ASP, SSP, DGP पर दर्ज हो केस…, NEET छात्रा केस में वकील ने कोर्ट से की मांग; CBI को बताया ‘पिंजरे वाला तोता’

ASP, SSP, DGP पर दर्ज हो केस…, NEET छात्रा केस में वकील ने कोर्ट से की मांग; CBI को बताया ‘पिंजरे वाला तोता’

कोर्ट ने NEET छात्रा रेप और मौत मामले में शंभू गर्ल्स हॉस्टल बिल्डिंग के मालिक मनीष रंजन को बेल देने से मना कर दिया। पीड़ित पक्ष ने सीधे तौर पर बिहार पुलिस के सीनियर अधिकारियों को टारगेट किया। 

NEET Student Rape-Death Case: बिहार की राजधानी को हिला देने वाले NEET छात्रा रेप और मौत केस के मुख्य आरोपी और शंभू गर्ल्स हॉस्टल बिल्डिंग के मालिक मनीष रंजन को एक बार फिर से कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली। पटना की कोर्ट में सोमवार को मनीष रंजन की बेल पिटीशन पर करीब सवा दो घंटे तक हाई-वोल्टेज सुनवाई चली। पीड़ित परिवार के वकील और CBI वकील के बीच तीखी बहस हुई, जिससे जांच की दिशा पर गंभीर सवाल उठे। दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 11 मार्च तय की। तब तक मनीष रंजन बेउर जेल में रहेंगे, जहां वह पिछले 46 दिनों से ज्यूडिशियल कस्टडी में हैं।

वकील ने कहा- सीनियर अधिकारियों ने सबूत नष्ट किए

सुनवाई के दौरान, पीड़िता के वकील एसके पांडे ने CBI और पटना पुलिस की नीयत पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने एक बार CBI को पिंजरे का तोता कहा था, लेकिन इस केस की जांच को देखकर लगता है कि एजेंसी पूरी तरह से मनीष रंजन की जेब में है। CBI ने जानबूझकर POCSO एक्ट की धाराओं को हटा दिया और अलग से FIR दर्ज की।”

एसके पांडे ने आगे कहा कि CBI अधिकारियों की अपनी बेटियां उनसे पूछ रही होंगी कि क्या इस पीड़िता को न्याय मिलेगा। उन्होंने कोर्ट से मांग की कि तत्कालीन थानेदार रौशनी, एएसपी (ASP), एसएसपी (SSP) और डीजीपी (DGP) तक पर सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने के आरोप में मुकदमा दर्ज होना चाहिए।

CBI ने कहा- हमें मनीष रंजन की जरूरत नहीं है

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सीधे CBI से पूछा कि क्या जांच में मनीष रंजन की जरूरत है? अब तक उसके खिलाफ क्या ठोस सबूत इकट्ठा हुए हैं? जवाब में CBI ने कोर्ट को लिखकर बताया कि अब उन्हें जांच के लिए मनीष रंजन की जरूरत नहीं है। इससे पहले, शनिवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने CBI को कड़ी फटकार लगाते हुए पूछा था कि जब मामला हत्या की कोशिश (धारा 307) का था, तो उन्होंने POCSO एक्ट क्यों नहीं लगाया।

सुनवाई के दौरान CBI के वकील और पीड़ित परिवार के वकील के बीच तीखी बहस हुई। CBI ने इस बात पर एतराज जताया कि बेल की सुनवाई के दौरान एजेंसी की जांच पर सवाल नहीं उठाया जा सकता।

थाना इंचार्ज और SIT के बयानों में अंतर

कोर्ट ने जांच शुरू करने वाली तत्कालीन चित्रगुप्त नगर थाना इंचार्ज रोशनी कुमारी से भी पूछताछ की। कोर्ट ने सवाल किया कि छात्रा का मोबाइल फोन और हॉस्टल का DVR जब्त होने के 24 घंटे के अंदर कोर्ट में पेश क्यों नहीं किया गया और उनकी FSL टेस्टिंग क्यों नहीं कराई गई। रोशनी कुमारी ने दावा किया कि उन्होंने 17 जनवरी को सारा सामान SIT को सौंप दिया था। इस बीच, मौके पर मौजूद SIT अधिकारियों ने कहा कि उन्हें 24 जनवरी को सामान मिला था। बयानों में सात दिन का यह अंतर सबूतों से छेड़छाड़ का शक और बढ़ाता है।

महिला हॉस्पिटल स्टाफ का खुलासा

इस बीच, CBI की एक टीम ने प्रभात हॉस्पिटल में महिला स्टाफ से पांच घंटे तक पूछताछ की। स्टाफ ने बताया कि जब छात्रा को हॉस्पिटल लाया गया था, तो वह बेहोश थी और उसके शरीर पर खरोंच के निशान थे। हॉस्पिटल ने मौत का कारण ड्रग ओवरडोज बताया, लेकिन स्टाफ का कहना है कि हॉस्पिटल में ऐसी बातें हो रही थीं कि छात्रा के साथ घिनौना काम किया गया था।

मनीष रंजन 46 दिनों से जेल में

मनीष रंजन 14 जनवरी से पटना की बेउर जेल में बंद है। 12 फरवरी को केस अपने हाथ में लेने के बाद CBI ने अपनी जांच तेज कर दी थी, लेकिन POCSO कोर्ट पहले ही जांच में लापरवाही को लेकर सख्त टिप्पणी कर चुका था। पीड़ित परिवार का आरोप है कि मनीष रंजन पूरी साज़िश का मास्टरमाइंड है और उसे किसी भी कीमत पर ज़मानत नहीं मिलनी चाहिए।

  

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