहुंचा तो वहां एई, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, विभागीय विशेषज्ञ और मुजफ्फरपुर डिवीजन के चीफ इंजीनियर सुमित समेत कई अधिकारी मौजूद थे। हमने मौके पर ग्रामीणों से भी विस्तार से बातचीत की।” जेई निर्माण स्थल से गायब रहते थे
डीएम ने कहा, “ग्रामीणों से पूछताछ में पता चला कि जेई दिलीप तिवारी और एई ज्योति मधेशिया कई बार अपने कार्यस्थल से अनुपस्थित पाए गए थे। वे नियमित रूप से साइट पर नहीं जाते थे। कार्यपालक अभियंता की उपस्थिति भी नगण्य थी। यह गंभीर लापरवाही है।” कॉम्पैक्शन सही तरीके से नहीं हुआ था
डीएम ने कहा, “प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई कि जमीन का कॉम्पैक्शन सही तरीके से नहीं हुआ था। इसी कारण सेंट्रिंग गिर गई और यह घटना हुई।” डीएम ने आगे बताया, “जब हमने तकनीकी विशेषज्ञों से बात की तो उन्होंने कहा कि केवल कॉम्पैक्शन वजह नहीं हो सकता। सेंट्रिंग में जो आयरन बॉस लगाए गए थे, उनमें जंग लगा हुआ था। उनकी क्षमता इतनी नहीं थी कि वे ढलाई का वजन संभाल सकें।” उन्होंने कहा, “मैंने आज ही आरडब्ल्यूडी के सचिव को संबंधित तीनों अधिकारियों के निलंबन और प्राथमिकी दर्ज करने की अनुशंसा कर दी है। इस संबंध में आदेश की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।” संवेदक को ब्लैक लिस्ट में डालने की सिफारिश
डीएम ने कहा, “पूछताछ में पता चला कि संवेदक बीमार हैं, लेकिन उनकी ओर से साइट पर कोई प्रतिनिधि भी मौजूद नहीं था। यह अपने आप में गंभीर मामला है। इसलिए संवेदक को भी काली सूची में डालने की अनुशंसा की गई है। पूरी रिपोर्ट विभाग को भेज दी गई है। उच्च स्तरीय जांच होगी। विशेषज्ञों ने सीमेंट और आयरन सेंट्रिंग के नमूने लिए हैं। दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।” गोपालगंज में 2 करोड़ से ज्यादा की लागत से बनने वाला पुल कंप्लीट होने से पहले ही ध्वस्त हो गया। पुल घोघरी नदी पर बन रहा था। आरसीसी पुल ढलाई के दौरान गिर गया। फिलहाल निर्माण कार्य रोक दिया गया है और विभाग की टीम क्षति का आकलन करने में जुटी है। जिले के सिधवलिया प्रखंड अंतर्गत गंगवा गांव में इसका निर्माण हो रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि अचानक तेज आवाज के साथ निर्माणाधीन ढांचा ढह गया। गनीमत रही कि कोई मजदूर इसमें घायल नहीं हुआ। स्थानीय लोगों का कहना है कि सीमेंट और बालू के मिश्रण में मानकों की अनदेखी की गई। जिलाधिकारी ने बताया कि जमीन का कॉम्पैक्शन सही से नहीं होने के कारण सेंट्रिंग गिर गई। विभाग की ओर से उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी गई है। ढलाई के दौरान ढांचा कैसे ढहा, क्या दिखा मौके पर
गोपालगंज के सिधवलिया प्रखंड के गंगवा गांव में घोघरी नदी पर बन रहे लगभग 29 मीटर लंबे आरसीसी पुल की ढलाई जारी थी। निर्माण स्थल पर स्लैब डालने का काम चल रहा था और मजदूर निर्धारित ढांचे पर कंक्रीट बिछा रहे थे। इसी बीच अचानक तेज आवाज गूंजी और कुछ ही पलों में सेंट्रिंग के सहारे खड़ा ढांचा भरभराकर नीचे आ गिरा। आसपास मौजूद लोगों के मुताबिक, आवाज इतनी तेज थी कि पास के घरों तक कंपन महसूस हुआ। हादसे के तुरंत बाद काम बंद कर दिया गया और मौके पर अफरातफरी मच गई। हालांकि राहत की बात यह रही कि कोई मजदूर इसकी चपेट में नहीं आया। कुछ ही देर में बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर जुट गए। गिरा हुआ कंक्रीट, मुड़े हुए सरिया और टूटी सेंट्रिंग की लकड़ियां पूरे क्षेत्र में बिखरी दिखीं। स्थानीय लोग निर्माण की निगरानी को लेकर सवाल उठाते नजर आए। विभागीय टीम ने स्थल का मुआयना शुरू किया और क्षति का आकलन करने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई। फिलहाल पूरे प्रोजेक्ट पर रोक लगाकर तकनीकी कारणों की जांच की जा रही है। गुणवत्ता पर उठे सवाल, ग्रामीण बोले- इंजीनियर पर कार्रवाई हो
पुल गिरने के बाद ग्रामीणों ने निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े किए। उनका आरोप है कि सीमेंट और बालू के मिश्रण में तय मानकों का पालन नहीं किया गया। कुछ ग्रामीणों का कहना है कि स्लैब की मोटाई और कंक्रीट की मजबूती अपेक्षित स्तर की नहीं थी। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि पुल में इस्तेमाल किए गए सरिया की मोटाई और गुणवत्ता मानक के अनुरूप नहीं थी, जिससे ढांचा ढलाई का भार नहीं झेल सका। ग्रामीणों ने सेंट्रिंग और सपोर्ट सिस्टम को भी हादसे की बड़ी वजह बताया। उनका दावा है कि सहारा देने वाली संरचना पर्याप्त मजबूत नहीं थी। घटना के बाद लोगों ने उच्च स्तरीय जांच और जिम्मेदार ठेकेदार व संबंधित इंजीनियरों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। डीएम ने क्या-क्या कहा, पढ़िए..
गोपालगंज के जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा ने कहा, “इस पुल निर्माण का संवेदक बापूधाम कंस्ट्रक्शन है। इसके जिम्मेदार बबलू कुमार हैं। घटना के बाद मैंने खुद पूरे मामले की मॉनिटरिंग शुरू कर दी है। मैं जब साइट पर पहुंचा तो वहां एई, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, विभागीय विशेषज्ञ और मुजफ्फरपुर डिवीजन के चीफ इंजीनियर सुमित समेत कई अधिकारी मौजूद थे। हमने मौके पर ग्रामीणों से भी विस्तार से बातचीत की।” जेई निर्माण स्थल से गायब रहते थे
डीएम ने कहा, “ग्रामीणों से पूछताछ में पता चला कि जेई दिलीप तिवारी और एई ज्योति मधेशिया कई बार अपने कार्यस्थल से अनुपस्थित पाए गए थे। वे नियमित रूप से साइट पर नहीं जाते थे। कार्यपालक अभियंता की उपस्थिति भी नगण्य थी। यह गंभीर लापरवाही है।” कॉम्पैक्शन सही तरीके से नहीं हुआ था
डीएम ने कहा, “प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई कि जमीन का कॉम्पैक्शन सही तरीके से नहीं हुआ था। इसी कारण सेंट्रिंग गिर गई और यह घटना हुई।” डीएम ने आगे बताया, “जब हमने तकनीकी विशेषज्ञों से बात की तो उन्होंने कहा कि केवल कॉम्पैक्शन वजह नहीं हो सकता। सेंट्रिंग में जो आयरन बॉस लगाए गए थे, उनमें जंग लगा हुआ था। उनकी क्षमता इतनी नहीं थी कि वे ढलाई का वजन संभाल सकें।” उन्होंने कहा, “मैंने आज ही आरडब्ल्यूडी के सचिव को संबंधित तीनों अधिकारियों के निलंबन और प्राथमिकी दर्ज करने की अनुशंसा कर दी है। इस संबंध में आदेश की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।” संवेदक को ब्लैक लिस्ट में डालने की सिफारिश
डीएम ने कहा, “पूछताछ में पता चला कि संवेदक बीमार हैं, लेकिन उनकी ओर से साइट पर कोई प्रतिनिधि भी मौजूद नहीं था। यह अपने आप में गंभीर मामला है। इसलिए संवेदक को भी काली सूची में डालने की अनुशंसा की गई है। पूरी रिपोर्ट विभाग को भेज दी गई है। उच्च स्तरीय जांच होगी। विशेषज्ञों ने सीमेंट और आयरन सेंट्रिंग के नमूने लिए हैं। दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”


