‘मेरे मम्मी-पापा को 10 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट किया। मैंने फोन को एयरोप्लेन मोड पर कर दिया, जिसके बाद पापा-मम्मी प्रेमनगर थाने गए। मैंने पापा से कहा ये लोग फ्रॉड लग रहे हैं। मैं साइबर हेल्पलाइन पर फोन कर देता हूं, लेकिन मेरे पापा बहुत घबरा गए थे। उन्होंने फोन करने से मना कर दिया। उन्होंने फोन पर अरेस्ट वारंट भेजा, उससे हम सभी लोग दहशत में आ गए। वो हर काम वीडियो कॉल पर करवा रहे थे। रात को सोने के टाइम भी वीडियो ऑन करवा रखी थी। रात 12 बजे के बाद मैंने पापा का फोन एयरोप्लेन मोड पर कर दिया। जिसकी वजह से मेरे पापा के अकाउंट में जो 6 लाख रुपए थे वो बच गए।” ये कहना है 8वीं क्लास में पढ़ने वाले एक बच्चे का, जिसने समझदारी से अपने मां-बाप को ठगी का शिकार होने से बचा लिया।’ आतंकवादी घटना और घोटाले का डर दिखाकर दंपति को किया डिजिटल अरेस्ट बरेली के प्रेमनगर थाना क्षेत्र के सुरखा बानखाना में रहने वाले संजय सक्सेना व्यापारी हैं। उनकी बेकरी की शॉप है। जबकि उनकी पत्नी रोशी सक्सेना प्राइवेट स्कूल में टीचर हैं। संजय सक्सेना के मोबाइल पर सोमवार दोपहर 3 बजे एक अनजान नंबर से कॉल आई। ट्रूकॉलर पर उसका नाम लितेश कुमार दिखा रहा था, जिसके बाद उसने कहा कि आपका मोबाइल नंबर आतंकवादी घटना में इस्तेमाल हुआ है। इसके साथ ही 3 करोड़ के घोटाले में भी आपका नाम आया है। और इस तरह की बातें करके संजय सक्सेना और उनकी पत्नी रोशी सक्सेना को डिजिटल अरेस्ट कर लिया गया। करीब 10 घंटे तक उन्हें डिजिटल अरेस्ट रखा गया। इस दौरान साइबर ठगों ने उनसे सभी बैंक अकाउंट की डिटेल भी ले ली। उनके अकाउंट से पैसा गायब होने वाला ही था कि उससे पहले ही संजय के 8वीं क्लास में पढ़ने वाले तन्मय ने बड़ी होशियारी दिखाई और मोबाइल को एयरोप्लेन मोड पर लगा दिया। जिसके बाद मंगलवार की सुबह पूरा परिवार प्रेमनगर थाने पहुंचा। इंस्पेक्टर ने लगाई कड़ी फटकार थाने में जैसे ही मोबाइल को संजय सक्सेना ने ऑन किया तो फिर से साइबर ठग की वीडियो कॉल आ गई। इस बार कॉल प्रेमनगर थाने में इंस्पेक्टर सुरेंद्र सिंह ने उठाई और साइबर ठग की जमकर फटकार लगाई। पुलिस ने उस नंबर को ब्लॉक करवा दिया और साइबर ठग के खिलाफ मुकदमा भी लिखवा दिया। संजय सक्सेना के सभी अकाउंट भी फ्रीज करवा दिए, ताकि साइबर ठग उससे पैसे न निकाल सकें। यूनिफॉर्म पहनकर डरा रहे थे ठग, खुद को एनआईए का अफसर बताया अब जानें पूरी बात विस्तार से, 8वीं के छात्र तन्मय की जुबानी सुनिए पूरा घटनाक्रम- “दोपहर 3 बजे जब कॉल आई, तो उधर से मेरी मम्मा का नाम लिया, जिस पर मैंने अपने पापा को मोबाइल दे दिया। उधर से एक व्यक्ति जो पुलिस की यूनिफॉर्म पहने हुए था और उसकी बड़ी-बड़ी दाढ़ी थी। पीछे बड़ा-बड़ा ‘NIA’ लिखा हुआ था। वीडियो में दिख रहे व्यक्ति ने मेरे पापा से कहा कि तुम्हारा नंबर आतंकवादी घटना में इस्तेमाल हुआ है। इसके अलावा दिल्ली में करोड़ों का घोटाला हुआ है, उसमें भी तुम्हारा नाम है। मेरे पापा और मम्मी उसकी बातें सुनकर दहशत में आ गए।” अरेस्ट वारंट का झांसा देकर परिवार को दहशत में डाला इतना ही नहीं, उन लोगों ने पापा-मम्मी के नाम से अरेस्ट वारंट भी भेजा जिससे हम सभी लोग बहुत घबरा गए। लेकिन मुझे उनकी गतिविधियों पर शक हुआ, तो मैंने पापा से कहा कि ये लोग फ्रॉड हैं। मैं साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल कर देता हूं। लेकिन पापा ने कॉल करने से मना कर दिया। वीडियो कॉल पर रखी गई निगरानी 10 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट- “दोपहर 3 बजे से ही वो लोग हमारे पूरे परिवार पर वीडियो कॉल से नजर बनाए हुए थे। हमसे कहा गया कि घर से बाहर नहीं जाना है। इस दौरान मम्मी जब खाना बना रही थीं तो वो भी वीडियो कॉल के सामने ही। उसके बाद हम सभी ने खाना भी वीडियो कॉल पर ही खाया। जब सोने का समय हुआ तो ये कहा गया तीनों लोग एक साथ वीडियो ऑन करके सो जाओ। अगर कोई होशियारी की तो मिलिट्री पुलिस तुम्हें गिरफ्तार कर ले जाएगी। रात 1 बजे मैंने पापा का मोबाइल एयरोप्लेन मोड पर लगा दिया।” बेटे की चतुराई से सुरक्षित रहे बैंक खाते के 6 लाख रुपए संजय सक्सेना बोले बेटे की वजह से रुपए बचे- संजय सक्सेना ने बताया कि बेटे ने उनकी वीडियो भी रिकॉर्ड की और वॉयस रिकॉर्डिंग भी की। हम लोग तो बहुत दहशत में आ गए थे। मेरे अकाउंट में 6 लाख रुपए थे वो बच गए। हमने प्रेमनगर थाने में मामला दर्ज करवा दिया है। स्कूल की छुट्टी तक के लिए ठगों ने लिखवाई एप्लीकेशन संजय सक्सेना की पत्नी रोशी सक्सेना ने बताया कि मैंने कहा कि मुझे सुबह स्कूल पढ़ाने जाना है। तो साइबर ठग ने कहा कि कल की छुट्टी ले लो और एप्लीकेशन लिख दो। जिसके बाद जो एप्लीकेशन रोशी ने लिखी उसे साइबर ठग ने देखा। साइबर ठगों को लगा कि कहीं कोई होशियारी तो रोशी ने नहीं की है। एसएसपी अनुराग आर्य ने जनता से की सतर्क रहने की अपील एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती है। कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर पूछताछ या अरेस्ट करने का डर नहीं दिखाती। संजय सक्सेना के मामले में उनके बेटे ने बहुत ही साहस और समझदारी का परिचय दिया है। साइबर अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। आम जनता से अपील है कि ऐसे कॉल्स आने पर घबराएं नहीं और तुरंत पुलिस को सूचना दें। साइबर ठगी से बचने के लिए इन 10 बातों का रखें खास ख्याल
1. डिजिटल अरेस्ट शब्द से न डरें: कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम की कोई व्यवस्था नहीं है। पुलिस या एजेंसी कभी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती।
2. अनजान वीडियो कॉल न उठाएं: व्हाट्सएप या अन्य ऐप पर अनजान नंबर से आने वाली वीडियो कॉल उठाने से बचें।
3. एजेंसी के नाम पर दबाव: यदि कोई खुद को CBI, ED, NIA या पुलिस बताकर डराए, तो समझ लें कि यह ठगी की कोशिश है।
4. पैसे की मांग: कोई भी सरकारी अधिकारी आपसे केस रफा-दफा करने के लिए ऑनलाइन पैसे या बैंक डिटेल नहीं मांगता।
5. एरोप्लेन मोड का इस्तेमाल: शक होने पर तुरंत इंटरनेट बंद करें या फोन एरोप्लेन मोड पर डाल दें ताकि ठगों का संपर्क टूट जाए।
6. तुरंत हेल्पलाइन पर कॉल करें: किसी भी साइबर संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन नंबर पर दें।
7. डिटेल शेयर न करें: अपने बैंक अकाउंट, ओटीपी, आधार कार्ड या पर्सनल फोटो किसी भी अनजान व्यक्ति को न भेजें।
8. वर्दी देखकर भरोसा न करें: ठग आजकल पुलिस यूनिफॉर्म और सरकारी लोगो का इस्तेमाल कर वीडियो कॉल करते हैं, इन पर भरोसा न करें।
9. परिजनों को बताएं: अगर कोई आपको डराकर चुप रहने को कहे, तो तुरंत अपने परिवार या भरोसेमंद दोस्तों को इसकी जानकारी दें।
10. नजदीकी थाने जाएं: डरने के बजाय सीधे नजदीकी पुलिस स्टेशन जाकर शिकायत दर्ज कराएं, पुलिस आपकी मदद के लिए है।


