महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को नए ‘रूल्स ऑफ बिजनेस’ (Rules of Business) के तहत मंत्रियों के फैसलों को पलटने की ‘वीटो पावर’ मिलने की खबरों के बीच राज्य सरकार के सूत्रों ने बुधवार को स्थिति स्पष्ट की है। सरकार का कहना है कि मुख्यमंत्री के पास मंत्रियों के फैसलों को रद्द या वापस लेने का अधिकार कोई नया प्रावधान नहीं है। यह अधिकार 1975 से लागू रूल्स ऑफ बिजनेस के तहत पहले से ही मुख्यमंत्री के पास मौजूद था।
एएनआई ने सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया कि नए नियमों में ऐसा कहीं नहीं कहा गया है कि मुख्यमंत्री को यह अधिकार पहली बार दिया गया है। संविधान के तहत मंत्रियों को मिलने वाली शक्तियां मूल रूप से मुख्यमंत्री के पास होती हैं। मुख्यमंत्री विभिन्न विभागों का आवंटन करते समय इन शक्तियों को संबंधित मंत्रियों को सौंपते हैं। इसलिए सामान्य प्रशासनिक मामलों में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार मुख्यमंत्री के पास रहता है।
हालांकि, मंत्रियों द्वारा अर्ध-न्यायिक मामलों में लिए गए फैसलों की स्थिति अलग है। ऐसे मामलों में मंत्री अपने अधिकार का स्वतंत्र रूप से इस्तेमाल करते हैं और उनका फैसला अंतिम माना जाता है। इन फैसलों के खिलाफ सामान्य तौर पर अपील का प्रावधान नहीं होता और संबंधित पक्ष हाई कोर्ट का रुख कर सकता है।
2020 में शुरू हुई थी नियम में बदलाव की प्रक्रिया
सरकार ने बताया कि महाराष्ट्र के ‘रूल्स ऑफ बिजनेस’ में व्यापक बदलाव की प्रक्रिया काफी पहले शुरू हो गई थी। अक्टूबर 2020 में तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने सरकार के ‘रूल्स ऑफ बिजनेस’ में संशोधन के लिए एक अध्ययन समूह का गठन किया था। इस समूह में तत्कालीन मुख्य सचिव सीताराम कुंटे के अलावा मनुकुमार श्रीवास्तव, सुजाता सौनिक, देबाशीष चक्रवर्ती और श्रीकांत देशपांडे शामिल थे।
जुलाई 2021 में उद्धव ठाकरे सरकार ने एक नए और संशोधित अध्ययन समूह का गठन किया। इसमें तत्कालीन मुख्य सचिव मनुकुमार श्रीवास्तव, सुजाता सौनिक, देबाशीष चक्रवर्ती, संजय चहांदे, भूपेंद्र गुरव और विकास चंद्र रस्तोगी को शामिल किया गया था।
इस अध्ययन समूह ने फरवरी 2022 में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी। उस समय उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे। इसके बाद फरवरी 2024 में, जब एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री थे, अध्ययन समूह ने राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।
इसके बाद जनवरी 2025 में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री अजित पवार के सामने रिपोर्ट का प्रस्तुतीकरण किया गया। कुछ दिनों बाद मंत्रिमंडल ने इसे मंजूरी दे दी।
1975 से लागू नियमों में पहली बार व्यापक बदलाव
सरकारी सूत्रों के अनुसार, नए रूल्स ऑफ बिजनेस तैयार करते समय केंद्र सरकार और दूसरे राज्यों में लागू नियमों का भी अध्ययन किया गया। महाराष्ट्र में 1975 से रूल्स ऑफ बिजनेस लागू थे। समय-समय पर इनमें कुछ संशोधन किए गए, लेकिन इतने वर्षों में इनका व्यापक स्तर पर पुनरीक्षण नहीं हुआ था। इससे पहले 1990 में भी कुछ संशोधन किए गए थे।
अब नियमों की संख्या 15 से बढ़ाकर 48 कर दी गई है। इसी तरह पहले दो शेड्यूल थे, जिन्हें बढ़ाकर अब चार कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि यह बदलाव प्रशासनिक प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से किया गया है।
इस तरह महाराष्ट्र सरकार की सफाई के बाद यह स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री के पास मंत्रियों के प्रशासनिक फैसलों पर अंतिम अधिकार का प्रावधान नया नहीं है। नए रूल्स ऑफ बिजनेस में मुख्य रूप से पहले से मौजूद व्यवस्थाओं को व्यापक रूप से व्यवस्थित और स्पष्ट किया गया है।

