टॉप-10 कंपनियों में 9 की वैल्यू ₹2.51 लाख करोड़ घटी:रिलायंस इंडस्ट्रीज को सबसे ज्यादा नुकसान; हिंदुस्तान यूनिलीवर की वैल्यूएशन ₹12,311 करोड़ बढ़ी

टॉप-10 कंपनियों में 9 की वैल्यू ₹2.51 लाख करोड़ घटी:रिलायंस इंडस्ट्रीज को सबसे ज्यादा नुकसान; हिंदुस्तान यूनिलीवर की वैल्यूएशन ₹12,311 करोड़ बढ़ी

पिछले हफ्ते बाजार में गिरावट से टॉप-10 सबसे वैल्यूएबल कंपनियों में से 9 की मार्केट वैल्यूएशन 2.51 लाख करोड़ रुपए घट गई। इनमें से रिलायंस इंडस्ट्रीज को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। रिलायंस इंडस्ट्रीज की वैल्यूएशन 96,960.17 करोड़ गिरकर 18.75 लाख करोड़ रह गई। बीते 5 कारोबार दिनों में BSE सेंसेक्स में 2,032.65 अंक या 2.43% गिरावट रही। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ग्लोबल टेंशन, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, रुपए की कमजोरी और कमजोर कॉर्पोरेट अर्निंग्स से बाजार में दबाव बना है। रिलायंस और ICICI बैंक में सबसे ज्यादा गिरावट रिलायंस इंडस्ट्रीज की वैल्यूएशन 96,960 कम हुई। ICICI बैंक की 48,644.99 करोड़ घटी, जो 9.60 लाख करोड़ हो गई। HDFC बैंक की 22,923.02 करोड़ कम होकर 14,09 लाख करोड़ रुपए पहुंची। वहीं भारती एयरटेल की वैल्यूएशन17,533.97 करोड़ घटी, जो 11,32 लाख करोड़ रह गई। TCS की मार्केट वैल्यू 16,588.93 करोड़ कम होकर 11.43 लाख करोड़ हुई। LT की 15,248.32 करोड़ गिरकर 5.15 लाख करोड़ पहुंची। बजाज फाइनेंस की 14,093.93 करोड़ घटी, जो 5.77 लाख करोड़ रह गई। SBI की वैल्यूएशन 11,907.5 करोड़ कम होकर 9.50 लाख करोड़ हुई। इंफोसिस की 7,810.77 करोड़ गिरकर 6.94 लाख करोड़ पहुंची। हिंदुस्तान यूनिलीवर की वैल्यूएशन 12,311.86 करोड़ बढ़कर 5.66 लाख करोड़ हो गई।
मार्केट कैपिटलाइजेशन क्या होता है? मार्केट कैप किसी भी कंपनी के टोटल आउटस्टैंडिंग शेयरों यानी वे सभी शेयर जो फिलहाल उसके शेयरहोल्डर्स के पास हैं, उनकी वैल्यू है। इसका कैलकुलेशन कंपनी के जारी शेयरों की कुल संख्या को उनकी कीमत से गुणा करके किया जाता है। इसे एक उदाहरण से समझें… मान लीजिए… कंपनी ‘A’ के 1 करोड़ शेयर मार्केट में लोगों ने खरीद रखे हैं। अगर एक शेयर की कीमत 20 रुपए है, तो कंपनी की मार्केट वैल्यू 1 करोड़ x 20 यानी 20 करोड़ रुपए होगी। कंपनियों की मार्केट वैल्यू शेयर की कीमतों के बढ़ने या घटने के चलते बढ़ता-घटता है। इसके और कई कारण हैं… मार्केट कैप के उतार-चढ़ाव का कंपनी और निवेशकों पर क्या प्रभाव पड़ता है? कंपनी पर असर : बड़ा मार्केट कैप कंपनी को मार्केट से फंड जुटाने, लोन लेने या अन्य कंपनी एक्वायर करने में मदद करता है। वहीं, छोटे या कम मार्केट कैप से कंपनी की फाइनेंशियल डिसीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है। निवेशकों पर असर : मार्केट कैप बढ़ने से निवेशकों को डायरेक्ट फायदा होता है। क्योंकि उनके शेयरों की कीमत बढ़ जाती है। वही, गिरावट से नुकसान हो सकता है, जिससे निवेशक शेयर बेचने का फैसला ले सकते हैं। उदाहरण: अगर TCS का मार्केट कैप ₹12.43 लाख करोड़ से बढ़ता है, तो निवेशकों की संपत्ति बढ़ेगी, और कंपनी को भविष्य में निवेश के लिए ज्यादा पूंजी मिल सकती है। लेकिन अगर मार्केट कैप गिरता है तो इसका नुकसान हो सकता है।

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