नो रूम ट्रेनें, फुल बसें और महंगी उड़ानें:होली पर घर वापसी चुनौती, ट्रेनों में लंबी वेटिंग, बसें हुई फुल, फ्लाइट किराया दोगुना

नो रूम ट्रेनें, फुल बसें और महंगी उड़ानें:होली पर घर वापसी चुनौती, ट्रेनों में लंबी वेटिंग, बसें हुई फुल, फ्लाइट किराया दोगुना

होली पर घर लौटने की खुशी इस बार यात्रियों के लिए भारी पड़ रही है। देश के विभिन्न राज्यों से रांची आने वाली ट्रेन, बस और फ्लाइट की सीटें पूरी तरह भर चुकी हैं। दिल्ली, मुंबई, उत्तरप्रदेश, बिहार, जम्मू और बेंगलुरु से रांची आने वाली ट्रेनों में लंबी वेटिंग लिस्ट चल रही है। कई प्रमुख ट्रेनों में ‘नो रूम’ और ‘रिग्रेट’ की स्थिति बन गई है। यात्री कंफर्म टिकट के लिए एजेंटों और तत्काल कोटे का सहारा ले रहे हैं, लेकिन वहां भी सीट मिलना मुश्किल हो गया है। दो मार्च को पटना-रांची वंदे भारत ट्रेन के चेयरकार में 39 और एक्जीक्यूटिव क्लास में 6 वेटिंग है। पटना-रांची जनशताब्दी के टू एस में 279 और चेयरकार में 46 वेटिंग चल रही है। किसी भी ट्रेन में 40 से कम वेटिंग नहीं इस्लामपुर-हटिया में स्लीपर में 49, थ्री एसी में 16 और श्री एसी में 35 वेटिंग है। पटना-हटिया पाटलीपुत्र एक्सप्रेस के स्लीपर में 16 और थ्री एसी में 2 वेटिंग है। गोरखपुर-संबलपुर में स्लीपर में 26, श्री एसी और टू एसी में 5-5 वेटिंग है। बनारस-रांची वंदे भारत के चेयरकार में 77 और 17 वेटिंग है। जबकि बनारस-विशाखापट्टनम के थर्ड एसी में 38 वेटिंग है। दिल्ली-रांची स्लीपर व इकोनॉमी में रिग्रेट, राजधानी के थ्री एसी में 67 और टू एसी में 15 वेटिंग है। झारखंड स्वर्णजयंती के स्लीपर में 102, थ्री एसी में 40 और थर्ड एसी में 48 वेटिंग है। जम्मूतवी-संबलपुर और मुंबई-हटिया में टिकट नहीं दिया जा रहा है। बिहार रूट पर बसों की सीटें फुल रांची के अलावा जमशेदपुर, गुमला, चाईबासा सहित अन्य जिलों से बिहार के छपरा, सिवान, मोतिहारी, बेतिया, मुजफ्फरपुर, आरा, बक्सर और पूर्णिया के लिए बसों में भारी भीड़ है। रविवार को बिहार जाने वाली बसों की सभी सीटें फुल रहीं। रांची से 40, जमशेदपुर से 10, पलामू से 10, गुमला से 5 और चाईबासा से 3 बसें खुल रही हैं। सभी की सीटें भरी हुई जा रही रहीं हैं। झारखंड प्रदेश बस ऑनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सच्चिदानंद सिंह के मुताबिक पहली बार रविवार को झारखंड से बिहार जाने वाली बसों की सीटें फुल हुई हैं। उम्मीद है कि तीन मार्च तक यही स्थिति रहेगी। हालांकि बिहार से वापसी में अधिकांश सीटें खाली आने की संभावना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बस किराए में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। चार हजार का हवाई टिकट 10 हजार के पार हवाई यात्रा भी आम लोगों की पहुंच से बाहर हो गई है। रांची आने वाली फ्लाइटों के किराए में दोगुने से अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सामान्य दिनों में दिल्ली-रांची का किराया 4597 रुपए के आसपास रहता है, जो अब 10550 रुपए या इससे अधिक हो गया है। मुंबई-रांची 5988 की जगह 12709 रुपए, हैदराबाद-रांची 5741 की जगह 11033 रुपए देने पड़ रहे हैं। पटना-रांची 2759 की जगह 5425 रुपए, चेन्नई-रांची 5702 की जगह 11029 रुपए और अहमदाबाद-रांची 6089 की जगह 11029 रुपए में टिकट मिल रहा है। कोलकाता-रांची का किराया 3506 से बढ़कर 7500 रुपए हो गया है। बेंगलुरु-रांची 5498 से 10954 रुपए और भुवनेश्वर-रांची 3562 से 6322 रुपए हो गया है। अंतिम समय पर टिकट बुक करने वालों को और अधिक राशि चुकानी पड़ रही है। यात्रियों की परेशानी बढ़ी, विकल्प सीमित त्योहार के नजदीक आते ही यात्रियों की परेशानी चरम पर है। लंबी वेटिंग, रिग्रेट की स्थिति, बसों में धक्का-मुक्की और फ्लाइट के महंगे किराएने घर वापसी को चुनौती बना दिया है। कंफर्म टिकट की आस में लोग एजेंटों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन राहत मिलती नहीं दिख रही। त्योहार की उमंग के बीच सफर की यह मुश्किलें यात्रियों की चिंता बढ़ा रही हैं। अभी टैक्सी ही विकल्प के रूप में दिख रहा है। होली पर घर लौटने की खुशी इस बार यात्रियों के लिए भारी पड़ रही है। देश के विभिन्न राज्यों से रांची आने वाली ट्रेन, बस और फ्लाइट की सीटें पूरी तरह भर चुकी हैं। दिल्ली, मुंबई, उत्तरप्रदेश, बिहार, जम्मू और बेंगलुरु से रांची आने वाली ट्रेनों में लंबी वेटिंग लिस्ट चल रही है। कई प्रमुख ट्रेनों में ‘नो रूम’ और ‘रिग्रेट’ की स्थिति बन गई है। यात्री कंफर्म टिकट के लिए एजेंटों और तत्काल कोटे का सहारा ले रहे हैं, लेकिन वहां भी सीट मिलना मुश्किल हो गया है। दो मार्च को पटना-रांची वंदे भारत ट्रेन के चेयरकार में 39 और एक्जीक्यूटिव क्लास में 6 वेटिंग है। पटना-रांची जनशताब्दी के टू एस में 279 और चेयरकार में 46 वेटिंग चल रही है। किसी भी ट्रेन में 40 से कम वेटिंग नहीं इस्लामपुर-हटिया में स्लीपर में 49, थ्री एसी में 16 और श्री एसी में 35 वेटिंग है। पटना-हटिया पाटलीपुत्र एक्सप्रेस के स्लीपर में 16 और थ्री एसी में 2 वेटिंग है। गोरखपुर-संबलपुर में स्लीपर में 26, श्री एसी और टू एसी में 5-5 वेटिंग है। बनारस-रांची वंदे भारत के चेयरकार में 77 और 17 वेटिंग है। जबकि बनारस-विशाखापट्टनम के थर्ड एसी में 38 वेटिंग है। दिल्ली-रांची स्लीपर व इकोनॉमी में रिग्रेट, राजधानी के थ्री एसी में 67 और टू एसी में 15 वेटिंग है। झारखंड स्वर्णजयंती के स्लीपर में 102, थ्री एसी में 40 और थर्ड एसी में 48 वेटिंग है। जम्मूतवी-संबलपुर और मुंबई-हटिया में टिकट नहीं दिया जा रहा है। बिहार रूट पर बसों की सीटें फुल रांची के अलावा जमशेदपुर, गुमला, चाईबासा सहित अन्य जिलों से बिहार के छपरा, सिवान, मोतिहारी, बेतिया, मुजफ्फरपुर, आरा, बक्सर और पूर्णिया के लिए बसों में भारी भीड़ है। रविवार को बिहार जाने वाली बसों की सभी सीटें फुल रहीं। रांची से 40, जमशेदपुर से 10, पलामू से 10, गुमला से 5 और चाईबासा से 3 बसें खुल रही हैं। सभी की सीटें भरी हुई जा रही रहीं हैं। झारखंड प्रदेश बस ऑनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सच्चिदानंद सिंह के मुताबिक पहली बार रविवार को झारखंड से बिहार जाने वाली बसों की सीटें फुल हुई हैं। उम्मीद है कि तीन मार्च तक यही स्थिति रहेगी। हालांकि बिहार से वापसी में अधिकांश सीटें खाली आने की संभावना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बस किराए में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। चार हजार का हवाई टिकट 10 हजार के पार हवाई यात्रा भी आम लोगों की पहुंच से बाहर हो गई है। रांची आने वाली फ्लाइटों के किराए में दोगुने से अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सामान्य दिनों में दिल्ली-रांची का किराया 4597 रुपए के आसपास रहता है, जो अब 10550 रुपए या इससे अधिक हो गया है। मुंबई-रांची 5988 की जगह 12709 रुपए, हैदराबाद-रांची 5741 की जगह 11033 रुपए देने पड़ रहे हैं। पटना-रांची 2759 की जगह 5425 रुपए, चेन्नई-रांची 5702 की जगह 11029 रुपए और अहमदाबाद-रांची 6089 की जगह 11029 रुपए में टिकट मिल रहा है। कोलकाता-रांची का किराया 3506 से बढ़कर 7500 रुपए हो गया है। बेंगलुरु-रांची 5498 से 10954 रुपए और भुवनेश्वर-रांची 3562 से 6322 रुपए हो गया है। अंतिम समय पर टिकट बुक करने वालों को और अधिक राशि चुकानी पड़ रही है। यात्रियों की परेशानी बढ़ी, विकल्प सीमित त्योहार के नजदीक आते ही यात्रियों की परेशानी चरम पर है। लंबी वेटिंग, रिग्रेट की स्थिति, बसों में धक्का-मुक्की और फ्लाइट के महंगे किराएने घर वापसी को चुनौती बना दिया है। कंफर्म टिकट की आस में लोग एजेंटों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन राहत मिलती नहीं दिख रही। त्योहार की उमंग के बीच सफर की यह मुश्किलें यात्रियों की चिंता बढ़ा रही हैं। अभी टैक्सी ही विकल्प के रूप में दिख रहा है।  

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