शहर में साफ हवा की मॉनिटरिंग की भी पोल खुलने लगी है। मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीपीसीबी) ने नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत नगर निगम के चार वायु प्रदूषण मापन केंद्रों की लोकेशन पर सवाल उठाए हैं। इनके डाटा को ऑनलाइन पोर्टल से हटाते हुए उपयोग पर भी रोक लगा दी है। रिपोर्ट में लिखा है कि इन केंद्रों से भ्रामक और नीतिगत निर्णयों को प्रभावित करने वाला डाटा जनरेट हो रहा है। वायु प्रदूषण मापन केंद्रों की जगह तुरंत बदली जाए। पोर्टल पर पिछले आठ दिनों 8 में से 7 केंद्र बंद दिख रहे हैं। इनमें से चार नगर निगम के हैं। शहर में 2019-20 से इन केंद्रों पर मापन चल रहा है। केंद्र के सामने हमारी वायु गुणवत्ता अच्छे मानक पर खरी उतरी और शहर को सबसे प्रदूषित शहर की श्रेणी से राहत भी दी गई। सीएस की समीक्षा के लिए तैयार नोट में भी इंदौर की आबोहवा बेहतर है। हालांकि इस संबंध में क्षेत्रीय प्रदूषण बोर्ड और निगम अफसर सीधे तौर पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं, लेकिन पत्र जारी होने के बाद 7 जनवरी से सभी चार केंद्रों का डाटा ऑनलाइन नहीं दिखाई दे रहा है। आंकड़ों के मुताबिक बीते सप्ताह एक्यूआई 120 से 220 तक दर्ज किया जा रहा है।
ये सिफारिशें की गईं
– उपकरण वैज्ञानिक और गाइडलाइन से लगाएं।
– डाटा डिस्प्ले नहीं करें, विश्लेषण उपयोग नहीं करें।
– वेंडरों की कमियां सुधारें।
– केलिब्रेशन, वेलिडेशन के लिए नगर निगम कुशल अधिकारी नियुक्त करें।
– केंद्रों की नियमित जांच करवाएं। रिपोर्ट में यह कमियां बताईं चार केंद्रों पर मिली बड़ी गड़बड़ी दिसंबर 2025 में प्रदूषण बोर्ड के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रेमचंद उछारिया के नेतृत्व में एक टीम इंदौर आई थी और मापन कार्यों की जांच की। पोर्टल और डाटा की जांच करने के बाद एयरपोर्ट, रीजनल पार्क, रेसीडेंसी और मेघदूत पार्क के केंद्रों का निरीक्षण किया गया। इनमें गंभीर अनियमितताएं मिली हैं।


