MP में दो दिग्गज महिला नेताओं के बीच सियासी टकराव, नाम न होने पर बढ़ा विवाद

MP में दो दिग्गज महिला नेताओं के बीच सियासी टकराव, नाम न होने पर बढ़ा विवाद

MP News: मध्य प्रदेश में भाजपा की दो नेत्रियों के बीच में सियासी जंग तेज हो गई है। ये रार विधानसभा चुनाव के पहले शुरू हुई थी जो दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही है। रविवार को विधायक ने 85 करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण व भूमिपूजन कार्यक्रम रखा था जिसमें मुख्यमंत्री शामिल हुए। डिजिटल शिलालेख में राज्यसभा सदस्य ने जब अपना नाम नहीं देखा तो वह भड़क उठीं। इस पर उन्होंने संगठन से कड़ी आपत्ति भी दर्ज कराई।

नाम न होने छिड़ा सियासी टकराव

इंदौर भाजपा में इन दिनों जबरदस्त गुटबाजी सामने आ रही है। रविवार को महू गांव में विधायक उषा ठाकुर ने विकास कार्यों के लोकार्पण और भूमि पूजन का आयोजन रखा था। साथ में नानाजी देशमुख की प्रतिमा का अनावरण कार्यक्रम भी था। उस दौरान जैसे ही डिजिटल शिलालेख सामने आया वैसे ही राज्यसभा सदस्य कविता पाटीदार खुद को अपमानित महसूस कर रही थी। उस पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव, केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर और विधायक उषा ठाकुर का प्रमुख रूप से नाम था। गृह क्षेत्र होने के बावजूद नाम नहीं होने पर उन्होंने सत्ता और संगठन से नाराजगी भी जाहिर की और अपमान बताया।

गौरतलब है कि, दोनों नेत्रियों के बीच में विधानसभा चुनाव के पहले से खींचतान चल रही है। विधायक ठाकुर को टिकट दिए जाने का महू भाजपा का एक धड़ा विरोध कर रहा था जो कहीं ना कहीं पाटीदार से जुड़ा हुआ था। बाद में जब टिकट हो गया तो खुलकर उन नेताओं ने चुनाव में बगावत की। ठाकुर का मानना है कि पर्दे के पीछे पाटीदार की भूमिका थी जिसके चलते चुनाव जीतने के बाद दूरी बना ली। दोनों अपने आयोजनों में एक-दूसरे को बुलाने या जाने में परहेज करती हैं।

बढ़ रही वर्चस्व की लड़ाई

कविता पाटीदार को अपने पिता भेरूलाल पाटीदार से विरासत में महू भाजपा की राजनीति मिली, जिसे वे कायम रखना चाहती हैं। इधर, विधायक ठाकुर भी अपनी पकड़ मजबूत रखे हुए हैं। इसके चलते मंडल व जिला पदाधिकारियों को लेकर दोनों के बीच खींचतान चली। जिले में ठाकुर ने कुंजालाल निनामा को महामंत्री बनवाया तो पाटीदार ने विजय जाट और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय कोटे में लीला संतोष पाटीदार पदाधिकारी बनीं। माना जा रहा है कि लीला भी कविता की समर्थक हैं। भाटखेड़ी में सरपंच के चुनाव में भी दोनों ने अपने-अपने प्रत्याशी उतारे थे, जिसमें अंतरसिंह दरबार ने पाटीदार के प्रत्याशी को समर्थन कर दिया था जिसकी वजह से वह जीत गया।

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