5400 डॉलर पार कंटेनर भाड़ा, ग्वालियर के 150 उत्पादकों के 10 करोड़ फंसे, 5500 टन सेंडस्टोन डंप

5400 डॉलर पार कंटेनर भाड़ा, ग्वालियर के 150 उत्पादकों के 10 करोड़ फंसे, 5500 टन सेंडस्टोन डंप
  • दो महीने में तेज रफ्तार कारोबार पर लगा ब्रेक, बढ़ती लागत और डीम्ड एक्सपोर्ट की बंद राहों ने बढ़ाई मुश्किलें

ग्वालियर. ग्वालियर के सेंडस्टोन कारोबार पर इन दिनों कंटेनर भाड़े की बढ़ती मार भारी पड़ रही है। निर्यात के लिए कंटेनर का भाड़ा लगातार बढ़ते-बढ़ते अब 5400 डॉलर से ऊपर पहुंच गया है। कम मूल्य वाले कार्गो में शामिल सेंडस्टोन के लिए बढ़ा हुआ परिवहन खर्च सीधे उसकी प्रतिस्पर्धात्मक कीमत पर असर डाल रहा है। नतीजा यह है कि जो कारोबार करीब दो महीने पहले तेज रफ्तार से चल रहा था, वह अब अचानक ठहर गया है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि ग्वालियर अंचल में करीब 200 कंटेनरों के बराबर, लगभग 5500 मीट्रिक टन सेंडस्टोन तैयार माल स्टॉक में फंसा हुआ है। खरीदारों द्वारा माल होल्ड किए जाने से ग्वालियर अंचल के 150 उत्पादकों की बड़ी रकम (करीब 10 करोड़) माल में अटक गई है। तैयार माल के स्टॉक ने इकाइयों की जगह भी घेर ली है, जिससे नए माल की प्रोसेसिंग प्रभावित हो रही है।

माल तैयार, खरीदार गायब : पूंजी भी फंसी और जगह भी
सेंडस्टोन उद्योग में सबसे बड़ी चिंता केवल बिक्री रुकने की नहीं है। तैयार माल का स्टॉक बढऩे से उत्पादकों की कार्यशील पूंजी भी फंस गई है। दूसरी ओर, इकाइयों में तैयार माल रखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं बच रही है। इससे कच्चे माल को लाने और नए ऑर्डर के लिए उत्पादन शुरू करने में भी दिक्कतें पैदा हो रही हैं।

ये आ रही परेशानियां

  • फंसा करोड़ों का निवेश : माल न बिकने से उत्पादकों का भारी-भरकम पैसा ब्लॉक हो गया है।
  • ठप होती कार्यशैली : कारखानों में जगह न बचने के कारण नए माल की प्रोसेसिंग पर ब्रेक लग गया है।
  • रोजी-रोटी पर संकट : जो इंडस्ट्री 24 घंटे ओवरटाइम के साथ दौड़ रही थी, वह अब सिर्फ 8 घंटे सिमट गई है, जिससे मजदूरों की दिहाड़ी भी प्रभावित हुई है।

सब्सिडी मिली, लेकिन डीम्ड एक्सपोर्टर के हाथ खाली
सरकार की ओर से निर्यात परिवहन भाड़ा सब्सिडी शुरू किए जाने को उद्योग ने राहत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना है। हालांकि, सेंडस्टोन कारोबारियों की शिकायत है कि मौजूदा व्यवस्था का लाभ मुख्य रूप से उन्हीं को मिल पा रहा है, जिनका अपना मैन्युफैक्चरिंग सेटअप है और जो स्वयं निर्यात करते हैं।

200 से अधिक कंटेनर का माल फंसा पड़ा है
सेंड स्टोन कारोबार इन दिनों मालभाड़े की मार झेल रहा है। 2,000 रुपए रहने वाला मालभाड़ा 5,400 डॉलर के पार जा चुका है। ऐसे में दो महीने से 200 से अधिक कंटेनर का माल अटका पड़ा है। सबसे बड़ी समस्या माल के स्टॉॅक करने की है क्योंकि उद्यमियों के लिए वेयरहाउस जैसी कोई व्यवस्था नहीं है जहां जरूरत के मुताबिक कच्चा माल या तैयार माल रखा जा सकता है।

  • सत्यप्रकाश शुक्ला, अध्यक्ष, स्टोन पार्क ग्वालियर इंडस्ट्रीज ऐसोसिएशन

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