Shankar Sharma Real Feel GDP Growth: भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की मजबूत विकास दर दर्ज की है। इस आंकड़े के बीच शेयर बाजार के दिग्गज निवेशक शंकर शर्मा ने अर्थव्यवस्था की जमीनी तस्वीर पर अलग नजरिया पेश किया है। उन्होंने इसे ‘रियल फील जीडीपी’ यानी लोगों को वास्तव में महसूस होने वाली आर्थिक विकास दर का नाम दिया। शंकर शर्मा ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि वह अब सकल घरेलू उत्पाद की विकास दर को लेकर चल रही बहस में नहीं पड़ना चाहते। इसके बजाय वह यह देखना पसंद करते हैं कि अर्थव्यवस्था का असर जमीन पर कैसा दिखाई देता है।
भारत की ‘रियल फील जीडीपी’ सिर्फ 2-3 प्रतिशत
शंकर शर्मा ने भारत को करीब 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बताया। उन्होंने कहा कि करीब 7 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ने के बावजूद लोगों की जीवन गुणवत्ता खराब होती दिखाई दे रही है। उनके मुताबिक, लोग तनाव में नजर आते हैं और शहरों में यातायात की स्थिति अव्यवस्थित दिखती है। उन्होंने आगे कहा कि भारत के शहर और गांव कई जगह 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के बजाय 100 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था जैसे दिखाई देते हैं। इसी आधार पर उन्होंने भारत की रियल फील जीडीपी विकास दर सिर्फ 2-3 प्रतिशत बताई। यह कोई आधिकारिक आर्थिक आंकड़ा नहीं है बल्कि शंकर शर्मा की ओर से जमीनी हालात को देखने का उनका अपना नजरिया है।
यूरोप की तस्वीर को बताया बिल्कुल अलग
शंकर शर्मा ने भारत की तुलना यूरोप से भी की। उन्होंने कहा कि यूरोप में वास्तविक जीडीपी विकास दर करीब 2-3 प्रतिशत है। इसके बावजूद वहां लोगों का जीवन उन्हें ज्यादा खुशहाल दिखाई देता है। उन्होंने यूरोप के शहरों और गांवों में साफ-सफाई और बेहतर व्यवस्था का जिक्र किया। उनके मुताबिक, कैफे और रेस्तरां लोगों से भरे रहते हैं। सड़कों पर संगीत और सार्वजनिक जगहों पर बेहतर माहौल दिखाई देता है। उन्होंने गांवों को भी आकर्षक और व्यवस्थित बताया।
इसी आधार पर शंकर शर्मा ने यूरोप की रियल फील जीडीपी विकास दर 7.8 प्रतिशत आंकी। यानी उनके आकलन में यूरोप की महसूस होने वाली आर्थिक स्थिति आधिकारिक विकास दर से कहीं बेहतर है।
7.8 प्रतिशत GDP पर भी जारी है बहस
शंकर शर्मा की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत की पहली तिमाही की GDP विकास दर 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई है। अप्रैल-जून तिमाही में अर्थव्यवस्था की वृद्धि पिछले साल की संशोधित 6.9 प्रतिशत दर से तेज रही। हालांकि, पिछली तिमाही की संशोधित 8.6 प्रतिशत वृद्धि के मुकाबले यह कम है।
इस आंकड़े को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच भी बहस चल रही है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 7.8 प्रतिशत की विकास दर का बचाव किया है। उन्होंने आलोचकों पर पुराने और नए GDP आंकड़ों की तुलना कर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया। वहीं, पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने भी GDP आंकड़ों को लेकर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने उनके बयानों का हवाला देते हुए सरकार पर आर्थिक आंकड़ों को लेकर निशाना साधा है।
GDP और जमीनी हालात में अंतर का सवाल
आधिकारिक GDP आंकड़ा किसी देश में एक निश्चित अवधि के दौरान आर्थिक गतिविधियों और उत्पादन की स्थिति बताता है। लेकिन इससे यह पूरी तरह पता नहीं चलता कि आम लोगों के रोजमर्रा के जीवन में आर्थिक विकास किस तरह दिखाई दे रहा है।
शंकर शर्मा का रियल फील जीडीपी वाला नजरिया इसी अंतर की ओर इशारा करता है। हालांकि, इसे किसी आधिकारिक आर्थिक माप या वैकल्पिक GDP आंकड़े के तौर पर नहीं देखा जा सकता। यह उनके व्यक्तिगत आकलन पर आधारित है।

