‘UGC कानून सवर्णों के लिए भस्मासुर, वापस नहीं हुआ तो छोड़ दूंगा पार्टी’, राजस्थान में बीजेपी नेता का बयान

‘UGC कानून सवर्णों के लिए भस्मासुर, वापस नहीं हुआ तो छोड़ दूंगा पार्टी’, राजस्थान में बीजेपी नेता का बयान

सवाई माधोपुर: केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) एक्ट के खिलाफ देशभर में सुलग रही विरोध की आग अब राजस्थान के सवाई माधोपुर तक पहुंच गई है। बुधवार को सवर्ण एकता मंच के बैनर तले आयोजित एक प्रेस वार्ता में इस कानून को सवर्ण समाज के युवाओं के भविष्य के लिए घातक बताया गया। इस विरोध की सबसे खास बात भाजपा के कद्दावर नेता और पूर्व जिलाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह भाया का अपनी ही सरकार के खिलाफ बगावती तेवर अपनाना रहा।

बजरिया स्थित गौतम आश्रम में पत्रकारों से रूबरू होते हुए वीरेंद्र सिंह भाया भावुक और आक्रोशित नजर आए। उन्होंने कहा, मैं 65 साल का हूं और जन्मजात भाजपा का सिपाही रहा हूं। इस वटवृक्ष को सींचने में मैंने अपना जीवन लगा दिया, लेकिन आज बड़े दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि हमारी अपनी ही सरकार सवर्ण बच्चों के लिए ‘भस्मासुर’ का काम कर रही है।

भाया ने दो टूक चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने इस कानून को वापस नहीं लिया, तो वे भाजपा से अपना दशकों पुराना नाता तोड़ लेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सवर्ण समाज इस अपमान और नुकसान को चुपचाप सहन नहीं करेगा।

सवर्ण युवाओं के भविष्य पर संकट

प्रेस वार्ता के दौरान सवर्ण एकता मंच के पदाधिकारियों ने UGC एक्ट की खामियों को गिनाते हुए इसे ‘काला कानून’ करार दिया। वक्ताओं ने कहा कि इस एक्ट के कारण सामान्य वर्ग के युवाओं को बिना किसी ठोस जांच के शिक्षा से वंचित किया जा सकता है, जो उनके करियर को पूरी तरह बर्बाद कर देगा। मंच ने आशंका जताई कि इस कानून से शिकायत तंत्र का दुरुपयोग बढ़ेगा, झूठे आरोपों की बाढ़ आएगी और सवर्ण युवाओं में असुरक्षा का भाव पैदा होगा।

EWS सरलीकरण और राजनीतिक आरक्षण की मांग

कार्यक्रम में मौजूद श्रीकरणी सेना के प्रदेशाध्यक्ष दिलीप सिंह खिजूरी ने भी केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने मांग की कि राजस्थान की तर्ज पर पूरे देश में EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) सर्टिफिकेट के नियमों का सरलीकरण किया जाए। साथ ही, उन्होंने आगामी पंचायत और निकाय चुनावों में भी EWS आरक्षण को सख्ती से लागू करने की वकालत की।

विरोध की चेतावनी

सवर्ण एकता मंच ने चेतावनी दी है कि जब तक UGC एक्ट वापस नहीं होता, उनका संघर्ष जारी रहेगा। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष के इस कड़े रुख ने स्थानीय राजनीति में हड़कंप मचा दिया है। उनका कहना है कि अगर सवर्ण समाज के हितों की अनदेखी हुई, तो आगामी चुनावों में भाजपा को इसका बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

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