Male infertility in India : भारतीय पुरुषों में बांझपन की समस्या बड़ी है। हमारे समाज में केवल बांझपन के लिए महिला को दोषी ठहराया जाता है। जबकि, इसके लिए पुरुष भी कम जिम्मेदार नहीं हैं। National Medical Journal of India (NMJI) में प्रकाशित शोध रिपोर्ट इस बात को बताती है कि कैसे बांझपन के मामले में 50 प्रतिशत पुरुष भी जिम्मेदार हैं। एक सबसे आम और मुख्य कारण है अंडकोष में होने वाला सूजन, जिसको लेकर पुरुष ध्यान ही नहीं देते।
भारत में बांझपन की स्थिति चिंताजनक!
बांझपन का सामना कर रहे जोड़ों में लगभग 50% मामलों में पुरुष कारक (Male factors) प्रमुख रूप से जिम्मेदार पाए गए हैं। शोध के अनुसार, बांझपन की समस्या उन पुरुषों में अधिक देखी गई जिनकी औसत आयु 30-35 वर्ष के बीच थी।
स्पर्म काउंट और क्वालिटी
बड़ी संख्या में पुरुषों में कम शुक्राणु संख्या (Oligozoospermia) और शुक्राणुओं का जीरो हो जाना (Azoospermia) की समस्या देखी गई। ये सब निम्नलिखित कारणों से होता है-
पुरुषों में बांझपन के मुख्य कारण
वैरीकोसील (Varicocele)
पुरुषों में बांझपन का यह सबसे बड़ा कारण देखने को मिला। इसमें अंडकोष की नसों में सूजन आ जाती है, जिससे शुक्राणुओं के उत्पादन पर बुरा असर पड़ता है। कई बार पुरुष इस तरह की सूजन को नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि, ये आगे चलकर बांझपन की समस्या को जन्म देता है।
जीवनशैली से जुड़े कारक (Lifestyle Factors)
- तंबाकू और धूम्रपान
- शराब का सेवन
- मोटापा
गर्मी का प्रभाव : पर्यावरणीय और व्यावसायिक कारण
जो पुरुष भट्टी, वेल्डिंग या लंबे समय तक ड्राइविंग जैसे काम करते हैं, उनके अंडकोष का तापमान बढ़ने से शुक्राणु बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। इसके अलावा कीटनाशकों और औद्योगिक रसायनों के संपर्क में रहने वाले पुरुषों में बांझपन की दर अधिक देखी गई।
भारतीय पुरुषों के स्पर्म काउंट में 30-40% की गिरावट
एम्स (AIIMS) के अनुसार, पिछले 3 दशकों में भारतीय पुरुषों के स्पर्म काउंट में 30-40% की गिरावट आई है। इसके पीछे के कारण भी स्पष्ट हैं। अगर इन कारकों से पुरुष खुद को बचा नहीं पाते हैं तो बांझपन जैसी समस्या और बढ़ सकती है।


