नाबालिग अपहरण मामले में दो को 9-9 साल कठोर कारावास:सुपौल पॉक्सो कोर्ट का दो साल बाद फैसला, 4 बरी; पीड़िता को 1 लाख मुआवजा

सुपौल के लौकहा थाना क्षेत्र के पॉक्सो से जुड़े नाबालिग पीड़िता के अपहरण मामले में गुरुवार को जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश षष्ठम सह विशेष न्यायाधीश पॉक्सो संतोष कुमार दुबे की अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। न्यायालय ने आरोपी अनिल कुमार (22 वर्ष), पिता दिनेश शर्मा, निवासी अमहा वार्ड संख्या 02, थाना व जिला सुपौल तथा शशि शर्मा (31 वर्ष), पिता अशोक शर्मा, निवासी पथरा वार्ड संख्या 02, थाना पिपरा, जिला सुपौल को दोषी पाते हुए कड़ी सजा सुनाई। कोर्ट ने दोनों दोषियों पर लगाया जुर्माना कोर्ट ने दोनों दोषियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 366 एवं 366(ए) के तहत 9-9 वर्ष का कठोर कारावास और 25-25 हजार रुपये जुर्माना की सजा दी। जुर्माना नहीं देने पर 6-6 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं धारा 363 के तहत 7-7 वर्ष का कठोर कारावास और 25-25 हजार रुपये जुर्माना की सजा भी सुनाई गई। अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी तथा विचारण अवधि में जेल में बिताई गई अवधि को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 428 के तहत समायोजित किया जाएगा। 12 गवाहों ने अदालत में दर्ज कराए अपने बयान गौरतलब है कि न्यायालय ने 24 फरवरी को ही दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया था। मामले की सुनवाई के दौरान कुल 12 गवाहों ने अदालत में अपना बयान दर्ज कराया। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक नीलम कुमारी ने प्रभावी पैरवी की, जबकि बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता प्रवीण मेहता ने दलीलें पेश कीं। इसी वाद में नामजद अन्य चार अभियुक्त क्रमशः अशोक शर्मा, लक्ष्मी कुमारी, ननकी देवी एवं कंचन देवी को साक्ष्य के अभाव में अदालत ने बरी कर दिया। न्यायालय ने पीड़िता को एक लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश भी पारित किया है। सुपौल के लौकहा थाना क्षेत्र के पॉक्सो से जुड़े नाबालिग पीड़िता के अपहरण मामले में गुरुवार को जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश षष्ठम सह विशेष न्यायाधीश पॉक्सो संतोष कुमार दुबे की अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। न्यायालय ने आरोपी अनिल कुमार (22 वर्ष), पिता दिनेश शर्मा, निवासी अमहा वार्ड संख्या 02, थाना व जिला सुपौल तथा शशि शर्मा (31 वर्ष), पिता अशोक शर्मा, निवासी पथरा वार्ड संख्या 02, थाना पिपरा, जिला सुपौल को दोषी पाते हुए कड़ी सजा सुनाई। कोर्ट ने दोनों दोषियों पर लगाया जुर्माना कोर्ट ने दोनों दोषियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 366 एवं 366(ए) के तहत 9-9 वर्ष का कठोर कारावास और 25-25 हजार रुपये जुर्माना की सजा दी। जुर्माना नहीं देने पर 6-6 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं धारा 363 के तहत 7-7 वर्ष का कठोर कारावास और 25-25 हजार रुपये जुर्माना की सजा भी सुनाई गई। अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी तथा विचारण अवधि में जेल में बिताई गई अवधि को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 428 के तहत समायोजित किया जाएगा। 12 गवाहों ने अदालत में दर्ज कराए अपने बयान गौरतलब है कि न्यायालय ने 24 फरवरी को ही दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया था। मामले की सुनवाई के दौरान कुल 12 गवाहों ने अदालत में अपना बयान दर्ज कराया। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक नीलम कुमारी ने प्रभावी पैरवी की, जबकि बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता प्रवीण मेहता ने दलीलें पेश कीं। इसी वाद में नामजद अन्य चार अभियुक्त क्रमशः अशोक शर्मा, लक्ष्मी कुमारी, ननकी देवी एवं कंचन देवी को साक्ष्य के अभाव में अदालत ने बरी कर दिया। न्यायालय ने पीड़िता को एक लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश भी पारित किया है।  

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