72 दिन वेंटिलेटर पर रहीं पार्वती की 7-महीने बाद मौत:भागीरथपुरा दूषित पानी कांड:महिला ने GBS को दी थी मात, 17 अगस्त से निजी अस्पताल में इलाज

72 दिन वेंटिलेटर पर रहीं पार्वती की 7-महीने बाद मौत:भागीरथपुरा दूषित पानी कांड:महिला ने GBS को दी थी मात, 17 अगस्त से निजी अस्पताल में इलाज

भागीरथपुरा दूषित पानी कांड के दौरान गंभीर रूप से बीमार हुईं 67 वर्षीय पार्वती कोंडला की बुधवार रात मौत हो गई। पार्वती करीब 72 दिन तक वेंटिलेटर और आईसीयू में भर्ती रही थीं। उन्हें दुर्लभ गिलियन-बैरे सिंड्रोम (GBS) हुआ था। उस समय डॉक्टरों ने उनके बचने की संभावना महज 3-4% बताई थी, लेकिन करीब 72 दिन के इलाज के बाद उन्हें बचा लिया गया था। हालांकि, उनकी वर्तमान मौत का चिकित्सकीय कारण और इसका दूषित पानी की घटना से सीधा संबंध आधिकारिक रूप से स्पष्ट होना बाकी है। 17 अगस्त से निजी अस्पताल में चल रहा था इलाज पार्वती के बेटे नीलेश ने बताया कि उनकी मां की तबीयत दोबारा बिगड़ने के बाद 17 अगस्त से एक निजी अस्पताल में भर्ती थीं। लगातार इलाज चल रहा था और परिवार को हालत में सुधार की उम्मीद थी। इसी बीच बुधवार रात उनकी मौत हो गई। दिसंबर में उल्टी-दस्त के बाद बिगड़ी थी हालत पार्वती को दिसंबर 2025 में उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत बिगड़ने पर उन्हें अलग-अलग अस्पतालों से होते हुए बॉम्बे हॉस्पिटल रेफर किया गया। जांच में GBS सिंड्रोम की पुष्टि हुई थी। GBS में शरीर का इम्यून सिस्टम नसों पर हमला करता है। इससे शरीर में कमजोरी और गंभीर स्थिति में लकवे जैसी स्थिति बन सकती है। पार्वती की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें 16 दिन वेंटिलेटर और 22 दिन आईसीयू में रखा गया था। फेफड़ों की स्थिति खराब होने पर ट्रेकोस्टोमी की गई थी। वे करीब 18 दिन तक बेहोश भी रही थीं। 72 दिन बाद अस्पताल से हुई थीं डिस्चार्ज लंबे इलाज के बाद मार्च में उनकी हालत में सुधार शुरू हुआ। वे परिजनों को पहचानने लगी थीं और जवाब देने की कोशिश करने लगी थीं। 9 मार्च को उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया था। घर लौटने के बाद भी उनकी रिकवरी जारी थी। उन्हें ट्यूब के जरिए दिन में कई बार लिक्विड डाइट और प्रोटीन दिया जाता था। फिजियोथेरेपी और नियमित देखभाल के जरिए उन्हें दोबारा सामान्य स्थिति में लाने का प्रयास चल रहा था। इलाज का खर्च शासन ने उठाया था भागीरथपुरा में दूषित पानी की घटना के दौरान पार्वती के इलाज की शासन स्तर पर भी निगरानी की गई थी। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अस्पताल पहुंचकर उनकी तबीयत की जानकारी ली थी। परिजन के मुताबिक उस समय करीब 19.50 लाख रुपए के इलाज का खर्च शासन की ओर से उठाने का आश्वासन दिया गया था। परिवार के अनुसार अस्पताल से घर लौटने के बाद भी फिजियोथेरेपी, केयरटेकर और दवाओं पर हर महीने करीब 60 से 70 हजार रुपए खर्च हो रहे थे।

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