‘85% छात्र फेल, प्रैक्टिकल में मिले सिर्फ 15 नंबर’:नर्सिंग स्टूडेंट्स का हंगामा, कॉलेज में तोड़फोड़; अवैध वसूली का लगाया आरोप, 3 थानों की पुलिस पहुंची

‘85% छात्र फेल, प्रैक्टिकल में मिले सिर्फ 15 नंबर’:नर्सिंग स्टूडेंट्स का हंगामा, कॉलेज में तोड़फोड़; अवैध वसूली का लगाया आरोप, 3 थानों की पुलिस पहुंची

नालंदा जिले के भागन बीघा स्थित गौतम इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल कॉलेज में शनिवार को लगातार चौथे दिन छात्रों का भारी आक्रोश देखने को मिला। एग्जाम रिजल्ट में व्यापक गड़बड़ी, पढ़ाई न होने और अवैध रूप से मोटी फीस वसूलने के गंभीर आरोपों को लेकर नर्सिंग और फिजियोथेरेपी के सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने कॉलेज परिसर में जमकर बवाल काटा। कॉलेज भवन में भारी तोड़फोड़ की गई। जिससे सीसीटीवी कैमरे, बेंच, डेस्क, टीवी, प्रिंटर और अन्य कई कीमती सामान तहस-नहस हो गए। स्थिति को बेकाबू होता देख भागन बीघा, बेना और रहुई थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। इसके साथ ही, रहुई प्रखंड के बीडीओ और अंचलाधिकारी राजकमल भी पहुंचे। आक्रोशित छात्रों से समझा-बुझाकर शांत कराया। छात्रों का एक प्रतिनिधिमंडल अपनी शिकायतों को लेकर जिलाधिकारी उदिता सिंह से मिलने गया है। फिलहाल कॉलेज में स्थिति सामान्य लेकिन तनावपूर्ण है। सुरक्षा के मद्देनजर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। प्रबंधन ने अगले आदेश तक कॉलेज में छुट्टी घोषित कर दी है, जिसके चलते कोई भी वरिष्ठ पदाधिकारी या शिक्षक परिसर में मौजूद नहीं हैं। 80-80 हजार रुपए की उगाही का आरोप बीएससी नर्सिंग (2024-28 बैच) के छात्र ऋषिकेश पटेल ने बताया कि हाल ही में आए फर्स्ट सेमेस्टर के रिजल्ट में भारी धांधली हुई है। 85% छात्रों को फेल कर दिया गया है। कॉलेज ने परीक्षा और प्रैक्टिकल ‘मैनेज’ करने के नाम पर 80-80 हजार रुपए की अवैध वसूली की। इसके बावजूद प्रैक्टिकल में 50 में से मात्र 15 नंबर दिए गए। क्लिनिकल ड्यूटी के नाम पर भी पैसे वसूले गए। छात्र विक्की यादव और ऋषिकेश ने यह भी आरोप लगाया कि कॉलेज के शिक्षक पढ़ाने के बजाय रील्स बनाने में व्यस्त रहते हैं। छात्रों का कहना है कि जब वे अपनी समस्याओं को लेकर कॉलेज प्रबंधन से मिलने आए, तो सभी कार्यालयों में ताले लटके हुए थे और कोई भी पदाधिकारी जवाब देने के लिए मौजूद नहीं था। इस कॉलेज का प्रबंधन पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है। बार-बार फेल करने और ‘मैनेज’ के नाम पर उगाही का आरोप बीएससी नर्सिंग (2023-27 बैच) के थर्ड ईयर के छात्र बिट्टू कुमार ने कॉलेज प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि अब तक मेरे पांच सेमेस्टर हो चुके हैं, लेकिन आज तक मेरा एक भी रिजल्ट सही से नहीं आया है। मुझे बार-बार फेल किया जाता है। दोबारा परीक्षा देने पर भी वही परिणाम होता है। एडमिशन के समय यह आश्वासन दिया गया था कि साढ़े आठ लाख रुपए दो, आराम से डिग्री मिल जाएगी। यहां तक कि परीक्षा को ‘मैनेज’ करने के नाम पर अलग से 50,000 रुपए भी लिए गए। हमें जान-बूझकर फेल किया जा रहा है। ‘न टीचर हैं, न पढ़ाई होती है, बस पैसे मांगे जाते हैं’ छात्रों का गुस्सा कॉलेज के पूरे शैक्षणिक और प्रशासनिक ढांचे पर फूट पड़ा। फिजियोथेरेपी फर्स्ट ईयर के छात्र विवेक कुमार ने अपनी कहा कि हमारा सत्र पहले ही दो साल पीछे चल रहा है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि यहां ढंग से पढ़ाने वाले टीचर ही नहीं हैं। एक साल में तीन बार टीचर बदल चुके हैं। पांच विषयों को पढ़ाने के लिए सिर्फ तीन शिक्षक हैं और दो साल में एक भी विषय ठीक से पूरा नहीं हुआ है। कॉलेज में कोई प्रैक्टिकल नहीं होता। बस यह कहकर एडमिशन ले लिया जाता है कि पैसे दो और डिग्री मिल जाएगी। जब पढ़ाई ही नहीं हुई है, तो परीक्षा में क्या लिखेंगे? एक विषय तो ऐसा था जिसका नाम हमने पहली बार परीक्षा केंद्र पर जाकर सुना। री-एग्जामिनेशन फीस माफ करने पर बनी सहमति लगातार चौथे दिन चल रहे इस हंगामे और तोड़फोड़ के बाद स्थानीय प्रशासन ने मामले में हस्तक्षेप किया। रहुई सीओ राजकमल ने बताया कि छात्रों की मांगों को पिछले दो दिनों से लगातार इंस्टीट्यूट प्रबंधन तक पहुंचाया जा रहा था। लंबी बातचीत के बाद इंस्टीट्यूट इस बात पर सहमत हो गया है कि जो भी बच्चे फेल हुए हैं, उन्हें दोबारा परीक्षा देनी होगी। इसके लिए कॉलेज उनसे कोई अतिरिक्त फीस नहीं लेगा। सीओ ने आगे बताया कि इस समझौते पर छात्र भी तैयार हो गए हैं और उन्होंने आश्वासन दिया है कि अब किसी प्रकार का हंगामा या तोड़फोड़ नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में कोई भी छात्र या प्रबंधन का व्यक्ति किसी गैर-कानूनी गतिविधि या उपद्रव में संलिप्त पाया गया, तो पुलिस सख्त कार्रवाई करेगी। एफआईआर भी दर्ज की जाएगी। फिलहाल, प्रशासन का मुख्य उद्देश्य स्थिति को सामान्य बनाए रखना है ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहे। नालंदा जिले के भागन बीघा स्थित गौतम इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल कॉलेज में शनिवार को लगातार चौथे दिन छात्रों का भारी आक्रोश देखने को मिला। एग्जाम रिजल्ट में व्यापक गड़बड़ी, पढ़ाई न होने और अवैध रूप से मोटी फीस वसूलने के गंभीर आरोपों को लेकर नर्सिंग और फिजियोथेरेपी के सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने कॉलेज परिसर में जमकर बवाल काटा। कॉलेज भवन में भारी तोड़फोड़ की गई। जिससे सीसीटीवी कैमरे, बेंच, डेस्क, टीवी, प्रिंटर और अन्य कई कीमती सामान तहस-नहस हो गए। स्थिति को बेकाबू होता देख भागन बीघा, बेना और रहुई थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। इसके साथ ही, रहुई प्रखंड के बीडीओ और अंचलाधिकारी राजकमल भी पहुंचे। आक्रोशित छात्रों से समझा-बुझाकर शांत कराया। छात्रों का एक प्रतिनिधिमंडल अपनी शिकायतों को लेकर जिलाधिकारी उदिता सिंह से मिलने गया है। फिलहाल कॉलेज में स्थिति सामान्य लेकिन तनावपूर्ण है। सुरक्षा के मद्देनजर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। प्रबंधन ने अगले आदेश तक कॉलेज में छुट्टी घोषित कर दी है, जिसके चलते कोई भी वरिष्ठ पदाधिकारी या शिक्षक परिसर में मौजूद नहीं हैं। 80-80 हजार रुपए की उगाही का आरोप बीएससी नर्सिंग (2024-28 बैच) के छात्र ऋषिकेश पटेल ने बताया कि हाल ही में आए फर्स्ट सेमेस्टर के रिजल्ट में भारी धांधली हुई है। 85% छात्रों को फेल कर दिया गया है। कॉलेज ने परीक्षा और प्रैक्टिकल ‘मैनेज’ करने के नाम पर 80-80 हजार रुपए की अवैध वसूली की। इसके बावजूद प्रैक्टिकल में 50 में से मात्र 15 नंबर दिए गए। क्लिनिकल ड्यूटी के नाम पर भी पैसे वसूले गए। छात्र विक्की यादव और ऋषिकेश ने यह भी आरोप लगाया कि कॉलेज के शिक्षक पढ़ाने के बजाय रील्स बनाने में व्यस्त रहते हैं। छात्रों का कहना है कि जब वे अपनी समस्याओं को लेकर कॉलेज प्रबंधन से मिलने आए, तो सभी कार्यालयों में ताले लटके हुए थे और कोई भी पदाधिकारी जवाब देने के लिए मौजूद नहीं था। इस कॉलेज का प्रबंधन पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है। बार-बार फेल करने और ‘मैनेज’ के नाम पर उगाही का आरोप बीएससी नर्सिंग (2023-27 बैच) के थर्ड ईयर के छात्र बिट्टू कुमार ने कॉलेज प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि अब तक मेरे पांच सेमेस्टर हो चुके हैं, लेकिन आज तक मेरा एक भी रिजल्ट सही से नहीं आया है। मुझे बार-बार फेल किया जाता है। दोबारा परीक्षा देने पर भी वही परिणाम होता है। एडमिशन के समय यह आश्वासन दिया गया था कि साढ़े आठ लाख रुपए दो, आराम से डिग्री मिल जाएगी। यहां तक कि परीक्षा को ‘मैनेज’ करने के नाम पर अलग से 50,000 रुपए भी लिए गए। हमें जान-बूझकर फेल किया जा रहा है। ‘न टीचर हैं, न पढ़ाई होती है, बस पैसे मांगे जाते हैं’ छात्रों का गुस्सा कॉलेज के पूरे शैक्षणिक और प्रशासनिक ढांचे पर फूट पड़ा। फिजियोथेरेपी फर्स्ट ईयर के छात्र विवेक कुमार ने अपनी कहा कि हमारा सत्र पहले ही दो साल पीछे चल रहा है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि यहां ढंग से पढ़ाने वाले टीचर ही नहीं हैं। एक साल में तीन बार टीचर बदल चुके हैं। पांच विषयों को पढ़ाने के लिए सिर्फ तीन शिक्षक हैं और दो साल में एक भी विषय ठीक से पूरा नहीं हुआ है। कॉलेज में कोई प्रैक्टिकल नहीं होता। बस यह कहकर एडमिशन ले लिया जाता है कि पैसे दो और डिग्री मिल जाएगी। जब पढ़ाई ही नहीं हुई है, तो परीक्षा में क्या लिखेंगे? एक विषय तो ऐसा था जिसका नाम हमने पहली बार परीक्षा केंद्र पर जाकर सुना। री-एग्जामिनेशन फीस माफ करने पर बनी सहमति लगातार चौथे दिन चल रहे इस हंगामे और तोड़फोड़ के बाद स्थानीय प्रशासन ने मामले में हस्तक्षेप किया। रहुई सीओ राजकमल ने बताया कि छात्रों की मांगों को पिछले दो दिनों से लगातार इंस्टीट्यूट प्रबंधन तक पहुंचाया जा रहा था। लंबी बातचीत के बाद इंस्टीट्यूट इस बात पर सहमत हो गया है कि जो भी बच्चे फेल हुए हैं, उन्हें दोबारा परीक्षा देनी होगी। इसके लिए कॉलेज उनसे कोई अतिरिक्त फीस नहीं लेगा। सीओ ने आगे बताया कि इस समझौते पर छात्र भी तैयार हो गए हैं और उन्होंने आश्वासन दिया है कि अब किसी प्रकार का हंगामा या तोड़फोड़ नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में कोई भी छात्र या प्रबंधन का व्यक्ति किसी गैर-कानूनी गतिविधि या उपद्रव में संलिप्त पाया गया, तो पुलिस सख्त कार्रवाई करेगी। एफआईआर भी दर्ज की जाएगी। फिलहाल, प्रशासन का मुख्य उद्देश्य स्थिति को सामान्य बनाए रखना है ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहे।  

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