नवादा जनता दल यूनाइटेड (JDU) में जिला अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर तनाव चरम पर पहुंच गया है। गुटबाजी के कारण चुनाव रद्द कर दिया गया है। वर्तमान जिला अध्यक्ष के खिलाफ पार्टी के पुराने और सक्रिय कार्यकर्ताओं में जबरदस्त असंतोष है, जिसके चलते 15 कार्यकर्ताओं ने उनके खिलाफ नामांकन पत्र दाखिल किया था। अब इस मामले में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के फैसले का इंतजार है। अध्यक्ष पुराने कार्यकर्ताओं से उचित व्यवहार नहीं करते यह स्थिति जदयू के संगठनात्मक चुनावों में अब तक का सबसे बड़ा विद्रोह मानी जा रही है। नामांकन दाखिल करने वाले प्रत्याशियों ने पत्रकारों से बातचीत में वर्तमान अध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि अध्यक्ष पुराने कार्यकर्ताओं के साथ उचित व्यवहार नहीं करते, उन्हें नजरअंदाज कर नए लोगों को महत्वपूर्ण पद दे देते हैं। प्रत्याशियों ने यह भी आरोप लगाया कि अध्यक्ष पार्टी के हित में ठोस काम नहीं कर रहे हैं और अपनी मनमानी थोपते हैं, जिससे कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी है। यह घमासान जदयू के लिए एक चुनौती है, क्योंकि जहां नीतीश कुमार के नेतृत्व में पार्टी को राज्य स्तर पर मजबूत समर्थन मिलता है, वहीं जिला स्तर पर नेतृत्व को लेकर असंतोष कई जिलों में देखा जा रहा है। नामांकन वापस नहीं हुए तो चुनाव में कड़ा मुकाबला होगा नवादा में यह विरोध इतना व्यापक है कि पार्टी हाईकमान को इसमें हस्तक्षेप करना पड़ सकता है। यदि नामांकन वापस नहीं हुए तो चुनाव में कड़ा मुकाबला होगा, जो संगठन की एकता पर असर डाल सकता है। कार्यकर्ता पार्टी को मजबूत बनाने की बात करते हैं, लेकिन स्थानीय नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं। यह घटना बिहार की राजनीति में जिला स्तर की गुटबाजी को उजागर करती है, और सभी की निगाहें पार्टी के आगामी फैसले पर टिकी हैं। नवादा जनता दल यूनाइटेड (JDU) में जिला अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर तनाव चरम पर पहुंच गया है। गुटबाजी के कारण चुनाव रद्द कर दिया गया है। वर्तमान जिला अध्यक्ष के खिलाफ पार्टी के पुराने और सक्रिय कार्यकर्ताओं में जबरदस्त असंतोष है, जिसके चलते 15 कार्यकर्ताओं ने उनके खिलाफ नामांकन पत्र दाखिल किया था। अब इस मामले में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के फैसले का इंतजार है। अध्यक्ष पुराने कार्यकर्ताओं से उचित व्यवहार नहीं करते यह स्थिति जदयू के संगठनात्मक चुनावों में अब तक का सबसे बड़ा विद्रोह मानी जा रही है। नामांकन दाखिल करने वाले प्रत्याशियों ने पत्रकारों से बातचीत में वर्तमान अध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि अध्यक्ष पुराने कार्यकर्ताओं के साथ उचित व्यवहार नहीं करते, उन्हें नजरअंदाज कर नए लोगों को महत्वपूर्ण पद दे देते हैं। प्रत्याशियों ने यह भी आरोप लगाया कि अध्यक्ष पार्टी के हित में ठोस काम नहीं कर रहे हैं और अपनी मनमानी थोपते हैं, जिससे कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी है। यह घमासान जदयू के लिए एक चुनौती है, क्योंकि जहां नीतीश कुमार के नेतृत्व में पार्टी को राज्य स्तर पर मजबूत समर्थन मिलता है, वहीं जिला स्तर पर नेतृत्व को लेकर असंतोष कई जिलों में देखा जा रहा है। नामांकन वापस नहीं हुए तो चुनाव में कड़ा मुकाबला होगा नवादा में यह विरोध इतना व्यापक है कि पार्टी हाईकमान को इसमें हस्तक्षेप करना पड़ सकता है। यदि नामांकन वापस नहीं हुए तो चुनाव में कड़ा मुकाबला होगा, जो संगठन की एकता पर असर डाल सकता है। कार्यकर्ता पार्टी को मजबूत बनाने की बात करते हैं, लेकिन स्थानीय नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं। यह घटना बिहार की राजनीति में जिला स्तर की गुटबाजी को उजागर करती है, और सभी की निगाहें पार्टी के आगामी फैसले पर टिकी हैं।


