Rahul Dholakia questioned National Award in Gujarat: 72 सालों के इतिहास में पहली बार कुछ अलग होने जा रहा है। ‘राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार’ (National Film Awards) समारोह का आयोजन देश की राजधानी दिल्ली के बजाय दूसरे अन्य राज्य में होने जा रहा है। आने वाली 22 सितंबर को यह भव्य समारोह गुजरात के केवडिया (एकता नगर) में आयोजित किया जाएगा, जहां राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू विजेताओं को सम्मानित करेंगी। हालांकि, परंपरा में हुए इस ऐतिहासिक बदलाव को लेकर सिनेमा जगत में बहस छिड़ गई है। डायरेक्टर राहुल ढोलकिया ने इस फैसले पर सार्वजनिक रूप से सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि आखिर गुजरात की क्यो?
डायरेक्टर राहुल ढोलकिया ने गुजरात को लेकर उठाया सवाल
फिल्म ‘परजानिया’ के लिए डायरेक्टर राहुल ढोलकिया को साल 2007 में नेशनल अवॉर्ड मिला था। अब उन्होंने ही सोशल मीडिया पर अपनी असहमति जताई है। ढोलकिया ने साफ कहा कि उन्हें दिल्ली से बाहर पुरस्कार समारोह करने पर आपत्ति नहीं है, बल्कि चुनाव किए गए स्थान पर सवाल है।
उन्होंने लिखा, “अगर आप 72 साल पुरानी परंपरा को तोड़कर किसी अन्य राज्य में जा रहे हैं, तो यह सम्मान उस राज्य या शहर को क्यों नहीं दिया जाना चाहिए जिसकी सिनेमाई विरासत कहीं अधिक बड़ी है? महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु या फिर हैदराबाद जैसे शहरों ने भारतीय सिनेमा में अतुलनीय योगदान दिया है। फिर गुजरात ही क्यों? केवडिया जहां ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ है, वह एक पर्यटन केंद्र जरूर है, लेकिन उसका सिनेमाई इतिहास से सीधा संबंध नहीं है।”
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार
विवादों के बीच 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के विजेताओं की घोषणा भी हो चुकी है। इस बार आदित्य सुहास जांभले की थ्रिलर फिल्म ‘आर्टिकल 370’ को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म चुना गया है, जबकि इसी फिल्म के लिए यामी गौतम ने सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार अपने नाम किया है।
सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार संयुक्त रूप से मलयालम सुपरस्टार ममूटी (फिल्म ‘ब्रह्मयुगम’) और कार्तिक आर्यन (फिल्म ‘चंदू चैंपियन’) को दिया जाएगा। इसके अलावा, रणदीप हुड्डा को ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ के लिए सर्वश्रेष्ठ नवोदित निर्देशक, नाग अश्विन की ‘कल्कि 2898 AD’ को सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म और धनुष की तमिल फिल्म ‘कैप्टन मिलर’ को सामाजिक व राष्ट्रीय मूल्यों की सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार मिला है।
केवडिया में होने जा रहा यह आयोजन जहां गुजरात के बढ़ते राष्ट्रीय कद को दर्शाता है, वहीं इसने इस बहस को भी जन्म दे दिया है कि देश के सबसे प्रतिष्ठित सांस्कृतिक आयोजनों का चयन किस आधार पर होना चाहिए।



