78 साल से पीपल के नीचे विराज रहीं मां काली

78 साल से पीपल के नीचे विराज रहीं मां काली

भास्कर न्यूज| रानीपतरा न भव्य सजावट, न तामझाम और न ही पूजा के लिए किसी पुजारी का इंतजार। फिर भी दीपावली की मध्यरात्रि होते ही महेंद्रपुर धाम के काली मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना शुरू हो जाती है। पूर्णिया पूर्व प्रखंड में बैलोरी-सोनाली सड़क किनारे स्थित इस मंदिर में करीब 78 वर्षों से मां काली के प्रति लोगों की गहरी आस्था है। मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मुराद यहां पूरी होती है। यही वजह है कि दीपावली के मौके पर पूर्णिया सहित कोसी-सीमांचल, पश्चिम बंगाल और नेपाल तक से श्रद्धालु मन्नतें पूरी होने पर चढ़ावा चढ़ाने पहुंचते हैं। महेंद्रपुर धाम का काली मंदिर विशाल पीपल के पेड़ के नीचे बने छोटे से मंदिर में स्थित है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, वर्ष 1980 के आसपास पूर्णिया पूर्व में अमीन के पद पर पदस्थापित सिवान निवासी अशोक कुमार पांडेय को मां काली ने स्वप्न दिया था। इसके बाद मंदिर का निर्माण कराया गया। परिसर में दुर्गा मंदिर का निर्माण भी हो चुका है और हाल के वर्षों में काली मंदिर के भवन का नवीनीकरण कराया गया है। मंदिर में पास के गांव की मंगनी देवी सेविका के रूप में मां की देखभाल करती हैं। श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता ही इस मंदिर की आस्था को पीढ़ी-दर-पीढ़ी मजबूत कर रही है। भास्कर न्यूज| रानीपतरा न भव्य सजावट, न तामझाम और न ही पूजा के लिए किसी पुजारी का इंतजार। फिर भी दीपावली की मध्यरात्रि होते ही महेंद्रपुर धाम के काली मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना शुरू हो जाती है। पूर्णिया पूर्व प्रखंड में बैलोरी-सोनाली सड़क किनारे स्थित इस मंदिर में करीब 78 वर्षों से मां काली के प्रति लोगों की गहरी आस्था है। मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मुराद यहां पूरी होती है। यही वजह है कि दीपावली के मौके पर पूर्णिया सहित कोसी-सीमांचल, पश्चिम बंगाल और नेपाल तक से श्रद्धालु मन्नतें पूरी होने पर चढ़ावा चढ़ाने पहुंचते हैं। महेंद्रपुर धाम का काली मंदिर विशाल पीपल के पेड़ के नीचे बने छोटे से मंदिर में स्थित है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, वर्ष 1980 के आसपास पूर्णिया पूर्व में अमीन के पद पर पदस्थापित सिवान निवासी अशोक कुमार पांडेय को मां काली ने स्वप्न दिया था। इसके बाद मंदिर का निर्माण कराया गया। परिसर में दुर्गा मंदिर का निर्माण भी हो चुका है और हाल के वर्षों में काली मंदिर के भवन का नवीनीकरण कराया गया है। मंदिर में पास के गांव की मंगनी देवी सेविका के रूप में मां की देखभाल करती हैं। श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता ही इस मंदिर की आस्था को पीढ़ी-दर-पीढ़ी मजबूत कर रही है।  

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