Cancer Detection Device : कैंसर के आंकड़े भारत में भी तेजी से बढ़ रहे हैं। कैंसर मरीजों की मामले में हम दुनिया भर में तीसरे स्थान पर बताए जाते हैं। ये हमारे लिए अच्छी खबर नहीं है। कैंसर लाइलाज तब हो जाता है जब ये देरी से पता चले। ऐसे में भारतीय विशेषज्ञों ने एक कमाल का यंत्र बनाया है जिससे महज कुछ सेकेंड्स में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का पता चल सकता है।
आइडिया अप्रैल फूल के अवसर पर आया
केरल के एक स्टार्टअप ‘एक्यूबिट्स इन्वेंट’ (Accubits Invent) द्वारा विकसित एक ये क्रांतिकारी उपकरण है, जिसने चिकित्सा जगत में ‘क्रांति’ ला सकता है। इसे बनाने का आइडिया अप्रैल फूल के अवसर पर आया था। 90 सेकंड में कैंसर का पता लगाने वाला ये डिवाइस वाकई कमाल का है।
90 सेकेंड में कैंसर, टीबी का पता
साल 2025 में केरल स्थित डीप-टेक स्टार्टअप ‘एक्यूबिट्स इन्वेंट’ ने एक ऐसी तकनीक का पेटेंट हासिल किया जो केवल 90 सेकंड में कैंसर, टीबी (TB) और मेटाबॉलिक विकारों का पता लगा सकती है।
सांस से कैंसर का पता
इस उपकरण का नाम VolTrac है। यह एक ‘ब्रीथ एनालाइजर’ (जैसे शराब की जांच करने वाली मशीन) की तरह काम करता है। मरीज को बस इस मशीन में फूंक मारनी होती है। इसके बाद सांस को जांच करके ये गंभीर बीमारियों के बारे में बताएगा।
कैसे काम करता है ये
यह उपकरण सांस और पसीने के माध्यम से निकलने वाले ‘वोलाटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड्स’ (VOCs) का विश्लेषण करता है। हर बीमारी शरीर में एक विशिष्ट आणविक पैटर्न (Molecular Pattern) छोड़ती है, जिसे इसके सेंसर तुरंत पहचान लेते हैं।
कितना भरोसेमंद है?
लैब परीक्षणों में VolTrac डिवाइस की सटीकता को लेकर परखा गया। जांच में ये बात सामने आई कि VolTrac द्वारा बताए गए रिजल्ट 98.5% तक सही हैं। इस आधार पर ये डिवाइस भरोसेमंद बताया जा रहा है।
ब्राजील ने भी तैयार किया कैंसर जांचने वाला “पेन”
ना केवल भारत बल्कि, ब्राजील ने भी इस तरह का यंत्र MasSpec Pen बनाया है। ये कलम (पेन) की तरह है। इससे भी 90 सेकेंड के भीतर कैंसर जांच सकते हैं। ये कई तरह के कैंसर की जांच कर सकता है। इस तरह से जर्मनी ने भी एआई वाला कैंसर डिटेक्टर बनाया है।
क्या कैंसर का जल्दी पता लगाया जा सकता है?
कैंसर जांच में लंबा समय लग जाता है। कई बार पैसे के कारण भी लोग जांच नहीं करते हैं। ऐसे में ये यंत्र सस्ते में जांंच की व्यवस्था कराने का काम करेंगे और तीव्रता से रिजल्ट देंगे। ये कैंसर मरीजों के इलाज को सही समय पर शुरू कराने में कारगर साबित हो सकते हैं।


